सिख दंगे: दिल्ली के मंत्री ने अपराध स्थल पर ‘कमलनाथ की मौजूदगी’ संबंधी रिपोर्ट को लेकर उच्च न्यायालय का रुख किया

नयी दिल्ली. दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके एक पुलिस अधिकारी की उस रिपोर्ट को पेश करने का अनुरोध किया, जिसमें कथित तौर पर एक नवंबर, 1984 को गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब में हुए दंगे के दौरान मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की मौजूदगी का उल्लेख किया गया है. इस दंगे में दो लोगों की जान चली गई थी.

न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा के समक्ष दायर याचिका में सरकार को नयी दिल्ली के पूर्व एसीपी गौतम कौल द्वारा तत्कालीन पुलिस आयुक्त के समक्ष एक नवंबर, 1984 को अपराध स्थल पर कमलनाथ की मौजूदगी के बारे में प्रस्तुत रिपोर्ट को रिकॉर्ड में रखने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. उच्च न्यायालय ने 27 जनवरी, 2022 को सरकार को मामले में वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया.

याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के 27 जनवरी, 2022 के निर्देश के आधार पर, केंद्र ने एक हलफनामा दायर किया, जिसमें कथित तौर पर घटना को लेकर कमलनाथ की भूमिका के बारे में कुछ भी नहीं था. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का ने दावा किया कि पुलिस रिकॉर्ड में अपराध स्थल पर कमलनाथ की मौजूदगी का अच्छी तरह से उल्लेख है. इसके अलावा कई समाचार पत्रों ने घटना के स्थान और समय पर उनकी उपस्थिति का उल्लेख किया था, लेकिन सरकार ने अपनी वस्तु स्थिति रिपोर्ट में इन पहलुओं पर विचार नहीं किया.

अदालत ने याचिका पर सुनवाई 18 नवंबर के लिए स्थगित कर दी. याचिका में कहा गया है कि कमलनाथ के कथित नेतृत्व में भीड़ ने दो सिखों, इंद्रजीत सिंह और मनमोहन सिंह, को गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब के परिसर में जिंदा जला दिया था. कमलनाथ का नाम लिए बिना, पांच आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. हालांकि, निचली अदालत ने आरोपियों को इस मामले में बरी कर दिया था. अदालत ने कहा था कि आरोपी घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे.

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