राजनाथ सिंह ने करुणानिधि की शतवार्षिकी पर जारी किया 100 रुपये का स्मारक सिक्का

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 18 Aug 2024 10:37 PM
राजनाथ सिंह ने करुणानिधि की शतवार्षिकी पर जारी किया 100 रुपये का स्मारक सिक्का
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चेन्नई. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पूर्व अध्यक्ष एम करुणानिधि की 100वीं पुण्यतिथि पर 100 रुपये का एक स्मारक सिक्का जारी किया और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री की प्रशंसा करते हुए उन्हें भारतीय राजनीति का एक ”महापुरुष” बताया. सिंह ने करुणानिधि के पुत्र एवं मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की उपस्थिति में सिक्का जारी किया.

सिंह ने कहा, ”करुणानिधि हमारे देश के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक हैं. एक ऐसे व्यक्ति जिनका प्रभाव तमिलनाडु की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ था. करुणानिधि भारतीय राजनीति के एक दिग्गज, एक सांस्कृतिक स्तंभ और सामाजिक न्याय के एक अथक समर्थक थे.” उन्होंने कहा कि ‘द्रविड़ियन चैंपियन’ की राजनीतिक यात्रा एक दृढ़ता, संकल्प और लोगों के साथ गहरे जुड़े हुए संबंध की कहानी है तथा पांच बार मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल आम लोगों की जरूरतों को पूरा करने की उनकी उल्लेखनीय क्षमता के लिए जाना जाता है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”भारतीय राजनीति के जटिल परिदृश्य में काम करते हुए वह सिर्फ एक क्षेत्रीय नेता नहीं थे, बल्कि एक राष्ट्रीय शख्सियत थे, जिनका प्रभाव पूरे देश में महसूस किया जाता था.” उन्होंने कहा कि करुणानिधि, जिन्हें प्यार से कलैगनार कहा जाता था, समझते थे कि भारतीय लोकतंत्र की ताकत विविध आवाजों और पहचानों को समायोजित करने की उसकी क्षमता में निहित है.
रक्षा मंत्री ने कहा, ”राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भागीदारी, गठबंधन सरकार में उनकी भूमिका और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ उनकी बातचीत भारत के विचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है.”

सिंह ने कहा, ”राज्य के अधिकारों पर उनका जोर, संघ के भीतर सत्ता के अधिक संतुलित और न्यायसंगत वितरण का आह्वान था.” करुणानिधि 1960 के दशक में एक नेता के रूप में उभरे, जो स्वतंत्रता के बाद के भारत में बड़े बदलाव का दौर था. ये वो दिन थे जब कई क्षेत्रीय दल उभरे और सरकार बनाने में भी कामयाब रहे. कई उत्तर भारतीय राज्यों में गठबंधन सरकारें बनीं.

सिंह ने कहा, ”उस समय उभरे कई क्षेत्रीय दल लुप्त हो चुके हैं, लेकिन करुणानिधि ने द्रमुक को इतना मजबूत आधार प्रदान किया कि यह 1960 के दशक की एकमात्र क्षेत्रीय पार्टी है जो आज भी सत्ता में है.” करुणानिधि के भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ अतीत के जुड़ाव को याद करते हुए सिंह ने कहा कि विचारों के मतभेदों के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार का समर्थन करते हुए एक सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाई. सिंह ने कहा कि उनका समर्थन राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों और महत्वपूर्ण घटनाओं के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण था. उन्होंने यह भी याद किया कि करुणानिधि ने मांग की थी कि मुख्यमंत्री को राष्ट्रीय दिवस पर तिरंगा फहराने की अनुमति दी जाए, जबकि यह कर्तव्य पहले राज्यपालों द्वारा निभाया जाता था.

सिंह ने कहा, ”उनकी आवाज का असर हुआ और यह निर्णय लिया गया कि स्वतंत्रता दिवस पर केवल मुख्यमंत्री ही झंडा फहराएंगे. इस तरह करुणानिधि 15 अगस्त 1974 को झंडा फहराने वाले तमिलनाडु के पहले मुख्यमंत्री भी बने.” रक्षा मंत्री ने कहा, ”करुणानिधि ने लोकतंत्र के लिए लड़ाई लड़ी और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अपना जीवन सर्मिपत कर दिया. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार भी लोकतंत्र और सहकारी संघवाद की शक्ति में विश्वास करती है. भारत न केवल अपने 1.4 अरब लोगों की आकांक्षाओं को पूरा कर रहा है, बल्कि लोगों को यह उम्मीद भी दे रहा है कि लोकतंत्र विकास लाता है और लोगों को सशक्त बनाता है.” उन्होंने कहा कि विकास के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता पक्षपातपूर्ण राजनीति से परे है, और अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश तिाा तमिलनाडु दोनों में रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित करने के अपने फैसले का हवाला दिया.

स्टालिन ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में करुणानिधि द्वारा अतीत में शुरू की गई कई कल्याणकारी पहलों को याद किया. इससे पहले सिंह और स्टालिन ने यहां मरीना में करुणानिधि की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की. उनके साथ द्रमुक सांसद कनिमोझी, राज्य के मंत्री उदयनिधि, केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन और भाजपा की प्रदेश इकाई के प्रमुख के. अन्नामलाई भी थे. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस अवसर पर शुभकामनाएं दीं. स्टालिन ने उनके संदेशों को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया.

अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि करुणानिधि ”भारतीय राजनीति, साहित्य और समाज में एक महान व्यक्ति थे.” उन्होंने कहा, ”वह हमेशा तमिलनाडु के विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रगति के प्रति भी भावुक रहते थे.” राहुल गांधी ने कहा कि करुणानिधि की सामाजिक प्रगतिशील दृष्टि और लोगों को सशक्त बनाने के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने लाखों लोगों के लिए सम्मानपूर्ण जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त किया.

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