
मुंबई. महाराष्ट्र विधान परिषद के 11 नवनिर्वाचित सदस्यों ने रविवार को यहां विधान भवन में शपथ ली. विधान भवन में रविवार को जिन विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) ने शपथ ली उनमें भाजपा की पंकजा मुंडे, परिणय फुके, योगेश तिलेकर, अमित गोरखे और सदाभाऊ खोत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के राजेश विटेकर व शिवाजीराव गरजे, शिवसेना की भावना गवली व कृपाल तुमाने, कांग्रेस के प्रज्ञा सातव और शिवसेना (यूबीटी) के मिलिंद नार्वेकर शामिल हैं. कांग्रेस की प्रज्ञा सातव और शिवसेना नेता मिलिंद नार्वेकर ने भी राज्य विधानमंडल के केंद्रीय कक्ष में शपथ ली.
पत्रकारों से बात करते हुए एमएलसी गोरखे ने कहा, “लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्ष ने संविधान को लेकर गलत बयानबाजी करने की कोशिश की. इस गलत सूचना को दूर करने के लिए पार्टी के साथ मिलकर काम करना मेरा संकल्प है.” भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक ने कहा कि महाराष्ट्र में 59 अनुसूचित जातियां हैं और वह समुदाय को एकजुट करने तथा उनकी बेहतरी के लिए काम करने के वास्ते राज्य का दौरा करने की योजना बना रहे हैं.
दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे ने कहा, “मैं उन लोगों की आवाज बनूंगी जिनकी राजनीति में कोई भूमिका नहीं है. मुझे आज अपने पिता की याद आ रही है क्योंकि उन्होंने मेरा बहुत मार्गदर्शन किया है.” मुंडे से जब राज्य मंत्रिमंडल में उन्हें शामिल किए जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी किसी बात की जानकारी नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और मराठों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होने के बजाय मिलकर काम करना चाहिए और यह एक सच्चाई है कि राज्य में स्थिति बदतर हो गई है.
महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने 12 जुलाई को हुए विधान परिषद चुनाव में 11 में से नौ सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और उन सभी सीट पर जीत दर्ज की थी. महायुति गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रावादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) शामिल हैं.
विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने पांच, जबकि शिवसेना और राकांपा ने दो-दो सीट पर जीत दर्ज की थी. वहीं, उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस को एक-एक सीट पर जीत हासिल हुई थी. राकांपा (शरदचंद्र पवार) से समर्थन प्राप्त ‘पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया (पीडब्ल्यूपी)’ के नेता जयंत पाटिल को विधान परिषद चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था.



