
नयी दिल्ली/भुवनेश्वर. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जम्मू-कश्मीर में सेना के काफिले पर हुए आतंकवादी हमले को मंगलवार को ‘कायराना हरकत’ करार दिया. उन्होंने कहा कि इस हमले की निंदा और कड़ी जवाबी कार्रवाई की जरूरत है. सोमवार को कठुआ के बदनोटा इलाके में भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने एक गश्ती दल पर घात लगाकर हमला किया था, जिसमें पांच जवान शहीद हो गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे. इस महीने जम्मू संभाग में यह पांचवां आतंकवादी हमला है.
राष्ट्रपति मुर्मू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”मेरी संवेदनाएं उन बहादुरों के परिवारों के साथ हैं जिन्होंने आतंकवाद के खिलाफ चल रही इस लड़ाई में अपना बलिदान दिया है. मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं.” राष्ट्रपति ने कहा, ” जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में सेना के जवानों के काफिले पर आतंकवादियों द्वारा किया गया हमला एक कायरतापूर्ण कृत्य है जिसकी निंदा की जानी चाहिए और इसके लिए कठोर जवाबी कार्रवाई की जानी चाहिए.”
समाज को क्षमताएं प्रदान करने के साथ तकनीकी विकास नयी चुनौतियां भी पैदा कर रहे हैं: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि नए तकनीकी विकास समाज को क्षमताएं प्रदान कर रहे हैं, लेकिन साथ ही वे मानवता के लिए नयी चुनौतियां भी पैदा कर रहे हैं. मुर्मू भुवनेश्वर स्थित राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईएसईआर) के 13वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं.
उन्होंने कहा, ”आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बहुत तेजी से बदलाव हो रहे हैं. विज्ञान के वरदान के साथ-साथ उसके अभिशाप का खतरा भी हमेशा बना रहता है. इसी तरह, नए तकनीकी विकास मानव समाज को क्षमताएं प्रदान कर रहे हैं, लेकिन साथ ही, वे मानवता के लिए नयी चुनौतियां भी पैदा कर रहे हैं.” जीन एडिटिंग को आसान बनाने वाली सीआरआईएसपीआर-सीएएस9 का उदाहरण देते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ”यह तकनीक कई असाध्य बीमारियों के समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम है. हालांकि, इस तकनीक के इस्तेमाल से नैतिक और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी समस्याएं भी पैदा हो रही हैं.”
उन्होंने कहा कि जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में प्रगति के कारण ‘डीप फेक’ की समस्या और कई नियामक चुनौतियां सामने आ रही हैं. राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि एनआईएसईआर विज्ञान की तार्किंकता और परंपरा के मूल्यों को साथ लेकर आगे बढ. रहा है. मुर्मू ने उम्मीद जताई कि अपने पेशे में उपलब्धियों के साथ-साथ छात्र अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों का भी पूरी जवाबदेही के साथ निर्वहन करेंगे.
उन्होंने छात्रों को यह संदेश याद रखने की सलाह देते हुए कहा, ”महात्मा गांधी ने सात सामाजिक पापों को परिभाषित किया है, जिनमें से एक है निर्दयी विज्ञान. यानी मानवता के प्रति संवेदनशीलता के बिना विज्ञान को बढ.ावा देना पाप करने जैसा है.” उन्होंने कहा, ”मौलिक विज्ञान के क्षेत्र में प्रयोग और अनुसंधान के परिणाम प्राप्त करने में अक्सर बहुत समय लगता है. कई बार कई वर्षों तक निराशा का सामना करने के बाद सफलता प्राप्त हुई है.” राष्ट्रपति इस कार्यक्रम के बाद राज्य से रवाना हो गईं. वह ओडिशा की चार दिवसीय यात्रा पर आई थीं. राज्यपाल रघुबर दास और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी उनके साथ हवाई अड्डे तक गए.



