चंद्रयान-3 की सफलता पर भारतीय वैज्ञानिकों को बधाई देने का प्रस्ताव रास में सर्वसम्मति से पारित

सपा नेता की वैज्ञानिकों से अनूठी मांग : चंद्रमा की बदसूरत तस्वीरें जारी नहीं करें

नयी दिल्ली. राज्यसभा ने चंद्रयान-3 अभियान की सफलता के लिए भारतीय विशेषकर महिला वैज्ञानिकों को बधाई देने का प्रस्ताव बुधवार को सर्वसम्मति से पारित कर दिया. ‘भारत की गौरवशाली अंतरिक्ष यात्रा चंद्रयान-3’ की सफल सॉफ्ट लैंडिंग विषय पर उच्च सदन में सात घंटे से अधिक समय तक हुई चर्चा के बाद इस प्रस्ताव को पारित किया गया.

चर्चा के दौरान विभिन्न दलों के सदस्यों ने मांग की थी कि चंद्रयान-3 अभियान की सफलता के लिए भारतीय वैज्ञानिकों को बधाई देने हेतु सदन में एक प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए. इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए सभापति जगदीप धनखड़ ने चर्चा के अंत में एक प्रस्ताव पढ.ा जिसे सदन ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया.

प्रस्ताव में कहा गया है, ”भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम राष्ट्रीय गौरव का विषय है. यह अंर्तिनहित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी एवं वैज्ञानिक कौशल के बारे में एक सतत साक्ष्य है. सकारात्मक पारिस्थितिकी तंत्र एवं दूरर्दिशतापूर्ण नेतृत्व ने हमारे वैज्ञानिकों को उनके पूर्ण सामर्थ्य का लाभ उठाने और उनकी ऊर्जा को उन्मुक्त करने और इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को हासिल करने में समर्थ बनाया. यह सदन वैज्ञानिकों की सराहना एवं सम्मान करता है, जिनमें विशेषतौर पर महिला वैज्ञानिक भी शामिल हैं, जिन्होंने चंद्रमा के अविजित दक्षिण ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिग करने की उपलब्धि को हासिल किया. यह उपलब्धि तथा अन्य अंतरिक्ष अभियान दीर्घकाल तक बने रहने वाले सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करेंगे. ”

सपा नेता की वैज्ञानिकों से अनूठी मांग : चंद्रमा की बदसूरत तस्वीरें जारी नहीं करें

राज्यसभा में बुधवार को उस समय हंसी की लहर दौड़ पड़ी जब समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिको से अनूठी मांग की कि चंद्रयान-3 अभियान के तहत खींची जा रही चंद्रमा की बदसूरत तस्वीरों को वे अपने अध्ययन के लिए रखें, उन्हें जारी नहीं करें क्योंकि चंद्रमा को खूबसूरती का प्रतीक मानने वाले लोगों के मन को यह बात लग जाती है.

यादव ने ‘भारत की गौरवशाली अंतरिक्ष यात्रा चंद्रयान-3’ की सफल सॉफ्ट लैंडिंग विषय पर चर्चा में भाग लेते हुए यह अनूठी मांग की. उन्होंने कहा, ”अनंतकाल से हम लोग चंद्रमा को बहुत खूबसूरत मानते रहे. हम अपने वैज्ञानिकों से कहेंगे कि चंद्रमा की बदसूरत फोटो मत भेजिए, रिसर्च करते रहिए.” सपा नेता की इस अनूठी मांग से सदस्य ही नहीं सभापति जगदीप धनखड़ भी खिलखिला कर हंस पड़े.
इससे पहले यादव ने मध्यकाल के प्रसिद्ध हिंदी कवि केशव के एक दोहे का उल्लेख किया…

”केसव केसन अस करि ज्यों अरि हूं न कराय चंद्रबदन मृगलोचनी बाबा बाबा कहि कहि जाय” यादव ने कहा कि केशव ने अपने श्वेत केशों को कोसते हुए कहा कि उनके कारण चंद्रमा के समान मुख वाली और हिरन के समान आंखों वाली लड़कियां उन्हें बाबा कहकर संबोधित करने लगी हैं. सपा नेता ने कहा कि महिलाओं के नाम शशि प्रभा या चंद प्रभा मिलते हैं वहीं पुरुषों के नाम में चंद लगा रहता है जैसे सुभाष चंद, मानिक चंद आदि. उन्होंने कहा कि यह इसलिए रहता है क्योंकि चंद्रमा सुंदरता का प्रतीक है.

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि प्रशासनिक सुधारों से देश के अंतरिक्ष क्षेत्र को मिली गति

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को नौकरशाही के प्रभाव से मुक्त कराने के विपक्ष के सुझाव को खारिज करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने इस दिशा में भारत सरकार द्वारा किए गए प्रशासनिक सुधारों की सराहना की है.

वित्त मंत्री सीतारमण ‘भारत की गौरवशाली अंतरिक्ष यात्रा और चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग’ विषय पर उच्च सदन में चर्चा में हस्तक्षेप कर रही थीं. उन्होंने कहा कि इस विषय पर चर्चा के दौरान विपक्ष के एक सदस्य ने मांग की कि नौकरशाही को विज्ञान से दूर रखा जाना चाहिए और इसरो को नौकरशाही के प्रभाव से मुक्त करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी माइक गोल्ड ने कहा है कि भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र में नौकरशाही में किए गए सुधार से क्षेत्र को तेजी से बढ़ने में मदद मिली है. वित्त मंत्री ने कहा कि नौकरशाही क्षेत्र को बाधित नहीं कर रही है, बल्कि किए गए सुधारों से संबंधित क्षेत्र को तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिली है.

चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर पहुंचने में ज्यादा समय लेने पर की गई टिप्पणी का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि वास्तव में इसरो ने इस मिशन के लिए गैर-पारंपरिक और नवोन्मेषी रास्ता चुना ताकि यात्रा के दौरान कम ईंधन की खपत हो और पूरा मिशन किफायती हो. उन्होंने कहा कि भारत का चंद्रयान-3 मिशन चंद्रमा पर जल्दी पहुचंने के लिए किसी देश के साथ होड़ में नहीं था. उन्होंने कहा कि इस मिशन पर करीब 615 करोड़ रुपये का खर्च आया जो अंतरिक्ष पर केंद्रित कई फिल्मों के बजट से कहीं कम था.

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