नोएडा के सेक्टर-94 स्थित सुपरनोवा सोसाइटी की 43वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने वाला संभव जैन गुरुग्राम के मानेसर का रहने वाला था। वह यहां मानेसर के सेक्टर-1 स्थित आईएमटी व्यू सीजीएचएस जीएच-52 सोसाइटी में टॉवर ए परिवार के साथ रहता था।
नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर संभव जैन की खुदकुशी के मामले में पुलिस की जांच में उसके पारिवारिक और आर्थिक जीवन से जुड़े पहलू सामने आ रहे हैं। पुलिस के मुताबिक संभव की शादी वर्ष 2024 में हुई थी। शादी के बाद पत्नी को समय से पहले संतान हुई थी। बच्चे और पत्नी के इलाज में करीब 35 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है।
इसके बाद दंपती के बीच संबंधों में तनाव बढ़ गया था और तलाक की प्रक्रिया चलने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि संभव बृहस्पतिवार को गुरुग्राम स्थित घर से निकले थे। इसके बाद वह कहां-कहां गए और किन परिस्थितियों में नोएडा पहुंचा, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
शनिवार को हादसे की सूचना मिलते ही उसके पिता व अन्य लोग नोएडा रवाना हो गए। सोसाइटी के एक निवासी ने बताया कि संभव जैन का परिवार बीते 4-5 साल से यहां रह रहा है। संभव आईटी कंपनी में नौकरी करते थे। संभव के पिता विनय कुमार जैन भी निजी कंपनी में काम करते हैं। संभव की शादी लगभग साढ़े 3 साल पहले हुई थी। फिलहाल उसकी पत्नी अपने छह महीने के बेटे के साथ यहां से कहीं अलग रहती है।
नोएडा में सेक्टर-94 स्थित सुपरनोवा की स्पायरा बिल्डिंग में शनिवार को हुए हादसे के संबंध में कुछ और रोंगटे खड़े कर देने वाले विवरण सामने आए हैं। 42वीं मंजिल की बालकनी की रेलिंग के बाहर लटके सॉफ्टवेयर इंजीनियर संभव जैन को बचाने के लिए एसी रिपेयरिंग स्टाफ समेत चार लोगों ने पूरी ताकत झोंक दी थी।
वजन अधिक होने के कारण चारों की पकड़ फिसल गई। जिसके कुछ क्षणों बाद संभव ने छलांग लगा दी। चार लोगों की आंखों के सामने हुई इस घटना से वहां मौजूद लोग सहम गए। पुलिस के मुताबिक शनिवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे एसी रिपेयरिंग का काम कर रहे कर्मचारियों की नजर बालकनी की तरफ गई। उन्होंने संभव को रेलिंग के बाहर लटका देखा। उसकी स्थिति देखकर कर्मचारियों ने उसे समझाना शुरू किया। उन्होंने नीचे नहीं कूदने और वापस अंदर आने के लिए कहा। उस समय वहां मौजूद लोगों ने उसे पकड़कर ऊपर खींचने की कोशिश की।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, संभव को बचाने के लिए चार लोगों ने प्रयास किया। चारों ने उन्हें पकड़ लिया और ऊपर खींचने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान संभव देर तक रेलिंग के बाहर लटके रहे। बचाने वाले लोग लगातार समझाते रहे। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान संभव ने वहां मौजूद लोगों से बातचीत भी की। कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि उसे सुरक्षित अंदर खींच लिया जाएगा। हालांकि, प्रयास के दौरान उसका वजन अधिक होने के कारण बचाने वालों की पकड़ कमजोर पड़ गई और वह उनके हाथ से फिसल गया। इसके बाद वह नीचे जा गिरा। उसका शरीर दो टुकड़ों में बंट गया था।
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