
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में नए निजी निवेश के कथित तौर पर 20 साल के निचले स्तर पर पहुंचने पर सोमवार को चिंता जताई और आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में ‘बिना सोचे समझे नीति परिवर्तन’ होने और भय के माहौल से देश को नुकसान हुआ है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि ”मोदी-निर्मित अन्याय काल” में हर दिन आर्थिक विफलता का एक नया रिकॉर्ड बन रहा है.
रमेश ने एक बयान में कहा, ”हम पहले ही 45 साल की उच्च बेरोजगारी दर, 50 साल की सबसे कम घरेलू बचत दर और वास्तविक ग्रामीण खपत में पहली बार कमी देख चुके हैं. अब, हमारे पास एक और परेशान करने वाला तथ्य है. ‘द हिंदू’ (अंग्रेजी अखबार) की रिपोर्ट है कि इस 2023/24 वित्तीय वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में कॉरपोरेट द्वारा घोषित ताजा निवेश केवल 44,000 करोड़ रुपये है, यह 20 साल का निचला स्तर है.”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह के कार्यकाल की तुलना ‘नॉन-बायोलॉजिक प्रधानमंत्री के कार्यकाल से करते हैं तो पता चता है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के समय जीडीपी के प्रतिशत के रूप में निवेश (समय के साथ औसत) 33.4 प्रतिशत और ‘अन्याय काल’ में 28.7 प्रतिशत रहा.” रमेश के मुताबिक, मनमोहन सिंह के नेतृत्व में जीडीपी के प्रतिशत के रूप में एफडीआई 2004 में 0.8 प्रतिशत से बढ़कर 2014 में 1.7 प्रतिशत हो गया तथा 2022 तक यह अब 1.5 प्रतिशत रहा. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में ‘बिना सोचे समझे नीति परिवर्तन’ होने और भय के माहौल से देश को नुकसान हुआ है.
मोदी सरकार के ‘मित्रवादी पूंजीवाद’ से मिला कुछ कंपनियों को लाभ : कांग्रेस
कांग्रेस ने सोमवार को मोदी सरकार पर ‘मित्रवादी पूंजीवाद’ का आरोप लगाया और कहा कि कंपनियों को विस्तार करना चाहिए, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है कि किसी कंपनी का एकाधिकार न हो और सत्ता तक पहुंच का किसी को अनुचित लाभ न मिले.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने यह आरोप भी लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी की निगरानी में बाजार का संकेंद्रण लगातार बढ. रहा है और दूरसंचार, विमानन, सीमेंट, इस्पात और टायर जैसे प्रमुख उद्योगों में यह नई ऊंचाई पर पहुंच गया है. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक खबर साझा की जिसमें दावा किया गया है कि भारत के प्रमुख उद्योगों में बाजार संकेंद्रण में वृद्धि जारी रही, क्योंकि शीर्ष कंपनियों ने 2023-24 में विकास या अधिग्रहण के माध्यम से कारोबार का बड़ा हिस्सा हासिल कर लिया.
रमेश ने आरोप लगाया, ”मित्रवादी पूंजीवाद ‘नॉन बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री” की बुनियादी आर्थिक नीति है. मोदी जी की देखरेख में बाजार का संकेंद्रण लगातार बढ. रहा है और यह दूरसंचार, विमानन, सीमेंट, इस्पात और टायर जैसे प्रमुख उद्योगों में नई ऊंचाई पर पहुंच गया है.” उन्होंने कहा, ”पिछले दो वर्षों में सभी उद्योगों में शीर्ष दो कंपनियों का राजस्व हिस्सा बढ.ा है. भारत में ज्यादातर उद्योग या तो मध्यम या अत्यधिक केंद्रित हैं.”
रमेश के अनुसार, जैसा कि रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर और प्रसिद्ध वित्तीय अर्थशास्त्री विरल आचार्य ने स्थापित किया था, अडाणी समूह सहित पांच बड़े समूह 40 ऐसे क्षेत्रों में एकाधिकार बना रहे हैं. उन्होंने कहा, ”कंपनियों को विस्तार करना चाहिए. लेकिन साथ ही, सरकार की यह सुनिश्चित करने की ज.म्मिेदारी है कि प्रतिस्पर्धा को दबाया न जाए, अल्पाधिकार या एकाधिकार उभर कर सामने न आए, अधिग्रहण स्वतंत्र और निष्पक्ष हो तथा सत्ता तक पहुंच से अनुचित लाभ न मिले.”
क्या प्रधानमंत्री युद्ध के दलदल में फंसे भारतीय युवाओं की रूस से वापसी सुनिश्चित करेंगे: कांग्रेस
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रूस दौरे के बीच सोमवार को सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री उन भारतीय युवाओं की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित करेंगे जो वहां युद्ध के दलदल में फंस गए हैं. यूक्रेन में संघर्ष के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शिखर वार्ता के लिए प्रधानमंत्री रूस के दौरे पर गए हैं. रवाना होने से पहले उन्होंने सोमवार को कहा कि भारत शांतिपूर्ण और स्थिर क्षेत्र के लिए सहयोगात्मक भूमिका निभाना चाहता है. यह 2019 के बाद से मोदी की रूस की पहली यात्रा है. फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की शुरुआत के बाद से भी यह भारतीय प्रधानमंत्री की रूस की पहली यात्रा है.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”दशकों से कांग्रेस सरकारों की समझदारी से भरी कूटनीतिक और रणनीतिक पहल के कारण भारत के रूस के साथ अच्छे संबंध विरासत में मिले हैं. प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह ने 10 वर्षों में (भारत या रूस में) व्लादिमीर पुतिन और दिमित्री मेदवेदेव (रूस के दो राष्ट्रपति जो मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान थे) से 16 बार मुलाक.ात की थी. तुलनात्मक रूप से देखें तो, 10 वर्षों के कार्यकाल के बाद राष्ट्रपति पुतिन के साथ नरेन्द्र मोदी की यह केवल 11वीं मुलाक.ात है.”
उन्होंने सवाल किया कि क्या उनके कार्यकाल में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को रुकवाने जैसे बड़े-बड़े दावों के बीच दोनों देशों के संबंध उतने गर्मजोशी से भरे नहीं हैं? रमेश ने दावा किया, ”वित्त वर्ष 2014 और वित्त वर्ष 2023 के बीच, रूस को भारत का निर्यात स्थिर सा हो गया है जो 3.17 अरब डॉलर से गिरकर 3.14 डॉलर तक पहुंच गया. इस बीच, आयात बिल तेज.ी से बढ.ा है और यह 6.34 अरब डॉलर से बढ.कर 46.21 अरब डॉलर हो गया. इस तरह का असंतुलित व्यापार संबंध लंबी अवधि में टिकाऊ नहीं है. हमारे घरेलू उद्योग के लिए इसके हानिकारक परिणाम होंगे.”
कांग्रेस नेता ने सवाल किया, ”क्या राष्ट्रपति पुतिन के साथ ”नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री” की बातचीत के एजेंडे में इस व्यापार असंतुलन का सुधार है? दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन को ठीक करने के लिए उनके पास क्या विज.न है?” रमेश ने कहा कि मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के मुताबिक., कम से कम 50 भारतीय नागरिक रूसी सेना में शामिल हुए हैं तथा युद्ध में कम से कम दो व्यक्तियों के मारे जाने की पुष्टि पहले ही की जा चुकी है.



