
नई दिल्ली: झारखंड के छात्रों और राज्य सरकार के बीच सोमवार रात सहमति बन गई। अब इस मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। यह खबर सुनकर अच्छा लगा।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाया?
इसके साथ ही कांग्रेस ने मंगलवार को मोदी सरकार पर जाति जनगणना को बाधित करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही पूछा कि 2027 की जनगणना में जाति चयन के लिए ड्रॉप-डाउन मेनू क्यों शामिल नहीं किया गया है। वहीं, केंद्र ने सितंबर 2021 में सर्वोच्च न्यायालय में अपने हलफनामे में इसकी सिफारिश की थी।
विपक्षी दल ने क्या दावा किया?
विपक्षी दल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने 30 अप्रैल, 2025 को जाति जनगणना की घोषणा करके पूरी तरह से यू-टर्न लिया था। इसके साथ ही अब वे अपने पहले के यू-टर्न पर भी यू-टर्न ले रहे हैं। कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 21 सितंबर, 2021 को मोदी सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में एक हलफनामा दायर कर जाति जनगणना की याचिका को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था।
जयराम रमेश ने एक्स पर क्या कहा?
रमेश ने एक्स पोस्ट में लिखा, ‘हालांकि, हलफनामे के पैरा 12 (डी) में निम्नलिखित कहा गया है 2011 की जनगणना से पहले जाति का कोई रजिस्टर तैयार नहीं किया गया था। जाति रजिस्टर के लिए यह आदर्श होता कि जातियों के चयन के लिए एक ड्रॉप-डाउन मेनू दिया जाता, जिससे कुछ सुसंगत डेटा उपलब्ध हो पाता जिस पर भरोसा किया जा सकता था।’
बिहार और तेलंगाना में जाति सर्वेक्षण को लेकर क्या कहा?
उन्होंने बताया कि बिहार और तेलंगाना में जाति सर्वेक्षण किए जाने से पहले ही इस तरह का मेनू तैयार किया गया था। रमेश ने बताया कि यह सुझाव कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से 5 मई, 2025 को प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में भी शामिल था। मोदी सरकार जाति जनगणना को नाकाम करना चाहती है। प्रधानमंत्री ने 30 अप्रैल, 2025 को पूरी तरह से यू-टर्न लेते हुए घोषणा की कि जाति जनगणना होगी, जिसे उन्होंने पहले शहरी नक्सलवादी विचार कहकर आलोचना की थी।



