नयी दिल्ली. केंद्रीय कानून मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता किरेन रीजीजू ने शुक्रवार को यह कहते हुए एक बार फिर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा कि ‘वास्तव में लोकतंत्र की हत्या’ 1975 में की गयी थी. उनका संदर्भ कांग्रेस की तत्कालीन सरकार के दौरान आपातकाल लगाये जाने से जुड़ा था.
मंत्री ने कहा कि (तब) कोई भी विदेशी सत्ता के हस्तक्षेप की मांग नहीं करने गया था. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीयों ने लड़ाई लड़ी और लोकतंत्र को बहाल किया, क्योंकि लोकतंत्र भारतीय लोगों के दिमाग और आत्मा में बसता है. रीजीजू ने कहा, ‘‘जब 1975 में कांग्रेस पार्टी द्वारा भारतीय लोकतंत्र की सही मायने में हत्या कर दी गई थी, तो कोई भी विदेशी सत्ता के हस्तक्षेप की मांग करने विदेशी भूमि पर नहीं गया था. भारतीय लोगों ने लड़ाई लड़ी और लोकतंत्र को बहाल किया, क्योंकि लोकतंत्र भारतीयों के दिमाग और आत्मा में बसता है.’’ इस बीच, पिछले साल कांग्रेस छोड़ने वाले राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, ‘‘हमें विदेश से समर्थन की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हमारी लड़ाई हमारी अपनी है.’’
उन्होंने यह भी कहा,‘‘हमें आगे चलने के लिए बैसाखी की जरूरत नहीं है.’’ भाजपा के कई नेताओं ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस को उस वक्त आड़े हाथों लिया था, जब उसके वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी को लोकसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहराये जाने के मामले में जर्मनी के विदेश मंत्रालय और डॉयचे वेले के मुख्य अंतरराष्ट्रीय संपादक रिचर्ड वॉकर द्वारा भारतीय लोकतंत्र के संबंध में की गयी टिप्प्णी को लेकर उनका धन्यवाद किया था.
रीजीजू ने बृहस्पतिवार को सिंह के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए गांधी पर निशाना साधा था. रीजीजू ने कटाक्ष करते हुए कहा था, ‘भारत के आंतरिक मामलों में दखलअंदाजी के लिए विदेशी ताकतों को न्योता देने के लिए राहुल गांधी का शुक्रिया.’ रीजीजू ने आगे लिखा, ‘‘याद रखें, भारतीय न्यायपालिका विदेशी हस्तक्षेप से प्रभावित नहीं हो सकती है. भारत अब ‘विदेशी प्रभाव’ को बर्दाश्त नहीं करेगा, क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हैं.’’
विदेश से समर्थन की जरूरत नहीं : सिब्बल ने दिग्विजय के जर्मनी का आभार जताने पर कहा
राहुल गांधी को लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने का संज्ञान लेने के लिए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा जर्मनी का आभार जताए जाने के एक दिन बाद राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को कहा, ‘‘हमें विदेश से समर्थन की जरूरत नहीं है, क्योंकि हमारी लड़ाई हमारी अपनी है.’’ दिग्विजय से असहमति जताते हुए सिब्बल ने यह भी कहा, ‘‘हमें आगे चलने के लिए बैसाखियों की जरूरत नहीं है.’’ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल के दौरान केंद्रीय मंत्री रहे सिब्बल ने पिछले साल मई में कांग्रेस छोड़ दी थी और समाजवादी पार्टी (सपा) के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे.
दिग्विजय ने राहुल गांधी को लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने का संज्ञान लेने के लिए जर्मनी के विदेश मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय प्रसारणकर्ता ‘डॉयचे वैले’ के मुख्य अंतरराष्ट्रीय संपादक रिचर्ड वाकर का आभार जताया था. सिब्बल ने ट्वीट कर कहा, ‘‘दिग्विजय सिंह : ‘भारत में लोकतंत्र से किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है, इसका संज्ञान लेने के लिए र्बिलन का शुक्रिया.’ मेरी राय : हमें आगे चलने के लिए बैसाखियों की जरूरत नहीं है. हमें विदेश से समर्थन की जरूरत नहीं है. हमारी लड़ाई हमारी अपनी है और उसमें हम एक साथ हैं.’’
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा जर्मनी को धन्यवाद दिए जाने के बाद विपक्षी पार्टी पर ‘भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के लिए विदेशी ताकतों को आमंत्रित करने’ का आरोप लगाया था. वहीं, कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा था कि उसका दृढ़ विश्वास है कि भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को अपने लोकतंत्र को उत्पन्न खतरों से खुद निपटना होगा. पार्टी ने भाजपा पर अडाणी मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया था.