भारत की संस्कृति का आधार वेदों में निहित: रक्षा मंत्री सिंह

नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत की संस्कृति का आधार वेदों में निहित है और उनमें ज्ञान का खजाना है जो आधुनिक युग की समस्याओं का समाधान खोजने में मददगार हो सकता है. सिंह ने स्वामी दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वेदों में कई गणितीय अवधारणाएं हैं, जो दर्शाती हैं कि वैदिक युग में गणित मौजूद था.

उन्होंने कहा, ”यह स्पष्ट है कि जिसे हम भारतीय संस्कृति के रूप में जानते हैं, वह मूलत: वेदों द्वारा निर्धारित सामाजिक मानदंडों और सांस्कृतिक ढांचे तथा वेदों में र्विणत विज्ञान और गणित में निहित है.” सिंह ने कहा, ”उदाहरण के लिए, वेदों में कई गणितीय अवधारणाएं हैं, जो दर्शाती हैं कि वैदिक युग में गणित एक विज्ञान के रूप में अस्तित्व में था.”

उन्होंने कहा, ”शुल्व सूत्र एक उदाहरण के रूप में कार्य करते हैं, जो पाइथागोरस प्रमेय के बारे में जानने से बहुत पहले ही दुनिया के सामने ज्यामितीय सिद्धांत प्रस्तुत करते हैं.” रक्षा मंत्री ने आधुनिक भारत में दयानंद सरस्वती की शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए प्राचीन ज्ञान को समकालीन आवश्यकताओं, विशेषकर शिक्षा, विज्ञान और सामाजिक सद्भाव के क्षेत्रों के साथ मिश्रित करने के दार्शनिक के प्रयासों को याद किया. आर्य समाज के संस्थापक की विरासत को रेखांकित करते हुए सिंह ने उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री के रूप में पाठ्यक्रम में ‘वैदिक गणित’ को शामिल करने के अपने प्रयासों को भी याद किया.

उन्होंने कहा, ”जब मैंने वैदिक गणित लागू किया था, तब देश भर के 36 विद्वानों ने इस विषय पर किताबें लिखी थीं. लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में वैदिक गणित पढ़ाया जाता है. हालांकि, यह विडंबना है कि स्वतंत्र भारत में जो वैदिक गणित पढ़ाया जाना चाहिए, वह नहीं पढ़ाया जा रहा है.” सिंह ने कहा, ”अनुसंधान से पता चलता है कि वैदिक गणित न केवल गणना के लिए उपयोगी है, बल्कि बच्चों के बौद्धिक विकास में भी महत्वपूर्ण रूप से सहायक है. हमारे वेद ऐसी ज्ञान प्रणालियों के भंडार हैं.” रक्षा मंत्री ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में वेदों के योगदान को भी नकारा नहीं जा सकता.

उन्होंने कहा, ”चिकित्सा क्षेत्र से परिचित लोग चरक संहिता के अत्यधिक महत्व से अच्छी तरह परिचित हैं. चरक संहिता के एक श्लोक के अनुसार, ”डॉक्टर अथर्ववेद में अपनी आस्था रखते हैं”. सिंह ने कहा, ”भारतीय संस्कृति पर वेदों के गहन प्रभाव को देखते हुए, मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि भारत की संस्कृति की नींव वेदों में निहित है.”

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