जम्मू-कश्मीर के डांगरी गांव में आतंकवादी हमला : तीन परिवारों ने कमाने वाला खोया

राजौरी. जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के डांगरी गांव में हाल में हुए आतंकवादी हमले ने तीन परिवारों के लिए तबाही का मंजर पीछे छोड़ा है जिनके कमाऊ सदस्यों की इस हमले में जान चली गई है. आतंकवादियों ने नए साल की पहली तारीख एक जनवरी को डांगरी गांव में घुसकर अंधाधुंध गोलीबारी की और इम्प्रोवाइस्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) पीछे लगाकर, अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए. इस हमले में एक विशेष समुदाय के सात लोगों की मौत हो गई और 14 अन्य घायल हो गए.

पांच लोगों की मौत आतंकवादियों की गोलीबारी में हुई जबकि दो बच्चों (क्रमश: चार साल और 16 साल उम्र) की जान अगले दिन आतंकवादियों द्वारा छोड़े गए आईईडी में हुए धमाके की चपेट में आने से हुई. इन हमलों में मारे गए लोगों में दो युवा सगे भाई, पिता और पुत्र एवं पूर्व सैनिक हैं जो अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे.

सरोज बाला (58) सदमे में है क्योंकि दो बेटों दीपक शर्मा (27) और प्रिंस शर्मा (21) के हमले में मारे जाने के बाद परिवार में वह अकेले बची हैं. उनके पति रजिंदर शर्मा की चार साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी. दिहाड़ी कर परिवार का पेट पाल रहे प्रीतम लाल (55) और उनके 31 वर्षीय बेटे शिशु पाल की भी आतंकवादियों ने उनके घर में ही हत्या कर दी. शिशुपाल की पत्नी नीता देवी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘मैं परिवार के लिए रात का खाना बना रही थी, तभी आतंकवादियों ने गांव में गोलीबारी शुरू कर दी.

उन्होंने पहचान पत्र मांगा और मुझे और मेरे नाबालिग बच्चों (बेटा और बेटी) को समान रखने वाले कमरे में बंद कर दिया और इसके बाद मेरे ससुर और पति को गोली मार दी.’’ उन्होंने बताया कि मेरे ससुर गांव में दिहाड़ी मजदूरी करते थे, पति निर्माण एजेंसी में काम करता था जबकि सास की कुछ साल पहले मौत हो गई थी. नीता देवी ने रोते हुए कहा, ‘‘हमारा भरण-पोषण करने वाला कोई नहीं बचा.’’ भारतीय सेना से करीब साढ़े तीन साल पहले अवकाश प्राप्त करने वाले सतीश कुमार (45) घर लौट रहे थे तभी उन्हें गोलियों की आवाज सुनाई दी थी. उनके रिश्तेदार चमन शर्मा ने बताया, ‘‘कुमार ने अपने परिवार की आतंकवादियों से रक्षा करते हुए जान दे दी.’’

उन्होंने बताया, ‘‘सेना से अवकाश प्राप्त करने के बाद उनका ध्यान केवल परिवार और बच्चों की शिक्षा पर था. वह नेक दिल इंसान थे और सभी की खुशियों और गम में हमेशा मौजूद रहते थे.’’ उन्होंने बताया कि कुमार को आतंकवादियों ने तब गोली मारी जब वह उन्हें घर में घुसने से रोक रहे थे. इस दौरान गोली की आवाज सुन बाहर आई उनकी पत्नी सरोज (37), बेटी आरुषि (14) और बेटे शुभ शर्मा (17) को भी गोली लगी.

चमन शर्मा ने बताया, ‘‘सरोज के पीठ के निचले हिस्से में गोली लगी है जबकि आरुषि के पैर में और शुभ शर्मा को घुटने में गोली लगी है. सरोज और आरुषि का राजौरी के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में इलाज चल रहा है जबकि शुभ को पंजाब के अस्पताल में भर्ती किया गया है.’’ गांव के सरपंच धीरज शर्मा ने सरकार से इन तीन परिवारों की मदद के लिए विशेष ध्यान देने की मांग की है.

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