
नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को वकीलों से एक पत्र लिखने को कहा जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा अधिवक्ताओं को वरिष्ठ नामित करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को शीघ्र सूचीबद्ध करने और उस पर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया गया हो।
हाल में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने 70 वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया था। मुख्य न्यायाधीश मनमोहन, न्यायमूर्ति विभु बाखरू और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा तथा अन्य की एक स्थायी समिति द्वारा उम्मीदवारों का मूल्यांकन करने के बाद उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया।
यह प्रक्रिया विवाद में तब आ गई जब वरिष्ठ अधिवक्ता एवं उच्च न्यायालय की समिति का हिस्सा रहे सुधीर नंदराजोग ने यह दावा करते हुए इस्तीफा दे दिया कि अंतिम सूची उनकी सहमति के बिना तैयार की गई।
याचिका को शीघ्र सुनवाई के लिए सोमवार को शीर्ष अदालत की पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस पीठ में प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार शामिल हैं।
सीजेआई ने वकील से मौखिक उल्लेख के बजाय मामले को सूचीबद्ध करने के संबंध में एक पत्र लिखने को कहा।
सीजेआई ने हाल में वकीलों द्वारा नए मामलों को शीघ्र सूचीबद्ध करने और सुनवाई का अनुरोध करने लिए मौखिक उल्लेख के अभ्यास को रोक दिया था।
जिन वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया है, उनमें संतोष त्रिपाठी, अनुराग अहलूवालिया, राजदीप बेहुरा, अनिल सोनी, अनुपम श्रीवास्तव, अभिजात, सुमित वर्मा, अमित चड्ढा, सुमित पुष्करण, साई दीपक जे और अरुंधति काटजू शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, समिति ने 300 से अधिक वकीलों का मूल्यांकन किया। तीन वकीलों के आवेदन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।



