आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं हो, फलस्तीनियों की चिंताओं को स्थायी समाधान होना चाहिए : भारत

कनाडा के साथ चल रहे मुद्दों पर भारत का परिप्रेक्ष्य रखा आस्ट्रेलिया के सामने: जयशंकर

नयी दिल्ली. इजराइल-हमास संघर्ष पर विचार-विमर्श के लिए मंगलवार को आयोजित ब्रिक्स बैठक में, भारत ने कहा कि मौजूदा संकट एक आतंकवादी हमले के कारण शुरू हुआ और आतंकवाद के साथ किसी को भी कोई समझौता नहीं करना चाहिए. साथ ही भारत ने फलस्तीनियों की चिंताओं को दूर करने का आह्वान करते हुए ‘दो-राज्य’ के समाधान पर बल दिया. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से इस डिजिटल बैठक को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि गाजा में संकट को देखते हुए भारत ने 70 टन मानवीय सहायता भेजी है और वह सहायता जारी रखेगा.

जयशंकर ने कहा, “गाजा में जारी इजराइल-हमास संघर्ष के कारण नागरिकों को भारी मानवीय पीड़ा हो रही है. हम तनाव कम करने की खातिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सभी प्रयासों का स्वागत करते हैं. फिलहाल यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि मानवीय सहायता और राहत गाजा की आबादी तक प्रभावी और सुरक्षित रूप से पहुंचे.” दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा द्वारा आयोजित इस बैठक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ब्राजील के राष्­ट्रपति लूइज इनासियो लूला डि सिल्­वा और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी सहित अन्य लोगों ने भाग लिया.

जयशंकर ने कहा, ”यह भी जरूरी है कि सभी बंधकों को रिहा कर दिया जाए. हमारा मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना सार्वभौमिक दायित्व है. हम सभी जानते हैं कि मौजूदा संकट सात अक्टूबर के आतंकवादी हमले से शुरू हुआ था. जहां तक आतंकवाद का सवाल है, हममें से किसी को भी इससे समझौता नहीं करना चाहिए. बंधक बनाना भी अस्वीकार्य है और इसे माफ नहीं किया जा सकता है.” जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस संदर्भ में क्षेत्र और दुनिया भर के कई नेताओं से बातचीत की है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने शांति के लिए अनुकूल स्थितियां बनाने और प्रत्यक्ष एवं सार्थक शांति वार्ता को फिर से शुरू करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है.

विदेश मंत्री ने कहा, “हमारा मानना है कि फलस्तीनी लोगों की चिंताओं को गंभीरता से और सतत तरीके से दूर किया जाना चाहिए. केवल दो-राज्य के समाधान के साथ इसका हल हो सकता है, जो शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर आधारित है.” ब्रिक्स देशों के सदस्यों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं.

कनाडा के साथ चल रहे मुद्दों पर भारत का परिप्रेक्ष्य रखा आस्ट्रेलिया के सामने: जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सिख चरमंपथी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और भारतीय एजेंटों के बीच संभावित संबंध के कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडू के आरोपों के बाद कनाडा के साथ भारत के संबंधों में आये तनाव के सिलसिले में मंगलवार को आस्ट्रेलिया के सामने भारतीय परिप्रेक्ष्य को रखा.

जयशंकर ने भारत-ऑस्ट्रेलिया विदेश मंत्रियों के बीच वार्ता के दौरान आस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेन्नी वोंग को भारत और कनाडा के बीच के मुद्दों के बारे में बताया. जयशंकर ने वोंग के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, ” हमारे नजरिये से वास्तव में अहम मुद्दा वह छूट है जो कनाडा में चरमपंथ और कट्टरपंथ को दी जा रही है.” उन्होंने कहा कि आस्ट्रेलिया का भारत एवं कनाडा के साथ अच्छा एवं मजबूत संबंध है.

उन्होंने कहा, ” इसलिए जरूरी है कि आस्ट्रेलिया को इस मुद्दे पर हमारा परिप्रेक्ष्य पता चले.” ब्रिटिश कोलंबिया में 18 जून को हुई खालिस्तानी अलगाववादी निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की ‘संभावित’ संलिप्तता का ट्रूडू द्वारा आरोप लगाये जाने के बाद भारत एवं कनाडा के बीच संबंधों में बड़ा तनाव आ गया है. भारत ने 2020 में निज्जर को आतंकवादी घोषित किया था.

भारत ने ट्रूडू के आरोप को ‘बकवास’ एवं ‘राजनीति से प्रेरित’ करार देकर खारिज कर दिया . कनाडाई संसद में ट्रूडू द्वारा आरोप लगाये जाने के बाद से भारत एवं कनाडा ने एक दूसरे के एक-एक वरिष्ठ राजनयिक को निष्कासित कर दिया. भारत ने यहां कनाडाई मिशनों में राजनयिक उपस्थिति में ‘समता’ पर जोर डाला , फलस्वरूप 41 राजनयिक कनाडा वापस बुला लिये गये.

भारत ने कहा है कि कनाडा ने ट्रूडू के दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया है. जयशंकर ने पिछले सप्ताह ब्रिटेन में कहा था, ” यदि आपके पास ऐसे आरोप लगाने की वजह है तो कृपया, हमारे साथ सबूत साझा कीजिए. हम जांच से इनकार नहीं कर रहे हैं, हम कुछ भी (सबूत) मिलने का इंतजार कर रहे हैं जो उन्हें संभवत: देना है. उन्होंने अब तक ऐसा नहीं किया है.”

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