बस्तर में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।ओड़िशा के नबरंगपुर जिले के इंद्रावती बांध के गेट खोले गए हैं जिससे जगदलपुर और इंद्रावती के तटीय इलाकों में एक बार फिर जल स्तर बढ़ने का अनुमान है।
यह जानकारी केंन्द्रीय जल आयोग (CWC), निचली गोदावरी मंडल, हैदराबाद द्वारा 28 सितंबर 2026 को जारी एडवाइजरी पर आधारित है। सूत्रों के मुताबिक ओडिशा ने नबरंगपुर डैम से 162 करोड़ (1.62 अरब) लीटर पानी इंद्रावती में छोड़ दिया.
यह पानी मंगलवार देर रात 2 बजे के आसपास बस्तर पहुंचेगा. बता दें कि, डैम से 18 घंटे में 1.62 अरब लीटर पानी बस्तर की ओर धकेला गया है. वहीं, बस्तर में खतरा फिर बढ़ने वाला है. केंद्रीय जल बोर्ड के मुताबिक, ओडिशा के नबरंगपुर डैम से रविवार रात 1 बजे से सोमवार शाम 6 बजे तक 250 क्यूमेक, यानी हर सेकेंड 2.50 लाख लीटर पानी बहाया गया. इसी तरह 18 घंटे में लगातार 162 करोड़ लीटर पानी बहाया जा चुका है.
जानते चले कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कल सोमवार को बस्तर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया था. मुख्यमंत्री जगदलपुर नगर निगम क्षेत्र के डोंगाघाट पहुंचे और बाढ़ से प्रभावित परिवारों से आत्मीयतापूर्वक मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं. उन्होंने प्रभावित लोगों को आश्वस्त किया कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ पूरी संवेदनशीलता और तत्परता से खड़ी है तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.

मुख्यमंत्री श्री साय ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत देते हुए शासन के प्रावधानों के तहत मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त प्रत्येक प्रभावित परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹10-10 हजार की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ से हुई क्षति का सर्वे और आकलन तेजी से पूरा कर पात्र परिवारों तक शासन की सहायता शीघ्र पहुंचाई जाए.
बस्तर प्रशासन ने इलाके आस-पास के इलाके में रेड अलर्ट जारी कर दिया है. महापौर संजय पांडे ने लोगों से अभी राहत शिविरों में ही रहने की अपील की है और कहा है कि निम्न-स्तरीय (निचले) क्षेत्रों में रहने वाले सभी नागरिक तुरंत सुरक्षित स्थानों या राहत शिविरों में चले जाएँ।