असम में बाल विवाह के खिलाफ अभियान में 2,278 लोग गिरफ्तार

‘देर रात दो बजे दरवाजे पर दस्तक हुई’ : असम की बालिका वधू ने मुहिम पर कहा

गुवाहाटी/मोरीगांव. असम पुलिस ने लगातार तीसरे दिन राज्य में बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी और गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की संख्या रविवार को बढ़कर 2,278 हो गई. पुलिस ने एक बयान में कहा कि गिरफ्तारियां राज्यभर में दर्ज 4,074 प्राथमिकियों के आधार पर की गईं.

बयान में कहा गया कि बिश्वनाथ में कम से कम 139, बारपेटा में 130 और धुबरी में 126 व्यक्तियों को पकड़ा गया है. इसमें कहा गया कि अन्य जिले जहां 100 से अधिक गिरफ्तारियां की गई हैं, उनमें बक्सा (123) और बोंगईगांव तथा होजाई (117) शामिल हैं.
धुबरी में बाल विवाह के खिलाफ सबसे अधिक 374 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई. वहीं, होजाई में 255 और मोरीगांव में 224 मामले दर्ज किए गए.

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शनिवार को कहा था कि राज्य पुलिस द्वारा बाल विवाह के खिलाफ शुरू किया गया अभियान 2026 में अगले विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा. राज्य सरकार के अनुसार, 14 वर्ष से कम आयु की लड़कियों से शादी करने वालों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा और जिन्होंने 14-18 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों से शादी की है उनके खिलाफ बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत मामले दर्ज किए जाएंगे.

शर्मा ने कहा कि नाबालिगों की शादी में शामिल माता-पिता को फिलहाल नोटिस देकर छोड़ा जा रहा है और गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि 14 साल से कम उम्र की लड़कियों से शादी करने वाले पुरुषों पर गैर-जमानती आरोप लगाए जाएंगे, जबकि 14 से 16 साल की उम्र की लड़कियों से शादी करने वालों पर जमानती धाराओं के तहत आरोप लगाए जाएंगे.

असम के मंत्रिमंडल ने हाल ही में 14 साल से कम उम्र की लड़कियों से शादी करने वाले पुरुषों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया कि 14-18 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों से विवाह करने वालों के खिलाफ बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत मामले दर्ज किए जाएंगे.

इसने निर्णय लिया कि आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा और विवाह को अवैध घोषित किया जाएगा तथा यदि वर की आयु 14 वर्ष से कम है तो उसे सुधार गृह भेजा जाएगा. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की रिपोर्ट के अनुसार, असम में मातृ और शिशु मृत्यु दर काफी अधिक है, जिसका प्राथमिक कारण बाल विवाह है. एनएफएचएस के अनुसार, राज्य में औसतन 31 प्रतिशत विवाह प्रतिबंधित आयु वर्ग में होते हैं.

‘देर रात दो बजे दरवाजे पर दस्तक हुई’ : असम की बालिका वधू ने मुहिम पर कहा

असम के मोरीगांव जिले की निम्मी (बदला हुआ नाम) की आंखों में मां बनने की खुशी की चमक नहीं, बल्कि डर, असुरक्षा का भाव और भविष्य में पेश आने वाली मुश्किलों की चिंता दिखाई देती है. वहीं, रेजिना खातून (बदला हुआ नाम) की आंखों में एक खालीपन नजर आता है. वह बस इसी ख्याल में डूबी हुई है कि आखिर उस पर दुखों का पहाड़ क्यों टूट पड़ा, जिसने उसकी खुशहाल दुनिया को झकझोर कर रख दिया है.

निम्मी उन हजारों बालिका वधुओं में से एक है, जिसके पति को असम पुलिस ने बाल विवाह के खिलाफ पिछले दो दिनों से जारी राज्यव्यापी मुहिम के तहत गिरफ्तार किया है. वहीं, रेजिना के बेटे ने एक नाबालिग से प्रेम विवाह किया था, जिस कारण अब वह जेल की सलाखों के पीछे है. बाल विवाह के खिलाफ मुहिम के तहत पुलिस ने शनिवार तक 2,258 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें शादी कराने वाले हिंदू पुजारी और मुस्लिम मौलवी भी शामिल हैं. पुलिस ने कहा कि कुल 8,000 आरोपियों की सूची तैयार की गई है.

राज्य कैबिनेट द्वारा 23 जनवरी को बाल विवाह के आरोपियों को गिरफ्तार करने और इस कुरीति के खिलाफ व्यापक मुहिम एवं जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किए जाने के एक पखवाड़े से भी कम समय में पुलिस ने बाल विवाह के 4,074 मामले दर्ज किए हैं. निम्मी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘बृहस्पतिवार को देर रात करीब दो बजे दरवाजे पर दस्तक हुई. हमने दरवाजा खोला और बाहर पुलिसवालों को देखा. वे मेरे पति को अपने साथ ले गए.’’ निम्मी की आवाज में बेबसी झलक रही थी और उसकी गोद में उसका डेढ़ महीने का बेटा रो रहा था.

17 वर्षीय निम्मी गोपाल बिस्वास (बदला हुआ नाम) को पसंद करती थी. उसने लगभग एक साल पहले 20 वर्षीय गोपाल से शादी कर ली थी. दोनों ने अपना परिवार शुरू किया. गोपाल गांव के चौराहे पर पकौड़े और अन्य पकवान बेचकर गुजर-बसर कर रहा था.
प्रभावित लोगों के नाम उनकी सुरक्षा के मद्देनजर बदले गए हैं.

गोपाल का बड़ा भाई युधिष्ठिर (बदला हुआ नाम) भी उसी इलाके में अपने बूढ़े मां-बाप के साथ रहता है. उसने कहा, ‘‘हम अपने परिवार के लिए मुश्किल से रोजी रोटी का जुगाड़ कर पाते हैं. हम निम्मी और उसके बेटे को कैसे पाल पाएंगे? वह कुछ बेसुध हो गई है. मुश्किल से कुछ खाती है. बच्चा भी बीमार हो गया है.’’ रेजिना के बेटे रजिबुल हुसैन (बदला हुआ नाम) को बृहस्पतिवार सुबह करीब छह बजे उसके घर से पकड़ा गया. इसके चंद मिनट पहले ही वह केरल से अपने बीमार चाचा को लेकर अपने पिता के साथ घर लौटा था.

रेजिना ने कहा कि कोई सुनने को तैयार नहीं है. उसने दावा किया, ‘‘मेरी बहू की उम्र शादी की वैध उम्र से कम नहीं है, लेकिन आधार कार्ड में कुछ गलती के कारण मेरा बेटा अब जेल में है. वह (बहू) अपना जन्म प्रमाणपत्र लाने के लिए अपने पैतृक घर गई है, जो यहां से कुछ ही दूर है.’’ रेजिना के एक पड़ोसी ने दावा किया कि रजिबुल की पत्नी की तरह कई लड़कियां शादी के समय वास्तव में नाबालिग नहीं थीं, लेकिन आधार कार्ड के लिए नामांकन करते समय उनकी जन्मतिथि गलत दर्ज की गई थी.

उसने दावा किया, ‘‘उम्र का आंकड़ा पुलिस ने ज्यादातर स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से लिया है, जिनके पास आधार कार्ड के आधार पर जानकारी है. अब, हम मूल जन्म रिकॉर्ड हासिल करने में इन लड़कियों की मदद कर रहे हैं, ताकि उनके पतियों को जमानत मिल सके.’’ जहां कुछ बालिका वधुओं को अपने परिवारों से मदद और समर्थन मिल रहा है, तो वहीं रिया देवी (बदला हुआ नाम) जैसी कई लड़कियां अपने पतियों की गिरफ्तारी के बाद प्राधिकारियों के रहम पर निर्भर हैं.

सरकार द्वारा संचालित आश्रय गृह में अस्थायी रूप से रह रही 16 वर्षीय रिया ने कहा, ‘‘हमारा कोई और परिवार नहीं है, क्योंकि हमने भागकर शादी की थी. अब मैं यहां से अपनी एक साल की बेटी के साथ कहां जाऊं?’’ एक अन्य शरणार्थी रूपा दास (बदला हुआ नाम), जो 16 साल की है और नौ महीने की गर्भवती है, ने भी यही अनिश्चितता साझा की. उसने कहा, ‘‘मेरे पति को रिहा करो. हमने सहमति से शादी की थी. अगर वह मेरे पास नहीं होगा, तो मैं क्या करूंगी.’’ राज्य के समाज कल्याण विभाग में लिंग विशेषज्ञ परिमिता डेका, रिया और रूपा जैसी लड़कियों की मदद कर रही हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘बाल विवाह के खिलाफ अभियान स्वागत योग्य है. लेकिन अब इन लड़कियों के प्रति भी हमारी जिम्मेदारी है.’’ डेका ने कहा, ‘‘इनमें से अधिकतर खुद अभी बच्ची हैं. हमें उनसे संवेदनशीलता से निपटना होगा और उनके भविष्य को सुरक्षित करना होगा.’’ राज्य में बाल विवाह बड़े पैमाने पर होते हैं, लेकिन लोग इसे प्रतिबंधित करने वाले कानूनों से पूरी तरह से अनभिज्ञ नहीं थे.

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा है कि बाल विवाह के खिलाफ अभियान 2026 में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, असम में मातृ और शिशु मृत्यु दर अत्यधिक है और इसके लिए बाल विवाह मूल कारण है, क्योंकि राज्य में पंजीकृत विवाहों में से औसतन 31 प्रतिशत निषिद्ध आयु वर्ग में हुए हैं.

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