माकपा के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी का निधन, पार्थिव शरीर एम्स को दान किया जायेगा

नयी दिल्ली. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी का बृहस्पतिवार को यहां अखिल भारतीय आयुर्वज्ञिान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया. वह लंबे समय से बीमार थे. येचुरी 72 वर्ष के थे. उनकी हालत पिछले कुछ दिन से गंभीर बनी हुई थी और उन्हें कृत्रिम श्वसन प्रणाली पर रखा गया था. माकपा ने मंगलवार को एक बयान में कहा था कि येचुरी को यहां एम्स में कृत्रिम श्वसन प्रणाली पर रखा गया है. इसमें बताया गया था कि उनका श्वसन नली संक्रमण का उपचार किया जा रहा है.

एम्स ने एक बयान में कहा कि येचुरी के परिवार ने शिक्षण और शोध उद्देश्यों के लिए उनका पार्थिव शरीर अस्पताल को दान कर दिया है. माकपा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”अत्यंत दुख के साथ सूचित किया जाता है कि माकपा के महासचिव, हमारे प्रिय कॉमरेड सीताराम येचुरी का आज 12 सितंबर को अपराह्न तीन बजकर तीन मिनट पर एम्स, नई दिल्ली में निधन हो गया. वह श्वसन नली के संक्रमण से पीड़ित थे, जिसके कारण जटिलताएं उत्पन्न हो गईं.”

माकपा ने कहा, ”हम कॉमरेड येचुरी के बेहतरीन इलाज और उनकी देखभाल के लिए चिकित्सकों, र्निसंग र्किमयों और संस्थान के निदेशक को धन्यवाद देते हैं.” माकपा ने एक बयान में कहा कि येचुरी का पार्थिव शरीर शनिवार को पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न तीन बजे तक पार्टी मुख्यालय में जनता के दर्शन और श्रद्धांजलि के लिए रखा जाएगा. इसमें कहा गया है कि इसके बाद, पार्थिव शरीर को एम्स ले जाया जाएगा, जहां उनकी इच्छा के अनुसार इसे चिकित्सा शोध के लिए दान कर दिया जायेगा.

येचुरी को सीने में निमोनिया जैसे संक्रमण के उपचार के लिए 19 अगस्त को एम्स में भर्ती कराया गया था. सूत्रों ने बताया कि उनकी हालत गंभीर थी और उन्हें ‘ऑक्सीजन सपोर्ट’ पर रखा गया था. सूत्रों ने बताया कि उनके फेफड़ों में फंगल संक्रमण हो गया था. येचुरी के परिवार में उनकी पत्नी सीमा चिश्ती हैं, जो समाचार पोर्टल ‘द वायर’ की संपादक हैं. उनकी तीन संतान दो बेटे और एक बेटी हैं. उनके एक बेटे आशीष येचुरी का 2021 में कोविड-19 संक्रमण के कारण निधन हो गया था. उनकी बेटी अखिला येचुरी एडिनबर्ग विश्वविद्यालय और सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय में पढ.ाती हैं. येचुरी की शादी पहले इंद्राणी मजूमदार से हुई थी.

अपने एक अंतिम वीडियो संदेश में येचुरी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को श्रद्धांजलि दी थी. गत 22 अगस्त को अस्पताल से रिकॉर्ड किए गए वीडियो संदेश में उन्होंने कहा था कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि वह श्रद्धांजलि सभा में व्यक्तिगत तौर पर शामिल नहीं हो सके और उन्हें श्रद्धांजलि नहीं दे सके. राजनीति में उनका सफर ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) के सदस्य के रूप में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ से शुरू हुआ था. वह 1984 में माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य बने थे जबकि 1992 में पोलित ब्यूरो के लिए चुने गए.

वह 2005 से 2017 तक 12 वर्ष राज्यसभा सदस्य रहे. वह 19 अप्रैल 2015 को विशाखापत्तनम में पार्टी के 21वें अधिवेशन में माकपा के पांचवें महासचिव बने और उन्होंने प्रकाश करात से उस समय पदभार संभाला था. उन्होंने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उन्हें कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के राजनीतिक मार्गदर्शकों से एक माना जाता था.

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