कबीरधाम: त्रासदी ने परिवार के 10 लोगों को छीन लिया, कभी नहीं भूल पाऊंगा: हादसे में बचे व्यक्ति ने कहा

कवर्धा. छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में सोमवार को सड़क दुर्घटना के दौरान वाहन से कूदकर अपनी जान बचाने वालों में से एक जोधीराम धुर्वे ने कहा कि इस हादसे ने उनकी पत्नी समेत परिवार के 10 सदस्यों को छीन लिया, वह इसे कभी नहीं भूल पाएंगे.
धुर्वे कहते हैं कि उन्होंने यह सोचकर गाड़ी से छलांग लगा दी कि वाहन चालक सब संभाल लेगा लेकिन इस त्रासदी में उनकी पत्नी समेत कई लोगों की मौत हो गई.

तेंदूपत्ता संग्राहकों के एक दल को जंगल से वापस लाने के दौरान कुकदूर पुलिस थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक पिकअप वाहन बंजारी घाट पर घाटी से नीचे गिर गया. इस घटना में 15 महिलाओं और तीन नाबालिग लड़कियों सहित 19 आदिवासियों की मौत हो गई तथा तीन अन्य घायल हो गए. मृतकों में से 17 सेमरहा गांव के निवासी थे तथा दो अन्य आसपास के गांवों से थे.

सेमरहा गांव में मंगलवार को धुर्वे ने कहा, ”हम पिछले तीन दिनों से एक ही वाहन का उपयोग कर रहे थे. किसी को नहीं पता था कि सोमवार को हश्र कुछ और होगा.” उन्होंने बताया, ”रोज की तरह सोमवार को लगभग 36 लोग 25 किलोमीटर दूर बहपानी क्षेत्र में तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए सुबह चार बजे सेमरहा गांव से पिकअप वाहन में सवार होकर निकले थे. काम पूरा करने के बाद 12 बजकर 30 मिनट पर वाहन के पास एकत्र हुए और दोपहर का भोजन किया. बाद में एक बजकर 20 मिनट पर सेमरहा के लिए रवाना हुए.” धुर्वे ने बताया, ”तेंदूपत्ता के बंडल मालवाहक वाहन के पीछे रखे हुए थे और महिलाएं बंडलों के ऊपर बैठी थीं. मैं केबिन में वाहन चालक के पास बैठा था. जब वाहन बंजारी घाट में उतर रहा था, तब चालक ने लोगों को यह कहते हुए चलती गाड़ी से कूदने के लिए कहा कि ब्रेक फेल हो गया और वह रोकने में सक्षम नहीं है.”

उन्होंने बताया, ”फिर मैंने चालक से कहा कि वह गाड़ी को चट्टान की ओर मोड़ दे क्योंकि इससे गाड़ी को रोकने में मदद मिलेगी. इसके बाद मैंने चिल्लाते हुए गाड़ी में सवार लोगों को वाहन से कूदने के लिए कहा जिसके बाद कुछ लोग वाहन से कूद गये. मेरे बगल में बैठे व्यक्ति के वाहन से कूदने के बाद मैंने भी वैसा ही किया.” धुर्वे ने कहा, ”हमें लगा कि चालक वाहन पर नियंत्रण पा लेगा, लेकिन वह भी स्टीयरिंग छोड़कर बाहर कूद गया. जिसके बाद वाहन लगभग 40 फुट गहरी घाटी में गिर गया और पहाड़ी से नीचे सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया” उन्होंने बताया, ”हमने चीख पुकार सुनीं. मैं और बाहर निकलने में कामयाब रहने वाले अन्य लोग उनके पास पहुंचे. मेरी पत्नी और अन्य महिलाएं सड़क पर पड़ी थीं. हमने उन्हें पीने के लिए पानी दिया.”

धुर्वे ने बताया, ”मैंने दूसरों की मदद से अपनी पत्नी धनबाई धुर्वे (52) को उठाया और एक पेड़ की छाया में ले आया. दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता वहां पहुंचीं और वहां से गुजर रहे लोगों ने एम्बुलेंस को बुलाया. हादसे के 45 मिनट बाद एक एम्बुलेंस वहां पहुंची.” ग्रामीण ने बताया, ”मेरी पत्नी के सिर पर चोट लगी थी लेकिन वह होश में थी और मुझसे बात कर रही थी. एम्बुलेंस से पत्नी समेत अन्य घायलों को कुकदूर अस्पताल पहुंचाया गया.” उन्होंने बताया, ”मैंने गांव में मौजूद अपने बड़े बेटे को फोन पर घटना के बारे में बताया जिसके बाद वह अस्पताल पहुंचा. प्रारंभिक उपचार के बाद मेरी पत्नी को इलाज के लिए कवर्धा शहर के जिला अस्पताल में ले जाया जा रहा था, लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया.” धुर्वे ने कहा कि उन्होंने इस त्रासदी में अपने परिवार के 10 सदस्यों को खो दिया है और जब तक वह जीवित रहेंगे इस घटना को नहीं भूल पाएंगे.

सेमरहा के 17 मृतकों में से 10 एक ही परिवार के और चार दूसरे परिवार के थे. जबकि तीन अन्य भी एक ही परिवार के थे. हादसे में जान गंवाने वालीं प्यारी बाई गोड़ (40), सोनम (16), शांति बाई गोड़ (35), किरण (15), लीला बाई (35) और बेटी भारती (16), सेमरहा की निवासी थीं. मंगलवार को 17 मृतकों का अंतिम संस्कार सेमरहा में किया गया, अन्य दो शवों को सिंघारी ले जाया गया.

सेमरहा में मंगलवार की सुबह हृदय विदारक दृश्य देखने को मिला जब मृतक के पार्थिव शरीर को ट्रैक्टर-ट्रॉली पर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था. अंतिम संस्कार के लिए 10 शवों को एक लंबी चिता पर रखा गया, चार अन्य शवों का अलग चिता पर और तीन का दूसरी चिता पर रखा गया. राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सेमरहा में अंतिम संस्कार में शामिल हुए.

शर्मा ने कहा, ”मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों की इच्छा के अनुरूप जल्द ही दिवंगत व्यक्तियों की याद में एक स्मारक बनाने की व्यवस्था की जाएगी.” उन्होंने कहा, ”यह बहुत दर्दनाक क्षण है…दुर्घटना में मरने वालों में अधिकतर माताएं (महिलाएं) शामिल हैं. मुझे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे मैंने अपने परिवार के सदस्यों को खो दिया है. मैं ईश्वर से मृतकों के परिजनों को शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं.”

शर्मा ने कहा, ”इस घटना पर न सिर्फ छत्तीसगढ़ की जनता बल्कि पूरे देशवासियों ने अपनी संवेदना व्यक्त की है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी, गृह मंत्री अमित शाह जी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी ने अपनी संवेदना व्यक्त की है.” मुख्यमंत्री साय ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. यह सहायता ऐसे मामलों में जिला प्रशासन द्वारा प्रदान की जाने वाली अनुग्रह राशि के अतिरिक्त होगी.

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