राहुल गांधी जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 बहाल करना चाहते हैं : गिरिराज सिंह

राहुल, सोनिया को अनुच्छेद 370 और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रस्ताव पर रुख स्पष्ट करना चाहिए: रेड्डी

नयी दिल्ली/जम्मू. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बृहस्पतिवार को दावा किया कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करना चाहते हैं. उन्होंने साथ ही कहा कि इस कदम को देश स्वीकार नहीं करेगा. केंद्रीय मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने श्रीनगर में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन की प्राथमिकता है.

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ लद्दाख के लोगों को उनके लोकतांत्रिक अधिकार वापस दिलाना है.
केंद्र ने 2019 में जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था और तत्कालीन राज्य को जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के रूप में दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था.

कपड़ा मंत्री सिंह ने यहां दिल्ली हाट में ‘शिल्प दीदी महोत्सव’ से इतर पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में कहा, ”यह राहुल गांधी के दिमाग में है. वह कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करने के बारे में सोच रहे हैं लेकिन देश इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा.” भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता नेता ने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता तब से थके हुए लग रहे हैं जब से उनसे उनके ‘धर्म और जाति’ के बारे में पूछा गया है.

कांग्रेस मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रही है, लेकिन उसने विशेष दर्जे को रद्द किए जाने के मुद्दे पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है. भाजपा महासचिव और जम्मू-कश्मीर के पार्टी प्रभारी तरुण चुघ ने राहुल गांधी के जम्मू-कश्मीर दौरे पर निशाना साधते हुए बुधवार को कांग्रेस नेता से अनुच्छेद 370 और 35ए पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करने को कहा था.

राहुल, सोनिया को अनुच्छेद 370 और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रस्ताव पर रुख स्पष्ट करना चाहिए: रेड्डी

केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस से कहा कि वह अनुच्छेद 370 पर और इसे वापस लेने के अपने सहयोगी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रस्ताव पर अपना रुख स्पष्ट करे. जम्मू कश्मीर के राज्य के दर्जे और अनुच्छेद 370 की बहाली के साथ-साथ वर्ष 2000 में तत्कालीन विधानसभा द्वारा पारित स्वायत्तता के प्रस्ताव का क्रियान्वयन नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणापत्र में घोषित 12 गारंटियों में से एक है.

रेड्डी ने जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक संगठनात्मक बैठक की अध्यक्षता की. रेड्डी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणापत्र पर कांग्रेस से सवाल किया और कहा कि फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली पार्टी ने केंद्र शासित प्रदेश में विभिन्न वर्गों के लोगों को दिए गए अधिकारों को उलटने की कोशिश की है.

जून, 2000 में अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें राज्य में वर्ष 1953 से पहले की संवैधानिक स्थिति को बहाल करने की मांग की गई. हालांकि, इसे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खारिज कर दिया था.

जम्मू कश्मीर में भाजपा के चुनाव प्रभारी रेड्डी ने यहां भाजपा मुख्यालय पर संवाददाताओं से कहा, ”सोनिया गांधी और राहुल गांधी को देश को नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रस्ताव के बारे में अवगत कराना चाहिए. तरुण चुघ पहले ही उनसे सवाल कर चुके हैं. उन्हें अनुच्छेद 370 पर कांग्रेस के रुख को भी स्पष्ट करना चाहिए.” उन्होंने यह भी पूछा कि क्या कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू कश्मीर के लोगों के अधिकारों को फिर से छीनना चाहते हैं, वो अधिकार जो उन्हें बीआर आंबेडकर के संविधान के आधार पर दिए गए थे.

रेड्डी ने कहा, ”वे पश्चिम पाकिस्तानी शरणार्थियों, महिलाओं, वाल्मीकि समाज, आदिवासियों और अन्य लोगों के अधिकार छीनना चाहते हैं. कांग्रेस को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए.” नरेन्द्र मोदी सरकार ने 2019 में जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था और पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया.
राहुल गांधी द्वारा श्रीनगर के एक होटल में आइसक्रीम का आनंद लेने के सवाल पर रेड्डी ने कहा कि यह मोदी सरकार के 10 साल के काम का नतीजा है कि वह लाल चौक जा सके और शांति से भोजन कर सके.

बैठक से इतर पत्रकारों से बात करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन की आलोचना की और इसे एक ‘बेकार गठबंधन’ करार दिया जो भाजपा को नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा. चुघ ने कहा, ”गठबंधन का भाजपा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जो बहुमत के साथ विजयी होगी.”

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