
कोलकाता. पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया की वजह से राज्य भर में हुई कथित मौतों और फैली दहशत की निंदा करने के लिए राज्य विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान एक प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है. तृणमूल का आरोप है कि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची में हेरफेर करने के लिए इस प्रक्रिया का इस्तेमाल कर रही है.
पार्टी के एक वरिष्ठ विधायक ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”यह कोई सामान्य मतदाता सूची अद्यतन नहीं है, यह राजनीति से प्रेरित अभियान है जिसका उद्देश्य लोगों को डराना और बंगाल के लोकतांत्रिक ताने-बाने से छेड़छाड़ करना है.” उन्होंने कहा कि विधानसभा को इस दहशत की मानवीय कीमत के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराना चाहिए और नागरिकों को आश्वस्त करना चाहिए कि उनके अधिकार सुरक्षित हैं.
तृणमूल के एक अन्य विधायक ने कहा, ”इस राजनीति से प्रेरित कवायद के खिलाफ प्रस्ताव लाने पर चर्चा चल रही है. लेकिन अभी तक कुछ भी तय नहीं हुआ है क्योंकि आगामी शीतकालीन सत्र की तारीखें अभी तय नहीं हुई हैं.” पार्टी विधायक दल के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि प्रस्ताव को प्रतीकात्मक लेकिन मजबूत प्रतिक्रिया के रूप में पेश करने के लिए चर्चा चल रही है, जिसे तृणमूल ”बंगाल के मतदाताओं को अस्थिर करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास” कहती है.
उन्होंने कहा, ”एक बार नेतृत्व इसे मंजूरी दे दे तो हम इसे सदन में पेश करेंगे.” विधानसभा का शीतकालीन सत्र नवंबर के मध्य में शुरू होने की संभावना है. माना जा रहा है कि 2026 के राज्य चुनावों से पहले वर्तमान विधानसभा की आखिरी पूर्ण बैठक होगी. फरवरी में केवल एक अंतरिम बजट सत्र की उम्मीद है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को मध्य कोलकाता में रेड रोड से जोरासांको तक विरोध मार्च का नेतृत्व किया और भाजपा पर एसआईआर को मतदाताओं को डराने का साधन बनाने का आरोप लगाया.
उन्होंने लोगों से न घबराने का आग्रह करते हुए कहा था, ”भय अभियान ने पहले ही कई लोगों की जान ले ली है.” मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाली केरल सरकार ने भी इसी तरह का कदम उठाया था. केरल विधानसभा ने 29 सितंबर को एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें एसआईआर प्रक्रिया से उत्पन्न ”सामाजिक संकट और बहिष्कार संबंधी भय” पर चिंता व्यक्त की गई थी.
बंगाल में ‘मतदाता सूची से नाम हटने के डर से’ व्यक्ति ने आत्महत्या की
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के कारण कथित तौर पर भयभीत अधेड़ उम्र के एक व्यक्ति ने बुधवार को आत्महत्या कर ली. तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि एसआईआर के डर से राज्य में आत्महत्या की यह आठवीं घटना है.
मृतक की पहचान शफीक-उल-गाजी के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर 24 परगना के घुसिघाटा का निवासी था और पिछले कुछ महीने से भांगड़ के जयपुर इलाके में अपनी ससुराल के मकान में रह रहा था. परिवार के सदस्यों के अनुसार, गाजी को कुछ महीने पहले एक दुर्घटना में चोट आई थीं और तब से वह मानसिक रूप से परेशान था. राज्य में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से उसकी चिंता बढ़ गई थी.
मृतक की पत्नी ने संवाददाताओं को बताया, “वह वैध पहचान पत्र न होने से भयभीत थे. वह बार-बार कहते थे कि उन्हें देश से बाहर निकाल दिया जाएगा. डर की वजह से वह बीमार पड़ गए थे. आज सुबह चाय पीने के बाद वह बकरियों को बांधने गए और बाद में हमने उन्हें बकरी के बाड़े में गमछे से बनाए गए फंदे लटके हुए पाया.” इस घटना ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर एसआईआर के माध्यम से “दहशत पैदा करने” का आरोप लगाया है.
शोक संतप्त परिवार से मिलने पहुंचे कैनिंग ईस्ट से टीएमसी के विधायक शौकत मुल्ला ने कहा कि वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर वहां गए थे.
मुल्ला ने आरोप लगाया, “मंगलवार तक एसआईआर प्रक्रिया के डर से सात लोगों की मौत हो चुकी थी. अब भांगड़ में आत्महत्या करने वाला व्यक्ति भी इस सूची में शामिल हो गया है. यह गरीब लोगों को डराने और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने की भाजपा की साजिश के कारण हो रहा है.” हालांकि, भाजपा ने आरोपों को “राजनीति से प्रेरित नाटक” बताकर खारिज कर दिया.
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा, “एसआईआर मतदाता सूचियों को अद्यतन करने के लिए पूरे भारत में आयोजित एक नियमित निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया है. टीएमसी इन मौत के आंकड़ों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए और भाजपा को बदनाम करने के लिए कर रही है. कानून-व्यवस्था राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, हमारी नहीं.” निर्वाचन आयोग ने अब तक इस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं की है.



