
पटना/भुवनेश्वर/मिर्जापुर. बिहार में पिछले 24 घंटे में लू लगने से 10 मतदान र्किमयों सहित 14 लोगों की मौत हो गई. अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि अधिकतर मौतें भोजपुर में हुईं, जहां चुनाव ड्यूटी पर तैनात पांच अधिकारियों की लू लगने से मौत हो गई.
बयान में कहा गया है कि रोहतास में तीन चुनाव अधिकारियों की मौत हो गई, जबकि कैमूर और औरंगाबाद जिलों में एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई. इसमें कहा गया है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में चार अन्य लोगों की मौत हो गई. बयान में कहा गया है कि मृतकों के परिवारों को अनुग्रह राशि देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. राज्य भीषण गर्मी की चपेट में है, क्योंकि कई जगहों पर पारा 43 डिग्री सेल्सियस पार कर गया है. शुक्रवार को औरंगाबाद साथ सबसे गर्म स्थान रहा जहां अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. भीषण गर्मी के कारण सभी स्कूल, कोचिंग संस्थान और आंगनवाड़ी केंद्र 8 जून तक बंद कर दिए गए हैं.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को स्थिति से निपटने के लिए एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, कुमार ने निर्देश दिया कि राज्य भर में आम लोगों की सुरक्षा के लिए हर स्तर पर व्यवस्था की जाए.
बयान में कहा गया है, “सभी जिलों में जगह-जगह पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए. लोगों को लू के लक्षण और बचाव के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए. बीमार होने पर सभी को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए. लू से प्रभावित लोगों का अस्पताल/मेडिकल कॉलेज में तुरंत इलाज किया जाना चाहिए.” बयान में कहा गया है, “मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि गांव हो या शहर, कहीं भी अनावश्यक बिजली कटौती नहीं होनी चाहिए. गांवों के साथ-साथ शहरों में भी बिजली की समुचित आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए.”
बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “जब विपक्ष के दबाव के कारण सरकारी स्कूल पहले ही बंद हो चुके हैं, तो शिक्षकों को इस भीषण गर्मी में स्कूल आने के लिए क्यों कहा जा रहा है? जब छात्र ही स्कूल नहीं आएंगे, तो शिक्षक क्या करेंगे? इस भीषण गर्मी में शिक्षकों को छुट्टी दी जानी चाहिए.” बिहार में लोकसभा की 40 सीट के लिए सात चरणों में चुनाव हो रहे हैं, जिनमें से आठ सीट पर शनिवार को मतदान होगा.
ओडिशा सरकार ने लू से पांच लोगों की मौत होने की पुष्टि की, 18 अन्य मामलों की जांच जारी
ओडिशा सरकार ने शुक्रवार को इस बात की पुष्टि की कि राज्य में अब तक लू लगने से पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि गर्मी से संबंधित बीमारी के कारण 18 अन्य लोगों की मौत होने की जांच की जा रही है. ओडिशा के विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) सत्यब्रत साहू के अनुसार, बालासोर, ढेंकनाल, मयूरभंज, सोनपुर और बोलनगीर में एक-एक मौत की पुष्टि हुई है. इसके अलावा, सरकार को संदिग्ध रूप से लू लगने के कारण 18 लोगों की मौत होने की जानकारी मिली है, जिसमें से 12 मौत सुंदरगढ. जिले में और झारसुगुड़ा जिले में छह लोगों की मौत होने की सूचना प्राप्त हुई है.
सुंदरगढ. के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट आशुतोष कुलकर्णी ने बताया कि वर्तमान में राउरकेला के एक निजी अस्पताल में लू की चपेट में आए 10 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि सरकारी अस्पताल में 23 लोग भर्ती है. उन्होंने बताया कि सभी की हालत स्थिर है. झारसुगुड़ा के मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी जयकृष्ण नायक ने बताया कि जिले में अप्राकृतिक मौत के छह मामले सामने आए हैं. उन्होंन कहा कि यह पता लगाने के लिये इन शवों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है कि क्या इनलोगों की मौत लू की चपेट में आने से हुई हैं .
स्वास्थ्य निदेशक नीलकंठ मिश्रा ने मौत की जांच के लिए राउरकेला में एक विशेष टीम भेजने का एलान किया है. जिला प्रशासन को इन मौतों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत व्यस्त समय के दौरान श्रमिकों को काम पर न लगाने की सख्त चेतावनी दी गई है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने राज्य में तीन जून तक लू चलने का अनुमान जताया है. इसी के मद्देनजर सत्यब्रत साहू ने निवासियों, विशेषकर अविभाजित संबलपुर, सुंदरगढ., बोलनगीर, कालाहांडी और बौध जिलों में रहने वाले लोगों से चरम घंटों के दौरान घर के अंदर रहने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि तटीय क्षेत्रों में भी गर्म और आर्द्र मौसम की स्थिति रहने की संभावना है.
मिर्जापुर में बुखार की शिकायत के बाद 13 चुनावर्किमयों की मौत:मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य
मिर्जापुर में लोकसभा चुनाव के लिए ड्यूटी पर तैनात 13 चुनावर्किमयों की शुक्रवार को तेज बुखार और उच्च रक्तचाप की शिकायत के बाद मेडिकल कॉलेज में मौत हो गयी जबकि 23 अन्य चुनावर्किमयों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. यहां स्थित मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इन सभी र्किमयों की मौत के सटीक कारण का पता भी नहीं चल सका है.
मिर्जापुर स्थित मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजबहादुर कमल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि मृतकों में सात होमगार्ड जवान, तीन सफाई कर्मचारी, सीएमओ कार्यालय में तैनात एक लिपिक, एक चकबंदी अधिकारी और होमगार्ड टीम का एक चपरासी शामिल है. उन्होंने बताया कि जब ये मरीज जब मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराए गए तो उन्हें तेज बुखार, उच्च रक्तचाप और बढ़ी हुई शुगर की शिकायत थी.
डॉ. कमल ने कहा, ”13 मृतकों में से चार को मृत अवस्था में लाया गया था. इन चार में से दो होमगार्ड के जवान थे. मरने वाले कुल सात होमगार्ड जवानों में से पांच की मौत 20-25 मिनट के अंतराल में अस्पताल लाए जाने के बाद हुई. मृतक होमगार्ड 50-55 साल की उम्र के थे.” उन्होंने बताया कि अभी अस्पताल में 23 चुनावकर्मी भर्ती हैं, जिनमें से एक पीएसी का जवान, एक अग्निशमन सेवा का जवान और एक पुलिस का जवान है.
उन्होंने कहा, ”इन सभी मरीजों को तेज बुखार, उच्च रक्तचाप और बढ़ी हुई शुगर की शिकायत थी. लगभग सभी का रक्तचाप और शुगर का स्तर अधिक था. ज्यादातर होमगार्ड एक से अधिक बीमारी के शिकार थे.” प्राचार्य के मुताबिक, मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलेगा.



