Rajnath Singh: राजनाथ सिंह ने खालिदा जिया को दी श्रद्धांजलि, ढाका उच्चायोग जाकर शोक संदेश में लिखी ये बात

Rajnath Singh: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार को नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग गए और वहां उन्होंने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान रक्षा मंत्री ने खालिदा जिया के निधन पर एक शोक संदेश पर हस्ताक्षर भी किए। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर राजनाथ सिंह ने इसकी जानकारी भी दी।

राजनाथ सिंह ने खालिदा जिया को श्रद्धांजलि दी
राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में लिखा, ‘नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश के उच्चायोग जाकर बांग्लादेश की पूर्व पीएम और बीएनपी की अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया के निधन पर दुख जताया और शोक संदेश पर हस्ताक्षर किए। हमारी प्रार्थनाएं परिवार और बांग्लादेश के लोगों के साथ हैं।’

30 दिसंबर को हुआ था खालिदा जिया का निधन
बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया का बीते मंगलवार सुबह छह बजे ढाका में निधन हो गया था। वे 80 साल की थीं और पिछले काफी समय से बीमार थीं। बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ बांग्लादेश के संसद परिसर में खालिदा जिया को दफनाया गया। पूर्व प्रधानमंत्री को उनके दिवंगत पति जियाउर रहमान की कब्र के बगल में ही सुपुर्द ए खाक किया गया। भारत की तरफ से विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर खालिदा जिया को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। डॉ. जयशंकर ने ढाका में खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान से भी मुलाकात की थी और उन्हें प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हस्ताक्षरित शोक पत्र भी सौंपा था।

संबंधों में सुधार की कवायद
गौरतलब है कि बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के सत्ता से बेदखल होने के बाद से ही वहां हिंसा और अराजकता का माहौल है। वहां अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। भारत ने इसे लेकर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सामने नाराजगी भी जाहिर की। बांग्लादेश में भारत विरोध भी बढ़ता जा रहा है, जिसे लेकर भी दोनों देशों के संबंधों में थोड़ा रूखापन आया है। इस बीच पाकिस्तान, बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने में जुटा है। ऐसे हालात में अब विदेश मंत्री का खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने ढाका जाना और गुरुवार को राजनाथ सिंह का बांग्लादेश उच्चायोग जाकर पूर्व पीएम को श्रद्धांजलि देना भारत द्वारा संबंधों को बेहतर करने की कूटनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

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