नयी दिल्ली. भारत में इजराइल के राजदूत रियुवेन अजार ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की टिप्पणियों की बुधवार को कड़ी निंदा की और इन्हें ”हास्यास्पद एवं पाखंडपूर्ण” बताया. अजार ने कहा कि जहां खामेनेई अन्य देशों को उपदेश देते हैं, वहीं खुद ईरान पर ही नागरिक स्वतंत्रता को कुचलने और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप है.
इजराइली राजदूत ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”यह वास्तव में हास्यास्पद है कि यह कट्टरपंथी नेता दूसरों को उपदेश देने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वह अपने ही लोगों को मार रहे हैं और उनकी स्वतंत्रता को कुचल रहे हैं, चाहे वह धार्मिक स्वतंत्रता हो या अभिव्यक्ति की आजादी हो. वह मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं, जो पूरी तरह से अपमानजनक है और हम आशा करते हैं कि ईरानी लोग एक दिन खामेनेई द्वारा किए जा रहे ऐसे उत्पीड़न और अत्याचार से मुक्त हो जाएंगे.” खामेनेई ने सोमवार को तेहरान में मौलवियों की एक सभा को संबोधित करते हुए गाजा, म्यांमा और भारत में मुसलमानों की ”पीड़ा” के बारे में बात की थी.
खामेनेई ने ‘एक्स’ पर कहा था, ”…हम खुद को मुसलमान नहीं मान सकते अगर हम म्यांमा, गाजा, भारत या किसी अन्य स्थान पर किसी मुसलमान द्वारा झेली जा रही पीड़ा से अनजान हैं.” भारत ने ईरान के सर्वोच्च नेता द्वारा भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर की गई टिप्पणियों की सोमवार को कड़ी निंदा की थी और इन टिप्पणियों को ”गलत सूचना पर आधारित और अस्वीकार्य” बताया था.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों पर टिप्पणी करने वाले देशों को दूसरों के बारे में कोई भी टिप्पणी करने से पहले अपना ”रिकॉर्ड” देखना चाहिए.
अजार ने लेबनान में पेजर से हुए धमाकों की घटनाओं पर भी संक्षेप में बात की और कहा कि इजराइल सरकार हाल में हिजबुल्लाह के हमलों से विस्थापित हुए नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा, ”हम अमेरिका और अन्य साझेदारों की मदद से एक कूटनीतिक समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं.”