जो आस्था रखते हैं वो कभी भी अयोध्या जा सकते हैं: खरगे

'न्यायालय के फैसले के बाद प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए: कर्ण सिंह

नयी दिल्ली/तिरुवनंतपुरम. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को कहा कि जो भी आस्था रखते हैं वो किसी भी दिन अयोध्या जा सकते हैं.
उन्होंने इस बात पर भर जोर दिया कि कांग्रेस, ‘भाजपा की साजिश’ में आने वाली नहीं है और बेरोजगारी के मुद्दे को उठाती रहेगी. खरगे ने संवाददाताओं से कहा कि उन्हें प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए जो निमंत्रण मिला है वो व्यक्तिगत था और वह इस बारे में बात करेंगे.
उनका कहना था, ”जो आस्था रखने वाले लोग हैं, वो आज, कल या परसो, जब चाहें (अयोध्या) जा सकते हैं. मैंने यह बात पहले ही स्पष्ट की थी…यह भाजपा की एक साजिश है और वह इस विषय को लेकर बार-बार वार रही है.” कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी ने किसी धर्म या धर्मगुरु को कभी दुख नहीं पहुंचाया है.

खरगे ने कहा, ”हमारे मुद्दे केवल ये हैं कि मोदी सरकार ने बेरोजग़ार युवाओं के लिए क्या काम किया, महंगाई के बारे में क्या कदम उठाए ? सीमा पर चीनी घुसपैठ पर क्या बोले?” उन्होंने दावा किया, ”हमें दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्ग और समाज के ग.रीब तबके की चिंता है, जो भाजपा को नहीं है.” भाजपा ने अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए कांग्रेस के तीन शीर्ष नेताओं को भेजे गए निमंत्रण को अस्वीकार करने के विपक्षी पार्टी के फैसले की बृहस्पतिवार को आलोचना की थी और दावा किया था कि इससे भारत की संस्कृति और हिंदू धर्म के प्रति पार्टी का स्वाभाविक विरोध उजागर हो गया है.

खरगे, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने के निमंत्रण को यह कहते हुए ‘ससम्मान अस्वीकार’ कर दिया कि यह भाजपा और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) का आयोजन है तथा ‘अर्द्धनिर्मित मंदिर’ का उद्घाटन चुनावी लाभ के लिए किया जा रहा है.

उच्चतम न्यायालय ने 2019 में एक ऐतिहासिक फैसले में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था और हिंदुओं द्वारा पवित्र माने जाने वाले शहर में एक मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ का वैकल्पिक भूखंड मुहैया कराने का आदेश दिया था.
इसके परिणामस्वरूप, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण का काम शुरू हुआ. आगामी 22 जनवरी को ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मौजूद रहेंगे.

‘न्यायालय के फैसले के बाद प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए: कर्ण सिंह
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह ने शुक्रवार को कहा कि अयोध्या में भूमि विवाद के मामले में उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के बाद अब 22 जनवरी को होने वाले राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए. सिंह ने एक बयान में यह भी कहा कि उन्हें ”ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा समारोह” के लिए निमंत्रण मिला है, लेकिन वह चिकित्सा कारणों से इसमें शामिल नहीं हो पाएंगे. उन्होंने कहा कि इस समारोह का जश्न दुनिया भर में लगभग एक अरब हिंदुओं द्वारा मनाया जाएगा.

सिंह ने कहा, ”राम मंदिर निर्माण के लिए 11 लाख रुपये का मामूली व्यक्तिगत दान दिया है और एक रघुवंशी के रूप में इस समारोह में शामिल होना बहुत खुशी की बात होगी. अफसोस की बात है कि 93 साल की उम्र के करीब पहुंचने के साथ मेरे लिए चिकित्सा आधार पर ऐसा करना संभव नहीं होगा.”

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”हमारे परिवार की संस्था ‘धर्मार्थ ट्रस्ट’ (जम्मू-कश्मीर) द्वारा इस अवसर पर जम्मू में हमारे प्रसिद्ध श्री रघुनाथ मंदिर में एक विशेष उत्सव का आयोजन किया जा है और हम लोधी रोड पर अपने श्री राम मंदिर में भी छोटे स्तर पर ऐसा आयोजन कर रहे हैं.” उनका कहना था कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अगर आमंत्रित किया जाता है तो समारोह में शामिल होने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने के निमंत्रण को यह कहते हुए ‘ससम्मान अस्वीकार’ कर दिया कि यह भाजपा और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) का आयोजन है तथा ‘अर्द्धनिर्मित मंदिर’ का उद्घाटन चुनावी लाभ के लिए किया जा रहा है.

उच्चतम न्यायालय ने 2019 में एक ऐतिहासिक फैसले में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था और हिंदुओं द्वारा पवित्र माने जाने वाले शहर में एक मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ का वैकल्पिक भूखंड मुहैया कराने का आदेश दिया था.
इसके परिणामस्वरूप, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण का काम शुरू हुआ. आगामी 22 जनवरी को ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मौजूद रहेंगे.

भाजपा के आरोपों पर थरूर ने हिंदू उदारवाद के संबंध में सोनिया गांधी के भाषण की याद दिलाई
कांग्रेस के हिंदू विरोधी होने के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आरोपों के जवाब में वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने रामकृष्ण मिशन में सोनिया गांधी के दो दशक पहले दिए गए एक भाषण का जिक्र किया जिसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान के लिए हिंदू उदारवादी विचारों ने कैसे योगदान दिया.

तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर की टिप्पणी से एक दिन पहले भाजपा ने अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए कांग्रेस के तीन शीर्ष नेताओं द्वारा निमंत्रण को अस्वीकार किए जाने पर पार्टी के फैसले की आलोचना की थी. भाजपा ने दावा किया कि इससे भारत की संस्कृति और हिंदू धर्म के प्रति कांग्रेस के भीतर अंर्तिनहित विरोध का पता चलता है.

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में थरूर ने हिंदू धर्म को लेकर स्वामी विवेकानंद के विचारों पर प्रकाश डालते हुए सोनिया गांधी के संबोधन को संलग्न किया. इस पोस्ट में कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य थरूर ने अपना विश्वास व्यक्त किया कि विवेकानंद की शिक्षाएं वर्तमान समय के लिए अत्यधिक प्रासंगिक और प्रभावशाली संदेश देती हैं.

सोनिया गांधी ने बारह जनवरी, 1999 को अपने संबोधन में ‘भारत की बहुलवादी और समग्र विरासत” की सराहना करने वाले स्वामी विवेकानंद के विचारों को समाज के कुछ वर्गों द्वारा हथियाने पर अफसोस जताया था. उस समय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार सत्ता में थी.

थरूर ने अपने पोस्ट में कहा कि कांग्रेस का हिंदू उदारवाद के साथ जुड़ाव पिछले एक दशक की घटनाओं की हालिया प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि लंबे समय से बरकरार और गहरा विचार है. उन्होंने लिखा, ”आज से 25 साल पहले, तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जी ने 12 जनवरी 1999 को रामकृष्ण मिशन, नयी दिल्ली में राष्ट्रीय युवा दिवस समारोह में विचारपूर्ण भाषण दिया था.”

सोनिया गांधी ने इस बात पर अफसोस जताया था कि भारत की विविध विरासत और सहिष्णुता तथा सद्भाव पर जोर देने वाले हिंदू धर्म के संदेश के लिए स्वामी विवेकानंद की सराहना को नफरत और दुश्मनी को बढ़ावा देने वाले समूहों द्वारा विकृत और हथियाया जा रहा है.

थरूर ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ”आज स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं के बारे में इससे अधिक प्रभावी संदेश की कल्पना करना कठिन है. और यह याद रखना ठीक होगा कि कांग्रेस की हिंदू उदारवाद के साथ पहचान पिछले दस वर्षों की घटनाओं की प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि एक लंबे समय से कायम सोच है.” सोनिया गांधी ने यह भी कहा था कि भारत मुख्य रूप से धर्मनिरपेक्ष है क्योंकि हिंदू धर्म, दर्शन और जीवन शैली दोनों तरीके से ”हमारे पूर्वजों के कथन ‘एकम सत, विप्रा बहुधा वदंति (सत्य एक है, जिसे बुद्धिमान विभिन्न नामों से बुलाते हैं)’ पर आधारित है.”

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने थरूर की सराहना करते हुए इसे ”शानदार शोध” बताया और कहा कि यह समयानुकूल भी है. ‘एक्स’ पर थरूर के पोस्ट को साझा करते हुए रमेश ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ही 1985 में स्वामी विवेकानंद के सम्मान में 12 जनवरी के दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में घोषित किया था.

भगवान के दर्शन के लिए बिचौलिये नहीं चाहिए, 22 जनवरी का आयोजन धार्मिक नहीं: कांग्रेस

कांग्रेस ने शुक्रवार को दावा किया कि 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाला प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम धार्मिक नहीं बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक है क्योंकि इसे विधि-विधान से और चारों पीठों के शंकराचार्यों की देखरेख में नहीं किया जा रहा है. पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भारतीय जनता पार्टी पर पलटवार करते हुए यह भी कहा कि भगवान राम के दर्शन के लिए किसी बिचौलिये की जरूरत नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए 22 जनवरी की तारीख का चयन लोकसभा चुनाव को देखते हुए किया गया है.

कांग्रेस नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर हर कोई अपनी आस्था का अनुसरण करने के लिए स्वतंत्र है और पार्टी के शीर्ष नेताओं ने सिर्फ 22 जनवरी के कार्यक्रम के निमंत्रण को अस्वीकार किया है. भाजपा ने अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए कांग्रेस के तीन शीर्ष नेताओं को भेजे गए निमंत्रण को अस्वीकार करने के विपक्षी पार्टी के फैसले की बृहस्पतिवार को आलोचना की थी और दावा किया था कि इससे भारत की संस्कृति और हिंदू धर्म के प्रति पार्टी का स्वाभाविक विरोध उजागर हो गया है.

कांग्रेस के तीन प्रमुख नेताओं मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और अधीर रंजन चौधरी ने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के निमंत्रण को यह कहते हुए ‘ससम्मान अस्वीकार’ कर दिया था कि यह भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यक्रम है तथा इसका उद्देश्य चुनावी लाभ लेना है.

खेड़ा ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, ” यह कोई राजनीतिक दल तय नहीं कर सकता कि मैं अपने भगवान से मिलने जाऊं या ना जाऊं. मंदिर में कम से कम किसी इंसान द्वारा तो नहीं बुलाया जाता है और न ही किसी को रोका जाता है. लेकिन यहां तो एक उलटी गंगा बहाई जा रही है. ”

उन्होंने कहा, “किसी भी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा विधि विधान और धर्मशास्त्र के हिसाब से होती है. लेकिन क्या यह कार्यक्रम धार्मिक है? अगर यह कार्यक्रम धार्मिक है तो क्या यह धार्मिक विधि-विधान या धर्मशास्त्र के अनुसार किया जा रहा है और क्या यह चारों शंकराचार्यों की सलाह और उनकी देखरेख में किया जा रहा है?” उन्होंने कहा कि चारों शंकराचार्य स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि एक अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा नहीं की जा सकती. कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से राजनीतिक है.

खेड़ा ने कहा, “मैं यह बर्दाश्त क्यों करूंगा कि एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ता मेरे और मेरे भगवान के बीच बिचौलिए बनकर बैठ जाएं. मुझे भगवान के दर्शन के लिए बिचौलिए की जरूरत क्यों पड़ेगी?” उन्होंने दावा किया कि इस पूरे आयोजन में धर्म और आस्था नहीं दिखाई दे रही है, सिर्फ और सिर्फ राजनीति दिखाई दे रही है. उन्होंने सवाल किया कि 22 जनवरी की तारीख का चुनाव किस पंचांग को देखकर किया गया है? खेड़ा ने दावा किया कि प्राण प्रतिष्ठा के लिए तारीख का चयन नहीं किया गया है, बल्कि चुनाव को देखकर तारीख का चयन किया गया है.

उन्होंने कहा, ” एक व्यक्ति के राजनीतिक तमाशे के लिए हम अपने भगवान और आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं देख सकते… यह धार्मिक आयोजन नहीं है, यह पूर्ण रूप से राजनीतिक आयोजन है.” कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, ” जहां हमारे शंकराचार्य नहीं जा रहे हैं, हम वहां नहीं जा रहे हैं. बहुत ही वीभत्स राजनीति की जा रही है. ” उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने सनातन धर्म को ही संप्रदायों में बांटने का काम किया है. कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि शंकराचार्यों का अपमान हिंदू धर्म के अनुयायियों का भी अपमान है. सुप्रिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सभी प्रमुख नेता 15 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर अयोध्या जा रहे हैं.

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