राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रौद्योगिकियों के आयात पर निर्भर नहीं रह सकते हैं हम: राजनाथ सिंह

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 16 Oct 2025 11:09 PM
राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रौद्योगिकियों के आयात पर निर्भर नहीं रह सकते हैं हम: राजनाथ सिंह
ऑडियो सुनें

पुणे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि कुछ देश संरक्षणवादी नीतियां अपनाते हैं और कभी-कभी विघटनकारी प्रौद्योगिकियों के बारे में जानकारी छिपाते हैं, जबकि भारत ने इन बाधाओं को सफलतापूर्वक चुनौती दी है और साबित किया है कि यदि इरादे साफ हों तो कोई भी देश किसी भी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है.

सिंह ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रौद्योगिकियों के आयात पर निर्भर नहीं रह सकता. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य न केवल देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है, बल्कि इसे इस क्षेत्र में वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करना है. रक्षामंत्री ने कहा कि भारत को न केवल प्रौद्योगिकी का उपयोगकर्ता होना चाहिए, बल्कि इसका निर्माता भी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अपनी जरूरतों को पूरा करने के अलावा, देश एक विश्वसनीय रक्षा भागीदार बन रहा है.

सिंह यहां रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति के आयुध अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एआरडीई) के दौरे के दौरान बोल रहे थे. वह समिति के अध्यक्ष हैं. यह प्रतिष्ठान आयुध एवं लड़ाकू इंजीनियरिंग प्रणाली (एसीई) क्लस्टर के तत्वावधान में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की एक प्रमुख प्रयोगशाला है.

इस दौरे के दौरान, समिति ने क्लस्टर की विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित अत्याधुनिक उत्पादों का निरीक्षण किया. प्रर्दिशत उल्लेखनीय उत्पादों में ‘एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम’, ‘पिनाका रॉकेट सिस्टम’, हल्का टैंक ‘ज.ोरावर’, पहिएदार बख्तरबंद प्लेटफ.ॉर्म और आकाश-नई पी­ढ़ी की मिसाइल शामिल हैं.

समिति को रोबोटिक्स, रेल गन, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम, उच्च-ऊर्जा प्रणोदन सामग्री आदि के क्षेत्र में विकसित की जा रही प्रौद्योगिकियों की स्थिति से भी अवगत कराया गया. क्लस्टर के भविष्य का एक विस्तृत रोडमैप भी प्रस्तुत किया गया.
‘उभरती प्रौद्योगिकियां और डीआरडीओ’ विषय पर आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए, सिंह ने रक्षा क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों और युद्ध की बदलती प्रकृति को समझने और उसके अनुसार ढलने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने तेजी से बदलती दुनिया में उन्नत प्रौद्योगिकियों को एक आवश्यकता बताया और कहा कि सरकार इस आवश्यकता को सुरक्षा तंत्र में एकीकृत करने के लिए प्रतिबद्ध है.

उन्होंने कहा, ”आज प्रौद्योगिकी प्रभुत्व का युग है. जो राष्ट्र विज्ञान और नवाचार को प्राथमिकता देगा, वही भविष्य का नेतृत्व करेगा. तकनीक अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह हमारे रणनीतिक निर्णयों, रक्षा प्रणाली और भविष्य की नीतियों का आधार बन गई है.” सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के अटूट संकल्प को दोहराया और कहा कि भारत राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रौद्योगिकियों के आयात पर निर्भर नहीं रह सकता. उन्होंने डीआरडीओ की उन प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिए सराहना की, जो पहले आयात की जाती थीं. उन्होंने कहा कि डीआरडीओ भविष्य के उत्पादों में अपनी छाप छोड़ रही हैं, जिनकी चर्चा अब वैश्विक स्तर पर होने लगी है.

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Yogesh Kumar Sahu