मनोज मिश्रा
रायपुर. आजाद हिंद फौज के संस्थापक और देश के लिए बलिदान देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु कब और कैसे हुई, इस बात को लेकर हमेशा सवाल खड़े होते रहे हैं लेकिन केद्र सरकार द्वारा 400 क्लासीफाइड फाइलें ओपन किए जाने के बाद नेताजी बोस के परिवार ने भी मान लिया है कि नेताजी का देहांत 18 अगस्त 1945 में प्लेन क्रैश में हो गया था।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने खास बातचीत में कहा कि 2016 तक हम लोग भी नहीं मानते थे कि प्लेन क्रैश में नेताजी का देहांत हो गया था लेकिन केंद्र सरकार द्वारा फाइल ओपन किए जाने से जो दस्तावेज और कनक्लूसिव एविडेंस सामने आए उससे यह स्पष्ट हो गया कि उनका देहांत 1945 में हुआ था। परिवार ने भी यह मान लिया है। परिवार ने जापान में रखी अस्थियों को भारत लाए जाने की मांग भी उठाई है। गुमनामी बाबा को नेताजी बताए जाने के सवाल पर श्री बोस ने कहा कि वह सब निराधार बातें हैं। गुमनामी बाबा की मृत्यु के बाद यह सब खुलासा हुआ। उससे पहले कोई चर्चा नहीं।
नेताजी के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने ‘नवभारत’ से नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु, देश की वर्तमान स्थिति, एसआईआर, जेनजी आंदोलन और विकसित तथा आत्मनिर्भर भारत पर विस्तार से चर्चा की। श्री बोस का देश की वर्तमान स्थितियों पर सवाल उठाए तो केंद्र की एनडीए सरकार को नेताजी से जुड़ी फाइलें ओपन करने के लिए क्रेडिट दिया। सांप्रदायिक और विभाजनकारी नीतियों पर भी उन्होंने जोरदार प्रहार किया।
देश में हो रही विभाजनकारी राजनीति
श्री बोस ने कहा कि आजादी की लड़ाई में असंख्य लोग शामिल हुए। सिपाही विद्रोह से आजादी की लड़ाई की शुरुआत हुई। क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया। गांधीजी के अहिंसा आंदोलन ने भी अंग्रेजी साम्राज्य पर गहरा प्रभाव डाला था लेकिन आजादी की फाइनल लड़ाई आजाद हिंद फौज ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में लड़ी। नेताजी के आजाद हिंद फौज में 60 हजार सैनिक थे। वे 60 हजार सैनिक न हिंदू, न मुश्लिम, न सिख, न इसाई थे, सभी भारतीय थे। आजादी का नेताजी का कॉन्सेप्ट वर्तमान समय में बहुत ही प्रासंगिक है। आज देश में विभाजन की राजनीति, सांप्रदायिक राजनीति, धर्म को लेकर राजनीति हो रही है। नेताजी आध्यात्मिक थे। लेकिन आजादी की लड़ाई में धर्म को लेकर कभी भी नहीं आए। उन्होंने विभाजन नहीं किया। सभी को एक बनाया था। भारत की एकता के लिए एकमात्र सिद्धांत नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज का आदर्श होगा।
श्री बोस का कहना है कि हमने ओपन प्लेटफार्म पर केंद्र सरकार से मांग की थी कि नेताजी से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक होनी चाहिए, हुआ भी। इसका क्रेडिट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देते हैं कि अच्छा काम उन्होंने किया है लेकिन नेताजी का आदर्श वर्तमान भारत में प्रतिष्ठित करना बाकी रह गया है। इसके बिना विकसित भारत की बात पूरी नहीं हो सकती है। सभी को एक साथ नहीं जोड़ेंगे तो विकसित भारत नहीं हो सकता है।
गुमनामी बाबा का कॉन्सेप्ट निराधार
श्री बोस का कहना है कि गुमनानी बाबा के सवाल पर श्री बोस का कहना है कि गुमनानी बाबा वाला कॉन्सेप्ट निराधार है क्योंकि जब तक वो जिंदा थे तो किसी को पता नहीं चला। मरने के बाद चर्चा हुई। वे या उनके परिवार से किसी ने उनसे मुलाकात नहीं की। अब तो नेताजी की पुत्री अनिता बोस ने नेताजी की अस्थियां भारत लाने की मांग उठाई है। इसका वे भी समर्थन करते हैं।
इस वजह से छोड़े भाजपा
श्री बोस ने बताया कि 2016 में नरेन्द्र मोदी का नेतृत्व अच्छा लगा था। उन्होंने डेवलपमेंट प्लान, एंटी करप्शन की बातें रखी। हमने चाहा था नेताजी के आदर्श में काम करने के लिए आजाद हिंद मोर्चा के गठन के लिए। वह संभव नहीं हो सका। बेसिक ऑडियोलॉजिकल डिफरेंस हो गया। इसलिए छोड़ दिए लेकिन सभी का सम्मान करते हैं। वे कहते हैं एकता के बिना इलेक्ट्रोकल विक्ट्री हो सकती है लेकिन देश की जीत नहीं हो सकती।
भारतीय कॉन्सेप्ट के बिना विकसित भारत नहीं
नेताजी के प्रपौत्र श्री बोस कहते हैं कि भारतीय कॉन्सेप्ट (सभी को साथ लेकर चलना) नहीं रहेगा तो विकसित भारत नहीं बन सकता। आत्मनिर्भर भारत के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका जवाब तो जनता देगी। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है लेकिन जिस हिसाब से व्यवस्था का संचालन हो रहा है। इससे सवाल उठ रहा है कि डेमोक्रेसी है भी कि नहीं।
राजनीति नहीं काम में लगाएं मन
श्री बोस का कहना है कि नेताजी ने भी राजनीति की और उन्होंने देश के लिए बलिदान दिया। आज भी नेता काम कर रहे हैं लेकिन राजनीति ज्यादा और काम कम कर रहे हैं। आज जरूरत देश के लिए काम करने की है। नेता राजनीति नहीं काम में मन लगाएं।
एसआईआर पर इलेक्शन कमीशन को देना होगा जवाब
एसआईआर के सवाल पर नेताजी के प्रपौत्र श्री बोस ने बेबाक टिप्पणी करते हुए कहा कि इलेक्शन कमीशन का जवाब देना चाहिए जिस हिसाब से एआईआर हुआ है। बहुत लोगों को नोटिस देकर बुलाया गया। 2002 की लिस्ट में नाम नहीं होने की बात कही गई लेकिन इसके लिए वोटर लिस्ट से किसी को बाहर नहीं कर सकते हैं। वोटर लिस्ट में नाम हो क्योंकि यह अधिकार संविधान ने दिया है। हटाने का अधिकार इलेक्शन कमीशन को नहीं है। कोई सरकार भी वोटिंग लिस्ट से नाम हटाने का अधिकार नहीं दे सकती है। बंगाल में 90 लाख वोटर के नाम काटे गए जिनमें से 37 लाख जेनुइन वोटर थे। एआई की मदद लेकिन है लेकिन एआई हर समय सही जवाब नहीं देता है। मेन्युअली चेक करने की भी जरूरत है।
नीट के सवाल पर बोले – पूरा सिस्टम बदलना पड़ेगा
श्री बोस कहते हैं कि एजूकेशन, नीट पर्चा लीक को लेकर आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री को हटाया गया लेकिन एक को हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पूरा सिस्टम ही बदलना पड़ेगा।
जेन जी सही मुद्दा चुने, लाठी लेकर निकलने से समाधान नहीं
श्री बोस का कहना है कि जेनजी को नीट, शिक्षा के मुद्दे पर सफलता मिली। मांग वाजिब थे लेकिन हर बात के लिए आंदोलन नहीं कर सकते। मुद्दे का चुनाव करना होगा। आंदोलन शांतिपूर्ण होना चाहिए। लाठी लेकर निकलने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता है।
एसआईआर में बताना पड़ा पहचान
एसआईआर मामले में श्री बोस ने खुलासा किया कि उन्हें भी नोटिस मिली थी। उन्हें भी अपना पहचान साबित करना पड़ा।