सभी भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने से ही देश सशक्त होगा : अमित शाह

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 04 Aug 2023 07:50 PM
सभी भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने से ही देश सशक्त होगा : अमित शाह
ऑडियो सुनें

नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि हिंदी की स्थानीय भाषाओं से प्रतिस्पर्धा नहीं है और सभी भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने से ही देश सशक्त होगा. आधिकारिक बयान के अनुसार, यहां राजभाषा पर संसदीय समिति की 38वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए शाह ने कहा कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए इससे बेहतर समय और कोई नहीं हो सकता, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वैश्विक मंचों पर हिंदी और अन्य सभी भारतीय भाषाओं को गर्व के साथ प्रस्तुत करते हैं.

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 10 भाषाओं में इंजीनियरिंग और मेडिकल पाठ्यक्रम शुरू करने की पहल की है और जल्द ही ये पाठ्यक्रम सभी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होंगे. उन्होंने कहा कि वह क्षण स्थानीय भाषाओं और आधिकारिक भाषाओं के उत्थान की शुरुआत का प्रतीक होगा.

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने संसद में एक भी भाषण अंग्रेजी में नहीं दिया है और सरकार के केंद्रीय मंत्री भी प्रयास करते हैं कि भारतीय भाषाओं में भाषण दें. उन्होंने कहा कि इससे विभिन्न भाषाओं को जोड़ने के आंदोलन को काफी गति मिलती है. गृह मंत्री ने कहा कि आधिकारिक भाषा की स्वीकार्यता कानून या परिपत्र से नहीं, बल्कि सद्भावना, प्रेरणा और प्रोत्साहन से मिलती है.

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक अन्य शासकों के अधीन रहने के बाद भी भारतीय भाषाएं और उनके शब्दकोश बरकरार रहे, जो एक बड़ी उपलब्धि है और भाषाओं ने देश को एकजुट करने का काम किया है. गृह मंत्री ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव वर्ष में प्रधानमंत्री मोदी ने देश के सामने ‘पंच प्रण’ रखे हैं, जिनमें से दो प्रण – विरासत का सम्मान और गुलामी के निशान मिटाना है.

उन्होंने कहा कि इन दोनों प्रण को शत-प्रतिशत लागू करने के लिए सभी भारतीय भाषाओं और आधिकारिक भाषाओं को अपनी ताकत दिखानी होगी. शाह ने कहा कि भाषा के सम्मान के बिना विरासत का सम्मान अधूरा है और आधिकारिक भाषा की स्वीकार्यता तभी मिलेगी, जब सभी लोग स्थानीय भाषाओं को सम्मान देंगे.

उन्होंने कहा कि आधिकारिक भाषा के प्रति बिना किसी विरोध के स्वीकार्यता बढ़ाने की जरूरत है, भले ही इसकी गति धीमी हो.
गृह मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से 2014 तक, राजभाषा पर संसदीय समिति की रिपोर्ट के नौ खंड प्रस्तुत किए गए. उन्होंने कहा कि 2019 से तीन खंडों को मंजूरी दी गई है. उन्होंने कहा कि ये खंड विषयवार तैयार किए गए हैं और 12वें खंड का विषय ‘सरलीकरण’ है. बैठक के दौरान राजभाषा पर संसदीय समिति की रिपोर्ट के 12वें खंड को भी मंजूरी दी गई, जिसे राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा.

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Yogesh Kumar Sahu