भारत के युवाओं की लगन ‘विकसित भारत’ की सबसे बड़ी शक्ति है: मोदी

सर्दियों की छुट्टियों की योजना में हिमालय की घाटियों को भी शामिल करें: प्रधानमंत्री मोदी

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अंतरिक्ष निर्माण से लेकर कृषि तक विभिन्न क्षेत्रों में हाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के युवाओं की लगन ‘विकसित भारत’ की सबसे बड़ी शक्ति है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मासिक ‘मन की बात’ रेडियो संबोधन में नवंबर माह की प्रेरणादायक घटनाओं में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने, सेंट्रल हॉल में संविधान दिवस समारोह और अयोध्या में राम मंदिर पर धर्मध्वजा के आरोहण को सूचीबद्ध किया.

उन्होंने इसके साथ ही हैदराबाद में दुनिया की सबसे बड़ी लीप इंजन एमआरओ इकाई का उद्घाटन और आईएनएस ‘माहे’ को भारतीय नौसेना में शामिल किये जाने का भी उल्लेख किया. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम की 128वीं कड़ी में कहा, “पिछले सप्ताह ही, स्काईरूट के इन्फिनिटी कैंपस ने भारत के अंतरिक्ष परिवेशी तंत्र को एक नयी उड़ान दी. ये भारत की नयी सोच, नवाचार और युवा शक्ति का प्रतिबिंब है.” प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित एक अनोखी ड्रोन प्रतियोगिता के वीडियो का उल्लेख भी किया.

उन्होंने कहा, ”इस वीडियो में हमारे देश के युवा और खासकर हमारे जेन-जेड मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की कोशिश कर रहे थे.” उन्होंने कहा कि मंगल ग्रह पर जीपीएस संभव नहीं, इसके चलते ड्रोन को कोई बाहरी संकेत या निर्देश नहीं मिल सकता, इसलिए युवा ड्रोन को बिना जीपीएस अपने कैमरे और इनबिल्ट सॉफ्टवेयर के सहारे उड़ाने की कोशिश कर रहे थे. मोदी ने कहा कि युवा टीम ने कई बार के प्रयास के बाद सफलता पायी क्योंकि उनका ड्रोन कई बार गिरा, दुर्घटनाग्रस्त हुआ.

उन्होंने कहा कि इसरो में वैज्ञानिक तब कुछ पल के लिए निरोश हो गए थे जब चंद्रयान-2 संपर्क से बाहर हो गया था, लेकिन उसी दिन उन्होंने चंद्रयान-3 की सफलता की कहानी लिखनी शुरू कर दी. उन्होंने कहा कि यही कारण है कि जब चंद्रयान-3 ने सफल लैंडिंग की, तो वो सिर्फ एक मिशन की सफलता नहीं थी, वो तो असफलता से निकलकर बनाए गए विश्वास की सफलता थी.

उन्होंने कहा, ”इस वीडियो में जो युवा दिख रहे हैं, उनकी आंखों में मुझे वही चमक दिखाई दी.” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”हर बार जब मैं हमारे युवाओं की लगन और वैज्ञानिकों के समर्पण को देखता हूं, तो मन उत्साह से भर जाता है. युवाओं की यही लगन, विकसित भारत की बहुत बड़ी शक्ति है.” प्रधानमंत्री ने देश भर में मधुमक्खी पालन की पहल, खेल के क्षेत्र में उपलब्धियों, भारत को 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी मिलने और जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए अपनी दक्षिण अफ्रीका और भूटान की यात्राओं के बारे में विस्तार से बात की.

सर्दियों की छुट्टियों की योजना में हिमालय की घाटियों को भी शामिल करें: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत के शीतकालीन पर्यटन का प्रमुख गंतव्य बनने की अपार संभावनाएं हैं और उन्होंने इस संबंध में उत्तराखंड सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की. मोदी ने अपने मासिक ‘मन की बात’ रेडियो संबोधन में कहा कि तीन साल पहले तक आदि कैलाश पर 2,000 से भी कम पर्यटक जाते थे, जबकि अब यह संख्या ब­ढ़कर 30,000 से अधिक हो गई है.

उन्होंने कहा कि कई देशों ने शीतकालीन खेलों और स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग, पर्वतारोहण व बर्फ पर च­ढ़ाई जैसी गतिविधियों के ईद-गिर्द सफल पर्यटन मॉडल तैयार किए हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपने विविध भूदृश्यों और पर्वतीय क्षेत्रों के साथ ऐसे अवसर विकसित करने की मजबूत स्थिति में है. उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि वे छुट्टियों में घूमने की योजना बनाते समय हिमालयी क्षेत्रों पर विचार करें, क्योंकि ये क्षेत्र र्सिदयों के मौसम में यादगार अनुभव प्रदान करते हैं.

मोदी ने कहा, ”र्सिदयों के दिनों में, हिमालय की घाटियां एक ऐसे अनुभव का हिस्सा बन जाती हैं, जो जीवन भर याद रहता है. अगर आप इस बार सर्दी में बाहर घूमने की योजना बना रहे हैं, तो हिमालय की घाटियों पर विचार करना न भूलें.” उन्होंने कहा, ”इन दिनों उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन लोगों को खूब भा रहा है. र्सिदयों के मौसम में औली, मुनस्यारी, चोपता और दियारा जैसे पर्यटन स्थल लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं.” प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ हफ्ते पहले उत्तराखंड की पहली ‘हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन’ पिथौराग­ढ़ जिले में 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर के 18 राज्यों के 750 से अधिक धावकों ने हिस्सा लिया था.

उन्होंने कहा, ”60 किलोमीटर लंबी आदि कैलाश परिक्रमा कड़ाके की ठंड में सुबह पांच बजे शुरू हुई. कड़ाके की ठंड के बावजूद लोगों का उत्साह साफ दिखाई दे रहा था. तीन साल पहले तक जहां 2,000 से भी कम पर्यटक आदि कैलाश दर्शन के लिए जाते थे, वहीं अब यह संख्या ब­ढ़कर 30,000 से अधिक हो गई है.” प्रधानमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड आने वाले हफ्तों में शीतकालीन खेलों की मेजबानी भी करेगा, जहां स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग जैसे बर्फ आधारित खेलों की तैयारियां पहले से ही चल रही हैं.

उन्होंने रेखांकित किया कि संपर्क, बुनियादी ढांचे में सुधार और नयी ‘होमस्टे’ नीति की शुरुआत से राज्य में शीतकालीन पर्यटन को ब­ ढ़ावा मिला है. मोदी ने पहाड़ी राज्यों में, खासकर गंगा के तट पर, ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ के ब­ढ़ते चलन का भी जिक्र किया, जो शीतकालीन पर्यटन के व्यापक आकर्षण का एक हिस्सा है.

काशी-तमिल संगमम के दौरान तमिल सीखें: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को नागरिकों से वाराणसी में आयोजित होने वाले काशी-तमिल संगमम में भाग लेने और तमिल भाषा सीखने के अवसर का लाभ उठाने का आग्रह किया. मोदी ने अपने मासिक ‘मन की बात’ संबोधन में कहा कि काशी-तमिल संगमम का चौथा संस्करण दो दिसंबर को वाराणसी के नमो घाट पर शुरू होगा.

मोदी ने कहा, ”इस बार के काशी-तमिल संगमम का विषय बहुत ही रोचक है :तमिल सीखें – तमिल करकलम.” उन्होंने इस आयोजन को विश्व की सबसे प्राचीन भाषा और विश्व के सबसे प्राचीन शहरों में से एक का संगम बताया. मोदी ने कहा कि काशी-तमिल संगमम उन सभी लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है जिन्हें तमिल भाषा से लगाव है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”काशी के लोगों से जब भी बात होती है तो वो हमेशा बताते हैं कि काशी-तमिल संगमम का हिस्सा बनना उन्हें बहुत अच्छा लगता है. यहां उन्हें कुछ नया सीखने और नए-नए लोगों से मिलने का अवसर मिलता है.” उन्होंने कहा कि इस बार भी काशीवासी पूरे जोश और उत्साह के साथ तमिलनाडु से आने वाले अपने भाई-बहनों का स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक हैं.

उन्होंने कहा, ”मेरा आप सभी से आग्रह है कि आप काशी-तमिल संगमम का हिस्सा जरूर बनें. इसके साथ ही ऐसे और भी मंचों के बारे में सोचें, जिनसे ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना मजबूत हो.” प्रधानमंत्री ने कहा कि पुडुचेरी और मालाबार तट के लोग नौसैनिक पोत आईएनएस माहे के नाम से ही खुश हो गए. उन्होंने कहा कि दरअसल, इसका ‘माहे’ नाम उस स्थान माहे के नाम पर रखा गया है, जिसकी एक समृद्ध ऐतिहासिक विरासत रही है.

उन्होंने कहा, ”केरल और तमिलनाडु के कई लोगों ने इस बात पर गौर किया कि इस युद्धपोत का प्रतीक-चिह्न उरुमी और कलारिपयट्टू की पारंपरिक लचीली तलवार की तरह दिखाई पड़ता है.” उन्होंने कहा, ”ये हम सबके लिए गर्व की बात है कि हमारी नौसेना बहुत ही तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही है.” प्रधानमंत्री ने जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए दक्षिण अफ्रीका की अपनी हालिया यात्रा को भी याद किया और कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना विश्व नेताओं को उनके द्वारा दिए गए उपहारों में परिलक्षित हुई.
उन्होंने कहा, ”जी-20 के दौरान, मैंने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति को नटराज की कांस्य प्रतिमा भेंट की. ये तमिलनाडु के तंजावुर की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी चोल कालीन शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण है.”

उन्होंने कहा, ”कनाडा के प्रधानमंत्री को चांदी के अश्व की प्रतिकृति दी गई. यह राजस्थान के उदयपुर की बेहतरीन शिल्पकला को दर्शाती है. जापान के प्रधानमंत्री को चांदी की बुद्ध की प्रतिकृति भेंट की गई. इसमें तेलंगाना और करीमनगर की प्रसिद्ध चांदी की कलाकृतियों की बारीकी का पता चलता है. इटली की प्रधानमंत्री को फूलों की आकृतियों वाला चांदी का आईना उपहार में दिया. ये भी करीमनगर की ही पारंपरिक धातु शिल्पकला को प्रर्दिशत करता है.” प्रधानमंत्री ने कहा, ”ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को मैंने पीतल उरली भेंट की, ये केरल के मन्नार का एक उत्कृष्ट शिल्प है. मेरा उद्देश्य था कि दुनिया भारतीय शिल्प, कला और परंपरा के बारे में जानें. हमारे कारीगरों की प्रतिभा को वैश्विक मंच मिले.”

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