केरल के वायनाड में भूस्खलन से 123 लोगों की मौत, 128 घायल

मुख्यमंत्री विजयन ने लोगों से एकजुट होकर बर्बाद जीवन को फिर से बनाने का आग्रह किया

वायनाड/तिरुवनंतपुरम/नयी दिल्ली. केरल के पर्वतीय वायनाड जिले में मंगलवार तड़के कई जगहों पर भारी बारिश के बाद हुईं भूस्खलन की घटनाओं में कम से कम 123 लोगों की मौत हो गयी है तथा 128 लोग घायल हुए हैं. सैकड़ों लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका के कारण मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. सरकारी सूत्रों ने कहा कि इस आपदा में अब तक 123 लोगों की मौत हो चुकी है. भूस्खलन की घटनाएं मंगलवार तड़के हुईं जिससे अपने घरों में सो रहे लोगों को बचने का मौका भी नहीं मिल पाया. भूस्खलन ने तबाही के निशान छोड़े हैं. कई मकान जमींदोज हो गए, नदियां उफान पर हैं और कई पेड़ उखड़ गए हैं.

सेना, नौसेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के बचाव दल खराब मौसम के बीच पीड़ितों की तलाश कर रहे हैं और पीड़ित लोगों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए कई एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं. इससे पहले, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बताया था कि वायनाड में भूस्खलन के बाद अब तक 93 शव बरामद हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि 128 लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि भूस्खलन में मरने वाले 34 व्यक्तियों के शवों की पहचान की जा चुकी है. मुख्यमंत्री ने बताया कि इनमें से 18 शव मृतकों के परिवारों को सौंप दिए गए हैं .  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के पोथुकल में चलियार नदी से 16 शव मिले हैं, इसके अलावा शवों के टुकड़े भी बरामद किये गये हैं . उन्होंने कहा कि कई लोगों फंसे होने या बह जाने की आशंका है और हम बचाव कार्य जारी रखेंगे. विजयन ने बताया कि जिले में स्थापित 45 राहत शिविरों में 3,000 से अधिक लोगों को स्थानांतरित किया गया है. उन्होंने बताया कि पहला भूस्खलन तड़के दो बजे हुआ, उसके बाद दूसरा भूस्खलन सुबह चार बजकर दस मिनट पर हुआ.

मुख्यमंत्री ने बताया कि मेप्पाडी, मुंदक्कई और चूरलमाला क्षेत्रों से संपर्क टूट गया है तथा चूरलमाला-मुंदक्कई सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है. लोकसभा में विपक्ष के नेता और वायनाड के पूर्व सांसद राहुल गांधी ने संसद में इससे पहले दिन में कहा था कि भूस्खलन की घटनाओं में 70 से अधिक लोगों की मौत हुई है. एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र के अनुसार, जिले के मेप्पडी के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद कई भूस्खलन हुए हैं जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका पैदा हो गयी है.

सूत्र ने बताया कि बचावर्किमयों को नदियों और कीचड़ से लोगों के अंग बरामद हो रहे हैं, इसलिए इस त्रासदी में मारे गए लोगों की सही संख्या का पता लगाना मुश्किल है. सूत्र ने बताया कि यह स्पष्ट नहीं है कि जो अंग मिल रहे हैं, वे एक ही व्यक्ति के हैं या कई व्यक्तियों के हैं. उसने बताया कि मृतकों में कई महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं और उनकी पहचान तथा पोस्टमार्टम के लिये के लिये शवों को विभिन्न अस्पतालों के मुर्दाघरों में ले जाया जा रहा है.

अधिकारियों ने बताया कि भूस्खलन प्रभावित इलाकों में मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टमाला और नूलपुझा गांव शामिल हैं. केरल सरकार ने भूस्खलन में लोगों की मौत के बाद प्रदेश में दो दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है. मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि राज्य सरकार इस घटना से बहुत दुखी है जिसमें कई लोगों की जान चली गयी है और संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. मुख्य सचिव वी. वेनू द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना में 30 और 31 जुलाई को राजकीय शोक घोषित किया गया है. प्रोटोकॉल के अनुसार, इन दो दिनों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और सभी सरकारी कार्यक्रमों को रद्द किया जाएगा.

बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. भारतीय सेना भी बचाव अभियान में शामिल हो गयी है. राज्य सरकार ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के अलावा पुलिस तथा दमकल र्किमयों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया है. लोग फोन पर मदद की गुहार लगा रहे हैं और बचावकर्मी मलबे से लोगों को निकालने की कोशिशों में जुटे हैं.

टेलीविजन चैनलों ने कई लोगों की फोन पर बातचीत प्रसारित की जिसमें वे रो रहे थे और किसी से आकर उन्हें बचाने का अनुरोध कर रहे थे, क्योंकि वे या तो अपने घरों में फंस गए या पुलों के बह जाने तथा सड़कों के जलमग्न होने के कारण उनके पास वहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है. भूस्खलन में घायल हुए कई लोगों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

मेप्पडी जिले में एक छोटे व भीड़भाड़ वाले स्वास्थ्य केंद्र में फर्श पर पंक्ति में रखे गए शवों में रोते-बिलखते लोगों को अपने प्रियजनों को खोजते हुए देखा गया. कुछ लोग अपने प्रियजनों के शवों को देखकर फूट-फूटकर रोने लगे जबकि कुछ लोगों ने अपने रिश्तेदारों को मृतकों में न पाकर राहत की सांस ली.

भूस्खलन से प्रभावित एक गांव के भयावह दृश्यों में से एक में, कीचड़ से लथपथ एक व्यक्ति को अपनी जान बचाने के लिए बाढ़ के पानी के तेज बहाव में एक विशाल चट्टान से चिपककर खड़े होने की कड़ी मशक्कत करते हुए देखा गया. असहाय स्थानीय निवासियों ने प्राधिकारियों से उसे तुरंत बचाने का अनुरोध किया. इस बीच, केरल सरकार ने बचाव अभियान में रक्षा बलों की मदद मांगी है. 122 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) मद्रास की सेकेंड-इन-कमांड के नेतृत्व में 43 र्किमयों की एक टीम को बचाव प्रयासों में सहायता के लिए तैनात किया गया है.

रक्षा सुरक्षा कोर (डीएससी) केंद्र, कन्नूर और कोझिकोड से प्रादेशिक सेना के 200 सैनिकों की अतिरिक्त टुकड़ियों, चिकित्सा दलों और  उपकरणों को बचाव प्रयासों में लगाया गया है. फंसे हुए लोगों को तेजी से निकालने के लिए सुलूर के वायु सेना स्टेशन से भारतीय वायु सेना के दो हेलीकॉप्टर को प्रभावित इलाके में भेजा गया है. केरल सरकार के अनुरोध पर एझीमाला नौसैन्य अकादमी से नौसेना का एक दल भी बचाव प्रयासों में मदद करेगा.

वायनाड में भूस्खलन से प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए बहु-आयामी बचाव अभियान चलाया जा रहा है.
केरल के मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान में बताया कि पिनरायी विजयन के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) कार्तिकेयन को बचाव अभियानों के साथ समन्वय करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. इसमें कहा गया है कि इस संबंध में स्थानीय स्वशासन विभाग के प्रधान निदेशक वी. संबाशिव राव को विशेष अधिकारी नियुक्त किया गया है. वह वायनाड से काम करेंगे. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भूस्खलन की घटनाओं में लोगों की मौत पर दुख व्यक्त किया और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को संकट से निपटने के लिए केंद्र से हर संभव मदद का आश्वासन दिया.

मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”वायनाड में कुछ जगहों पर भूस्खलन की खबर से व्यथित हूं. मेरी संवेदनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रियजन को खोया है और जो घायल हुए हैं, मैं उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं. प्रभावित लोगों की मदद के लिए बचाव अभियान जारी है.” मोदी ने लिखा, ”केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन से बात की और वहां उत्पन्न स्थिति के मद्देनजर केंद्र से हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया.” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री विजयन से बात कर भूस्खलन प्रभावित वायनाड के हालात का जायजा लिया. उन्होंने विजयन को स्थिति से निपटने के लिए केरल को केंद्र की तरफ से हर संभव मदद का भरोसा भी दिलाया.

मुख्यमंत्री विजयन ने लोगों से एकजुट होकर बर्बाद जीवन को फिर से बनाने का आग्रह किया

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने वायनाड जिले में भूस्खलन से 93 लोगों की मौत व 128 लोगों के घायल होने का जिक्र करते हुए मंगलवार को लोगों से आग्रह किया कि जिस तरह वे 2018 में आई बाढ़ के बाद बर्बाद जिंदगियों को फिर से बनाने के लिए एकजुट हुए थे ठीक उसी तरह दोबारा से एकजुट हो जाएं.

विजयन ने कहा हालांकि कई लोग मदद की पेशकश कर रहे हैं लेकिन प्रभावित क्षेत्रों व जीवन को पुनस्र्थापित करने के लिए और अधिक मदद की आवश्यकता है. उन्होंने सभी से मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में योगदान देने का आग्रह किया. विजयन ने कहा कि पहला भूस्खलन देर रात करीब दो बजे हुआ और उसके बाद तड़के साढ़े चार बजे अगला भूस्खलन हुआ, जिसके परिणामस्वरूप वायनाड के मुंडकाई, चूरलमाला और अट्टामाला क्षेत्रों में बच्चे सहित गांववाले मलबे में फंस गए. उन्होंने कहा कि भूस्खलन उस समय हुआ, जब ग्रामीण सो रहे थे. मुख्यमंत्री ने शाम को यहां संवाददाताओं से कहा कि देर रात हुई घटना के परिणामस्वरूप कई लोग बह गए या मलबे में फंस गए और सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं. उन्होंने कहा कि इस घटना में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गयी.

विजयन ने कहा कि मृतकों में से 34 शवों की पहचान कर ली गई है और 18 शवों को उनके परिवारों को सौंप दिया गया है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिले के पोथुकल गांव में चलियार नदी से 16 शव बरामद किए गए. उन्होंने कहा कि इसके अलावा खोज एवं बचाव अभियान दल ने शवों के टुकड़े भी बरामद किए हैं.

विजयन ने कहा कि भूस्खलन के कारण पहाड़ी जिले के मुंडकाई और चूरलमाला सहित कई जगहों का संपर्क बाकी इलाकों से टूट गया.
उन्होंने कहा, ह्लवेल्लारमाला जीवीएच स्कूल पूरी तरह से जमींदोज हो गया है. वहां से बहने वाली एक नदी अब दो भागों में बटकर बह रही है. मकानों और आजीविका को भारी नुकसान हुआ है.ह्व विजयन ने कहा कि मलबे में फंसे या बहे लोगों को खोजने के प्रयास जारी हैं.

उन्होंने कहा, ”जैसे ही हमें दुर्घटना की जानकारी मिली, हमने बचाव कार्य शुरू कर दिया. राज्य के पांच मंत्री खोज एवं बचाव गतिविधियों का समन्वय और नेतृत्व करने के लिए वायनाड पहुंचे हुए हैं.ह्व विजयन ने कहा, ह्लमंत्रियों की प्रत्यक्ष निगरानी में आवश्यक उपकरणों के साथ बचाव अभियान जारी है. अग्निशमन बल, (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) एनडीआरएफ, पुलिस आदि मिलकर काम कर रहे हैं. सेना की मदद भी तत्काल आधार पर उपलब्ध कराई गई है. सेना और नौसेना की विभिन्न इकाइयां भी बचाव अभियान में शामिल हो रही हैं.ह्व विजयन ने कहा कि अधिकतम लोगों की जान बचाने, घायलों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने तथा अन्य लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

हवाई मार्ग से पहुंचाई गयीं भारी मशीनें और खोजी श्वान, राहत टीमें तैनात

केरल के वायनाड जिले में मंगलवार तड़के हुए भूस्खलन के बाद लोगों की सहायता और मदद पहुंचाने के लिए भारी मशीनों और खोजी कुत्तों की टीमों को हवाई मार्ग से पहुंचाया जा रहा है. साथ ही भारतीय तटरक्षक बल ने अपनी आपदा राहत टीमें भी घटनास्थल पर भेजी हैं. सूत्रों ने बताया कि वायनाड जिले में हुए भीषण भूस्खलन में 123 लोगों की मौत हो गई है.

रक्षा मंत्रालय ने एक ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आज (मंगलवार) तड़के वायनाड में जब दुखद आपदा आई, तब भारतीय सशस्त्र बलों ने तुरंत कार्रवाई की और बचाव कार्य शुरू करने के लिए 300 सैन्य र्किमयों को भेजा. दिन भर में बचाव व राहत प्रयासों में सहायता के लिए सेना, नौसेना की टीमों और वायु सेना के हेलीकॉप्टरों की अतिरिक्त टुकड़ियां भेजी गईं.” उन्होंने कहा, “सभी संभव प्रयास जारी हैं. अतिरिक्त सैनिक, भारी मशीनें, खोजी कुत्तों की टीम और अन्य आवश्यक राहत सामग्री को त्रिवेंद्रम, बेंगलुरु और दिल्ली से सेवा विमानों द्वारा पहुंचाया जा रहा है.” इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से बात कर भूस्खलन प्रभावित वायनाड में सेना इकाइयों द्वारा चलाए जा रहे बचाव एवं राहत कार्यों का जायजा लिया.

इसबीच रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) जिला मुख्यालय (केरल और माहे) और आईसीजी स्टेशन बेपोर ने केरल के वायनाड में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में आपदा राहत दल भेजे हैं. बयान के मुताबिक, इन उच्च प्रशिक्षित आईसीजी र्किमयों और सर्मिपत चिकित्सा र्किमयों से युक्त आपदा राहत दल को आपदा प्रभावित समुदायों को तत्काल राहत और सहायता प्रदान करने के लिए तैनात किया गया है.

बयान में बताया गया कि इन दलों को आवश्यक आपदा राहत सामग्री जैसे कि बचाव कार्यों के लिए रबर की हवा भरी नावें; पानी और जल निकासी की समस्याओं का प्रबंधन करने के लिए डीजल से चलने वाले पंप; सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट; प्रतिकूल मौसम की स्थिति में र्किमयों की सुरक्षा के लिए रेनकोट और गम बूट और मलबे को साफ करने और प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए मिट्टी साफ करने वाले अन्य उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं.

बयान के मुताबिक, “आईसीजी ने प्रभावित आबादी की सहायता के लिए खाद्य सामग्री, पेयजल और अन्य आवश्यक आपूर्ति भी भेजी है. कुशल सहायता वितरण सुनिश्चित करने के लिए इन आपूर्तियों के वितरण का तालमेल जिला आपदा प्रबंधन टीम के साथ किया जा रहा है. आईसीजी इस आपदा के असर को कम करने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है.”

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