यूपीएससी ने परिवीक्षाधीन आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर की उम्मीदवारी रद्द की

अदालत प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर की जमानत अर्जी पर एक अगस्त को फैसला सुनाएगी

नयी दिल्ली. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने बुधवार को कहा कि उसने परिवीक्षाधीन आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी पूजा खेडकर की उम्मीदवारी रद्द कर दी है और भविष्य में किसी भी परीक्षा में उनके शामिल होने पर रोक लगा दी है. आयोग ने एक बयान में कहा, ”यूपीएससी ने उपलब्ध रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक जांच-पड़ताल की है और उन्हें सीएसई-2022 नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन करने का दोषी पाया है.” इसमें कहा गया है कि सीएसई-2022 (सिविल सेवा परीक्षा-2022) के लिए उनकी अनंतिम उम्मीदवारी ”रद्द” कर दी गई है और भविष्य में किसी भी परीक्षा में उनके शामिल होने या चयन पर ”स्थायी रूप से रोक” लगा दी गई है.

आयोग ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में खेडकर का यह “एकमात्र मामला” है, जिसमें वह यह पता नहीं लगा सका कि खेडकर ने एक अभ्यर्थी के लिए सीएसई परीक्षा में बैठने के लिए निर्धारित प्रयासों से ज्यादा बार परीक्षा दी, क्योंकि “उसने न सिर्फ अपना नाम बदला, बल्कि अपने माता-पिता के नाम भी बदल दिए.” इसमें कहा गया है कि यूपीएससी एसओपी को और मजबूत करने की प्रक्रिया में है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में इस तरह के मामले की पुनरावृत्ति न हो.

आयोग ने कहा कि पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर को अपनी पहचान ‘फर्जी’ बताकर परीक्षा के लिए स्वीकृत सीमा से अधिक अवसर ‘धोखाधड़ी’ से प्राप्त करने को लेकर 18 जुलाई को कारण बताओ नोटिस (एससीएन) जारी किया गया था. बयान में कहा गया है कि उसे 25 जुलाई तक एससीएन पर अपना जवाब देना था, लेकिन उसने अपना जवाब देने के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाने के वास्ते चार अगस्त तक का समय मांगा.

आयोग ने कहा कि यूपीएससी ने उसे 30 जुलाई को अपराह्न साढ़े तीन बजे तक अपना जवाब देने के लिए ‘अंतिम मौका” दिया था, लेकिन वह ”निर्धारित समय के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने में विफल रहीं.” आयोग ने कहा कि खेडकर के मामले की पृष्ठभूमि में, उसने पिछले 15 वर्षों (2009-2023) के दौरान सिविल सेवा परीक्षाओं में शामिल हुए 15,000 से अधिक अंतिम उम्मीदवारों को लेकर इस बात की ‘गहन जांच’ की कि उन्होंने कितनी बार प्रयास किया था. इस विस्तृत कवायद के बाद, खेडकर के मामले को छोड़कर, किसी भी अन्य अभ्यर्थी ने सीएसई नियमों के तहत निर्धारित प्रयासों की संख्या को पार नहीं किया.

बयान के मुताबिक, खेडकर के मामले में यूपीएससी की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) यह पता नहीं लगा सकी कि उसने परीक्षा में बैठने के प्रयासों की निर्धारित संख्या को पार कर लिया है. इसका मुख्य कारण यह था कि उसने न सिर्फ अपना नाम बदला बल्कि अपने माता-पिता के नाम भी नाम बदल दिए.

झूठे प्रमाण पत्र (विशेष रूप से ओबीसी और पीडब्ल्यूबीडी श्रेणियों के लिए) प्रस्तुत करने के संबंध में शिकायतों के मुद्दे को उठाते हुए यूपीएससी ने कहा कि आयोग सिर्फ प्रमाण पत्रों की “प्रारंभिक” जांच करता है जैसे कि क्या प्रमाण पत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया है, प्रमाण पत्र किस वर्ष से संबंधित है, प्रमाण पत्र जारी करने की तिथि क्या है, क्या प्रमाण पत्र पर कोई ‘ओवरराइटिंग’ है और प्रमाण पत्र का प्रारूप आदि.

बयान के मुताबिक, “आम तौर पर, अगर प्रमाणपत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया होता है, तो उसे वास्तविक मान लिया जाता है. यूपीएससी के पास न तो अधिकार है और न ही हर साल उम्मीदवारों द्वारा जमा किए जाने वाले हजारों प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच करने का साधन है.” यूपीएससी ने कहा कि यह माना जाता है कि प्रमाण पत्रों की वास्तविकता की जांच और सत्यापन उन अधिकारियों द्वारा किया जाता है, जिनके पास यह काम करने का अधिकार है. यूपीएससी ने खेडकर के खिलाफ इस आरोप में पुलिस में मामला दर्ज कराया है कि उसने अपनी फर्जी पहचान बताकर सिविल सेवा परीक्षा में निर्धारित प्रयासों से अधिक बार परीक्षा देकर धोखाधड़ी की है.

अदालत प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर की जमानत अर्जी पर एक अगस्त को फैसला सुनाएगी

दिल्ली की एक अदालत धोखाधड़ी और जालसाजी के एक मामले में आरोपी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की प्रशिक्षु अधिकारी पूजा खेडकर की अग्रिम जमानत अर्जी पर एक अगस्त को फैसला सुना सकती है. सुनवाई के दौरान खेडकर ने अदालत से कहा कि एक अधिकारी के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार जंगला ने बुधवार को खेडकर द्वारा दायर अर्जी पर दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया. खेडकर ने अपने वकील के माध्यम से दायर अर्जी में दावा किया कि उन्हें ”गिरफ्तारी का आसन्न खतरा” है. अभियोजन पक्ष ने अर्जी का विरोध करते हुए दावा किया कि उन्होंने ”व्यवस्था को धोखा दिया है.” कार्यवाही के दौरान, खेडकर ने कहा कि वह ”अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए” अग्रिम जमानत चाहती हैं.

खेडकर की ओर से पेश वकील बीना महादेवन ने अदालत से कहा, ”मैंने (खेडकर ने) यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है, इसीलिए मेरे खिलाफ यह सब हो रहा है. यह सब जिलाधिकारी के इशारे पर हो रहा है, जिनके खिलाफ मैंने यौन उत्पीड़न की शिकायत की है. उस व्यक्ति ने मुझे एक निजी कमरे में आकर बैठने को कहा. मैंने कहा कि मैं एक योग्य आईएएस हूं और मैं ऐसा नहीं करूंगी. मैं अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अग्रिम जमानत का अनुरोध कर रही हूं.” महादेवन ने अदालत को बताया कि खेडकर ने कोई जानकारी नहीं छिपाई तथा उन्होंने परीक्षा में शामिल होने की संख्या गलत बताई है.

उन्होंने कहा, ”मैंने पांच लिखा था, लेकिन मुझे 12 लिखना चाहिए था. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मैंने अलग कोटे के तहत उन (परीक्षा में बैठने के) प्रयासों का लाभ उठाया. यह सद्भावना से किया गया था या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए.” वकील ने यह भी कहा कि जांच के तहत खेडकर को कई अधिकारियों ने बुलाया है.

उन्होंने कहा, ”आईएएस अकादमी मसूरी ने मुझे (खेडकर को) बुलाया है, पुणे आयुक्त ने मुझे बुलाया है. डीओपीटी (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) ने भी मुझे नोटिस दिया है. मुझे इन सभी मंचों पर अपना बचाव करने के लिए अग्रिम जमानत की आवश्यकता है.” वकील ने कहा कि इस मामले के बाद से मीडिया खेडकर को निशाना बना रहा है, लेकिन वह एक बार भी मीडिया के पास नहीं गईं ”क्योंकि उन्हें न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है.”

अभियोजन पक्ष ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए दावा किया कि खेडकर ने खामियों का फ.ायदा उठाया और अपना नाम बदल लिया. लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने कहा, ”हम अभी (जांच के) बहुत प्रारंभिक चरण में हैं. हमें उनसे हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है.” अदालत ने जब पूछा कि यदि जांच प्रारंभिक चरण में है तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की जल्दी में क्यों है, तो श्रीवास्तव ने कहा, ”यदि उन्हें अग्रिम जमानत मिल जाती है तो वह सहयोग नहीं करेंगी.” लोक अभियोजक ने कहा, ”उन्होंने अपने पिता और मां का नाम बदल लिया. कैसे? परीक्षा प्रणाली और आम जनता को धोखा देने की साजिश रची जा रही है.” उन्होंने कहा, ”इस तरह के लोग जो व्यवस्था को धोखा देते हैं, उनसे बहुत गंभीरता से निपटा जाना चाहिए. उन्होंने (खेडकर) कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया.” उन्होंने यह भी कहा कि कानून का दुरुपयोग करने की संभावना अभी भी बनी हुई है.

श्रीवास्तव ने कहा, ”ओबीसी कोटे में क्रीमी लेयर और नॉन-क्रीमी लेयर की अवधारणा है. उनके (खेडकर के) पिता ने 53 करोड़ रुपये की अपनी संपत्ति घोषित की है. इससे बचने के लिए उन्होंने दावा किया कि उनके माता-पिता का तलाक हो चुका है और वह अपनी मां के साथ रहती हैं. यह भी जांच का हिस्सा है. हम मेडिकल दस्तावेजों की भी जांच करेंगे.” संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने खेडकर के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी पहचान बताकर कोटे का लाभ उठाने के लिए मामला दर्ज कराया है. आरोप है कि निर्धारित संख्या से अधिक बार सिविल सेवा परीक्षा देने के लिए उन्होंने फर्जी पहचान बताई. यूपीएससी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश कौशिक ने कहा, ”उन्होंने अवैध तरीके से सरकारी नौकरी हासिल की. ??यह न केवल यूपीएससी, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ अपराध है.” भाषा आशीष नेत्रपाल

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