ईडी की सोरेन से पूछताछ के बीच रांची में सुरक्षा कड़ी की गई, निषेधाज्ञा लागू

सोरेन परिवार में कलह: सीता ने कल्पना को मुख्यमंत्री बनाने का विरोध किया

रांची/नयी दिल्ली. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जारी पूछताछ के बीच रांची के प्रमुख इलाकों में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई और राज्य की राजधानी में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नजर रखने के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है. अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी.

भूमि घोटाले से जुड़े कथित धन शोधन मामले में सोरेन का बयान दर्ज करने के लिए ईडी के अधिकारी अपराह्न करीब एक बजकर 20 मिनट पर मुख्यमंत्री आवास पहुंचे. एक अधिकारी ने बताया कि पूछताछ पिछले पांच घंटे से ज्यादा समय से जारी है. मुख्यमंत्री के ठिकाने को लेकर जारी कयासों के बीच सोरेन मंगलवार को यहां अपने आधिकारिक आवास पहुंचे और सत्तारूढ. गठबंधन के विधायकों की बैठक की अध्यक्षता की.

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा आदेश मुख्यमंत्री आवास, राजभवन और डोरंडा स्थित ईडी कार्यालय सहित प्रमुख स्थानों पर 100 मीटर के दायरे में सुबह नौ बजे से रात 10 बजे तक प्रभावी रहेगा. प्रतिबंध के तहत इन क्षेत्रों में और इसके आसपास प्रदर्शन, रैलियां या बैठकें आयोजित नहीं की जा सकेंगी. विशेष टीम का नेतृत्व वित्त सचिव प्रशांत कुमार कर रहे हैं. इसमें खनन निदेशक ए. राजकमल और विशेष शाखा के महानिरीक्षक (आईजी) प्रभात कुमार भी शामिल हैं.

विज्ञप्ति में कहा गया है कि ईडी के अधिकारियों ने 20 जनवरी को यहां सोरेन के आवास पर उनसे पूछताछ की थी और उस दौरान राज्य भर में विरोध प्रदर्शन हुआ था. इसके मद्देनजर संघीय एजेंसी ने गृह, जेल और आपदा प्रबंधन विभाग को बुधवार को दूसरे दौर की पूछताछ के दौरान कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पत्र लिखा था.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा उपायों के तहत ईडी कार्यालय और मुख्यमंत्री आवास के बाहर अवरोधक लगाए गए हैं और संवेदनशील स्थानों पर 1,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अजय कुमार सिंह ने मंगलवार को कहा था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे झारखंड में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं जिसमें अतिरिक्त 7,000 पुलिसर्किमयों की तैनाती भी शामिल है.

सोरेन ने तलाशी को लेकर ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कराई प्राथमिकी

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यहां एससी/एसटी पुलिस थाने में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वरिष्ठ र्किमयों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है. एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. सूत्रों ने बताया कि सोरेन के दिल्ली आवास पर केंद्रीय जांच एजेंसी के हालिया तलाशी अभियान के संबंध में पुलिस शिकायत दर्ज कराई गई.

रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंदन कुमार सिन्हा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”ईडी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है… हमें मुख्यमंत्री की अर्जी मिली है.” सिन्हा ने प्राथमिकी के संबंध में कोई अन्य विवरण नहीं दिया.
ईडी की एक टीम ने सोमवार को सोरेन के दिल्ली आवास की तलाशी ली और झारखंड में एक कथित भूमि सौदे से जुड़े धनशोधन मामले में उनसे पूछताछ करने के लिए लगभग 13 घंटे तक वहां डेरा डाले रखा.

एजेंसी ने तलाशी के दौरान 36 लाख रुपये नकद, एक एसयूवी और कुछ ‘आपत्तिजनक’ दस्तावेज जब्त करने का दावा किया है.
अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने प्राथमिकी में कहा है, ”मेरे परिवार के सदस्यों और मुझे इन कृत्यों के कारण अत्यधिक मानसिक, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक क्षति हुई है.” उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि वह जब्त की गई कार के मालिक नहीं हैं और बरामद नकदी भी उनकी नहीं है. ईडी के अधिकारी फिलहाल सोरेन से उसी मामले के संबंध में उनके रांची स्थित आवास पर पूछताछ कर रहे हैं.

आबकारी नीति से जुड़े धनशोधन मामले में ईडी ने केजरीवाल को पांचवां समन भेजा

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े धनशोधन मामले में पूछताछ के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक बार फिर समन भेजा है. मुख्यमंत्री को भेजा गया यह पांचवां समन है. आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी.

आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल इससे पहले जांच एजेंसी की ओर से चार बार भेजे गए समन पर पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए थे. एजेंसी ने इससे पहले 18 जनवरी, तीन जनवरी, तथा पिछले साल 21 दिसंबर और दो नवंबर को आप प्रमुख को तलब किया था. समझा जाता है कि नया समन दो फरवरी के लिए है. हालांकि, आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है. जांच एजेंसी के नोटिस को दिल्ली के मुख्यमंत्री ”अवैध” करार देते रहे हैं.

नया नोटिस जारी कर ईडी ने केजरीवाल की इस दलील को फिर से खारिज कर दिया है कि उन्हें जारी किए गए समन “कानून के अनुरूप नहीं हैं” और इसलिए इन्हें वापस लिया जाना चाहिए. मामले में ईडी द्वारा दायर आरोपपत्र में केजरीवाल के नाम का कई बार उल्लेख किया गया है. एजेंसी ने कहा है कि आरोपी अब खत्म हो चुकी दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 की तैयारी के संबंध में उनके संपर्क में थे.

इस मामले में ईडी द्वारा अब तक आप नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के साथ ही पार्टी के संचार प्रभारी विजय नायर तथा कुछ कारोबारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. ईडी ने आरोपपत्र में दावा किया था कि आप ने अपने गोवा चुनाव अभियान में लगभग 45 करोड़ रुपये की “अपराध से अर्जित आय” का इस्तेमाल किया.

सोरेन परिवार में कलह: सीता ने कल्पना को मुख्यमंत्री बनाने का विरोध किया
राजनीतिक सरर्गिमयां बढ़ने और बुधवार को यहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछताछ के बीच, सत्तारूढ़ सोरेन परिवार में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की विधायक और पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन को लेकर अनबन उभर आयी है. सीता ने खुले तौर पर कहा कि वह कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने के किसी भी कदम का विरोध करेंगी.

यह बयान ऐसे वक्त आया है जब कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया जाता है तो उनकी पत्नी कल्पना मुख्यमंत्री पद के लिए पहली पसंद होंगी. सीता सोरेन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर बातचीत में कल्पना सोरेन को झामुमो विधायक दल का नेता बनाने के किसी भी कदम को लेकर कड़ी आपत्ति जताई. संयोग से, मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर गठबंधन के विधायकों की बैठक में कल्पना सोरेन भी मौजूद थीं और मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा तस्वीरें भी साझा की गईं.

जामा की विधायक ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”मैं पूछना चाहती हूं कि केवल कल्पना सोरेन ही क्यों, जो विधायक भी नहीं हैं और उनके पास कोई राजनीतिक अनुभव भी नहीं है.” दिवंगत दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता ने सवाल उठाया कि किस परिस्थिति में उनका (कल्पना का) नाम अगले मुख्यमंत्री के तौर पर लिया जा रहा है, जबकि पार्टी में इतने सारे वरिष्ठ नेता हैं.

विधायकों की बैठक में सीता सोरेन मौजूद नहीं थीं. वह कुछ निजी कारणों से शहर से बाहर थीं और शाम को रांची पहुंचेंगी. करीब 14 साल से विधायक सीता ने कहा, ”मैं उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के किसी भी कदम का कड़ा विरोध करूंगी….” उन्होंने कहा, ”पार्टी में कई वरिष्ठ नेता हैं, जिन्हें बागडोर सौंपी जा सकती है. अगर वे एक परिवार से चुनाव करना चाहते हैं, तो मैं सदन में सबसे वरिष्ठ हूं और लगभग 14 साल तक विधायक रही हूं.” एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि विधायकों की बैठक के दौरान कई विधायक अनुपस्थित थे.

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