शीतकालीन सत्र में गतिरोध के आसार, विपक्ष SIR और राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा की मांग पर अडिग

संसद अच्छी तरह चलनी चाहिए, विपक्षी दलों से बातचीत जारी रखेंगे: रीजीजू

नयी दिल्ली. संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हंगामेदार रहने और इसमें गतिरोध पैदा होने के आसार रविवार को उस वक्त दिखाई दिए, जब अधिकतर विपक्षी दलों ने एक सुर में यह मांग उठाई कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा कराई जानी चाहिए.

हालांकि, सरकार ने कहा कि संसद की कार्यवाही अच्छी तरह चलनी चाहिए और वह गतिरोध की स्थिति को टालने के लिए विपक्षी दलों के साथ बातचीत जारी रखेगी. सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने चुटीले अंदाज में यह भी कहा कि यह शीतकालीन सत्र है और इसमें सबको ”ठंडे दिमाग से” काम करना चाहिए. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में एसआईआर के साथ ही दिल्ली विस्फोट की पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया.

इसके साथ ही, उन्होंने वायु प्रदूषण, विदेश नीति, किसानों की स्थिति, महंगाई, बेरोजगारी और कुछ अन्य विषयों पर सत्र के दौरान चर्चा कराने का आग्रह किया. बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की प्रचंड जीत से उत्साहित केंद्र सरकार इस सत्र में 14 विधायक पेश कर सकती है. इस सर्वदलीय बैठक में 36 राजनीतिक दलों के 50 नेता शामिल हुए. बैठक में सरकार की तरफ से रक्षा मंत्री राजनाथ राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल शामिल हुए.

कांग्रेस के प्रमोद तिवारी, कोडिकुनिल सुरेश, तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन, समावादी पार्टी के राम गोपाल यादव, द्रमुक के तिरुचि शिवा और कई अन्य दलों के नेता शामिल हुए. सर्वदलीय बैठक के बाद रविवार शाम लोकसभा और राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठकें हुईं, जिनमें विपक्ष ने चुनाव सुधारों के व्यापक मुद्दे पर चर्चा की मांग रखी. सरकार ने विपक्ष को आश्वासन दिया कि वह जल्द ही इस पर अपनी राय बताएगी. सरकार ने वंदे मातरम की रचना की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा पर जोर दिया, लेकिन कई विपक्षी दलों ने इसको लेकर उत्साह नहीं दिखाया.

लोकसभा ने चर्चा के लिए 10 घंटे आवंटित किए हैं और तारीख लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा तय की जाएगी. लोकसभा ने मणिपुर माल और सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2025 को सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया है और इसके लिए तीन घंटे आवंटित किए हैं. केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 और स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025 पेश किए जाने वाले हैं. राज्यसभा कार्य मंत्रणा समिति की बैठक बेनतीजा रही और सोमवार शाम को फिर से बैठक होगी. विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि वे चाहते हैं कि सोमवार दोपहर दो बजे एसआईआर पर चर्चा शुरू हो और संसद सुचारू रूप से चले, लेकिन सरकार तैयार नहीं हुई. विपक्षी दलों ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी व्यवधान के लिए सरकार जिम्मेदार होगी.

किरेन रीजीजू ने सर्वदलीय बैठक को सकारात्मक करार देते हुए कहा, ”बैठक में जो भी सुझाव आए हैं, उनको विचार के बाद बीएसी (कार्य मंत्रणा समिति) में रखा जाएगा. कुल मिलाकर 36 दलों के 50 नेता शामिल हुए. सरकार की तरफ से आश्चासन देता हूं कि संसद का शीतकालीन सत्र अच्छी तरह से चलाने के लिए विपक्ष के साथ बातचीत करते रहेंगे. विपक्षी दलों के नेताओं से अनुरोध है कि संसद को अच्छी तरह से चलाने में सहयोग करें.”

रीजीजू ने कहा, ”लोकतंत्र, विशेष रूप से संसदीय लोकतंत्र में गतिरोध होता है, राजनीतिक दलों में मतभेद होते हैं. इसके बावजूद हम सब तय करें कि सदन में गतिरोध पैदा नहीं करना है और अपनी बात रखकर विरोध दर्ज कराना है, तो सदन चलेगा.” उन्होंने एसआईआर मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर कहा, ”विपक्षी दलों में कई नेता हैं, जो संसद चलाना और मुद्दे उठाना चाहते हैं. इसलिए यह कहना उचित नहीं है कि सभी विपक्षी दल एसआईआर का मुद्दा उठाकर संसद की कार्यवाही बाधित करना चाहते हैं.” उन्होंने कहा कि विपक्ष ने कई मुद्दे रखे हैं, उनमें से एसआईआर भी एक है.

रीजीजू ने कहा, ”एसआईआर पर चर्चा नहीं हुई, तो संसद नहीं चलने देंगे, ऐसा सभी राजनीतिक दलों ने नहीं कहा है. किसी ने बाहर बयान दिया है, तो उसे सामूहिक बयान नहीं मानना चाहिए.” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा संसद के शीतकालीन सत्र से एक दिन पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक महज एक औपचारिकता थी.

सर्वदलीय बैठक के बाद लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने संवाददाताओं से कहा, ”ऐसा लगता है कि भाजपा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली सरकार लोकतंत्र, संसदीय परंपरा और मर्यादा को खत्म करने की कोशिश कर रही है.” उन्होंने दावा किया कि सरकार खुद संसद को ‘डिरेल करने’ (पटरी से उतारने) की कोशिश कर रही है.

गोगोई ने कहा, ”हमने कहा है कि हमें राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करने की जरूरत है. दिल्ली में विस्फोट कानून व्यवस्था और गृह मंत्रालय की विफलता का सबूत है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि सरकार इस पर किसी अल्पकालिक चर्चा के लिए तैयार है.” उन्होंने कहा कि सरकार के समक्ष वायु प्रद्रूषण, विदेश नीति, किसानों की स्थिति और प्राकृतिक आपदा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की मांग की गई है. राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि यदि सरकार एसआईआर पर चर्चा के लिए तैयार नहीं होती है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि वह संसद नहीं चलने देना चाहती.

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि यदि एसआईआर पर चर्चा नहीं कराई गई, तो संसद में गतिरोध होगा.
यादव ने कहा, ”मान लीजिए कि निर्वाचन आयोग प्रधानमंत्री का नाम काट दे तो क्या इस पर चर्चा नहीं होगी?” तृणमूल कांग्रेस के नेता कल्याण बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी सदन चलाने के लिए सहयोग को तैयार है, लेकिन इसके लिए सरकार को भी सहयोग करना होगा.

उन्होंने दावा किया, ”एसआईआर पर चर्चा होनी चाहिए. कई बीएलओ की मौत हुई है, यह गंभीर मुद्दा है.” बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी ”खामियों” पर भी चर्चा होनी चाहिए. द्रमुक नेता तिरुचि शिवा ने कहा कि सभी विपक्षी दल इसको लेकर सहमत हैं कि शीतकालीन सत्र में एसआईआर पर चर्चा होनी चाहिए. विपक्षी दल सोमवार सुबह संसद भवन में बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे. संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू होगा और यह 19 दिसंबर को समाप्त होगा.

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