रास में उठाए गए विमान में एक सीट डॉक्टर के लिए आरक्षित करने सहित विभिन्न मुद्दे

नयी दिल्ली: राज्यसभा में मंगलवार को विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों ने कोंिचग केंद्रों में शिक्षा के नाम पर हो रहे कथित व्यापार, असम के दीमा हसाओ के उमरंगसो में हाल ही में हुई खदान दुर्घटना, बिहार के सीवान में एक बालिका आश्रय गृह से 13 लड़कियों के कथित तौर पर चले जाने तथा विमानों में एक सीट डॉक्टर के लिए आरक्षित किए जाने का मुद्दा उठाया तथा सरकार से इस ओर तत्काल ध्यान देने की मांग की।

भारतीय जनता पार्टी के संजय सेठ ने कोंिचग केंद्रों का मुद्दा उठाते हुए उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान कहा कि इन केंद्रों में शिक्षा के नाम पर कारोबार हो रहा है और विद्यार्थियों से उनके सपने सच करने का वादा कर मनमाना पैसा लिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ज्यादातर कोंिचग केंद्र वे लोग चला रहे हैं जिनके अपने सपने पूरे नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि कोंिचग केंद्र समुचित नियमन के अभाव में अपनी नियमावली स्वयं तैयार करते हैं और प्रतिस्पर्धा के इस दौर में विद्यार्थी उनके शिकंजे में फंस जाते हैं।

सेठ ने सरकार से कोंिचग केंद्रों के नियमन के लिए शीघ्र कदम उठाने का अनुरोध किया। निर्दलीय सदस्य ने अजित भुइयां ने असम के दीमा हसाओ के उमरंगसो में हाल ही में हुई खदान दुर्घटना का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में तथा अन्य जगहों पर अवैध खनन का सिलसिला जारी है।

भुइयां ने कहा कि रैट होल माइंिनग पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने प्रतिबंध लगा दिया है लेकिन उमरंगसो में हाल ही में हुई दुर्घटना बताती है कि यह सिलसिला जारी है। असम के दीमा हसाओ जिले की उमरंगसो कोयला खदान में छह जनवरी को अचानक पानी भर जाने से वहां कुछ मजदूर फंस गए थे और उनकी मौत हो गई।

भुइयां ने इस मामले की गहन जांच के साथ ही सरकार से यह सुनिश्चत करने की अपील की कि भविष्य में इस तरह के हादसे न हों। आम आदमी पार्टी के संत बलबीर ंिसह ने पूछा कि किसानों की आमदनी कब दोगुना होगी? उन्होंने कहा ‘‘किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। कर्ज से परेशान हो कर कई किसान आत्महत्या कर चुके हैं। यह संख्या करीब 16600 है।’’

उन्होंने सवाल किया कि जब कारपोरेट जगत के 16 लाख करोड़ रुपये माफ किए गए तो पंजाब के किसानों का कर्ज क्यों नहीं माफ किया जा रहा है?’’ तृणमूल कांग्रेस के रीताव्रता बनर्जी ने तीस्ता नदी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह नदी भारत से आगे बांग्लादेश में भी बहती है। उन्होंने कहा कि सिक्किम में इस नदी पर कई बांध परियोजनाएं बनाई गईं जिससे इसका प्रवाह प्रभावित हो रहा है।

बनर्जी ने कहा कि तीस्ता नदी का पानी फरक्का बैराज में छोड़ा जा रहा है जिससे पश्चिम बंगाल के लोगों को परेशानी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीन बार प्रधानमंत्री को इस संबंध में पत्र लिखा है।

बनर्जी ने कहा कि तीस्ता नदी का पानी बांग्लादेश को देने से पहले बंगाल सरकार से बात करनी चाहिए।
भाजपा की डॉ कल्पना सैनी ने मांग की कि हर विमान में एक सीट चिकित्सक के लिए आरक्षित की जानी चाहिए जो आपात स्थिति में सेवा देने के लिए तैयार हो। उन्होंने कहा कि रक्तचाप, हृदयाघात जैसी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताएं तथा आपात स्थिति होने पर चिकित्सक की जरूरत होती हे।

कल्पना ने कहा ‘‘अगर उड़ान के ठीक पहले तक यह सीट न बुक हो तो फिर यह यात्री को दी जा सकती है ताकि एयरलाइन को आर्थिक नुकसान न हो। इसके साथ ही चिकित्सा किट की व्यवस्था भी जरूरी है।’’ उन्होंने दावा किया कि यह कदम उठाने पर लोग सुरक्षित यात्रा कर सकेंगे और एयरलाइन भी अधिक विश्वसनीय बन सकेगी।

कांग्रेस की रंजीत रंजन ने बिहार के सीवान के एक बालिका गृह का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पिछले दिनों वहां से 13 लड़कियों के चले जाने की खबर आई थी। उन्होंने कहा कि उस रात आश्रय गृह के पांच सीसीटीवी कैमरे बंद थे।
रंजन ने कहा कि आश्रय गृह की दीवार बीस फुट ऊंची है फिर लड़कियों ने दीवार कैसे फांदी।

उन्होंने कहा कि पहले भी आश्रय स्थलों में कई तरह के उत्पीड़न की खबरें आई हैं। उन्होंने दावा किया ‘‘यह केवल यौन उत्पीड़न तक ही सीमित नहीं है। उनके साथ बहुत बुरा सलूक होता है।’’ उन्होंने मांग की पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जानी चाहिए।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की डॉक्टर फौजिया खान ने ड्यूटी पर तैनात महिलाओं के लिए, बच्चों की देखभाल की सुविधा दिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा ‘‘केवल ‘नारी शक्ति’ कहने से नहीं होता, नीति निर्माताओं को समझना होगा कि व्यवस्थागत बदलावों के अनुसार, व्यवस्था जरूरी है।’’ उन्होंने कहा कि बच्चों की देखभाल को ‘लग्जरी’ नहीं बल्कि ‘मूलभूत सेवा’ समझना चाहिए।

बीजद की सुलता देव ने कहा कि पहले हर साल पांच मार्च को बीजू पटनायक की जयंती पर पंचायती राज दिवस मनाया जाता था लेकिन राज्य की भाजपा सरकार ने अब पांच मार्च को बीजू पटनायक की जयंती और 24 अप्रैल को पंचायती राज दिवस मनाने का फैसला किया है।

सुलता ने कहा कि बीजू पटनायक ने हर क्षेत्र में योगदान दिया था और पंचायती राज व्यवस्था को लागू करने में उनकी अहम भूमिका थी। उन्होंने मांग की कि पांच मार्च को पटनायक के जन्मदिन पर ही पंचायती राज दिवस मनाने की पुरानी व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए।

इनके अलावा तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष, वाईआरएस कांग्रेस पार्टी के मेदा रघुनाथा रेड्डी तथा भाजपा की सीमा द्विवेदी ने भी लोक महत्व से जुड़े अपने अपने मुद्दे उठाए।

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