कर्नाटक की लोकप्रिय सरकार को अस्थिर करने का प्रयास, केंद्र के सामने नहीं झुकेंगे: कांग्रेस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 24 Sep 2024 10:18 PM
कर्नाटक की लोकप्रिय सरकार को अस्थिर करने का प्रयास, केंद्र के सामने नहीं झुकेंगे: कांग्रेस
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नयी दिल्ली. कांग्रेस ने भूखंड आवंटन मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की याचिका खारिज किए जाने के बाद मंगलवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार प्रदेश की लोकप्रिय सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है तथा राज्यपाल के कार्यालय का निरंतर दुरुपयोग कर रही है. पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि कांग्रेस झुकने वाली नहीं है और वह केंद्र सरकार के नापाक इरादों के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक दोनों तरह से लड़ाई लड़ेगी.

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने भू आवंटन मामले में उनके विरूद्ध जांच के लिए राज्यपाल द्वारा दी गयी मंजूरी को चुनौती दी थी. मुख्यमंत्री ने मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा (एमयूडीए) पॉश क्षेत्र में उनकी पत्नी को किये गये 14 भूखंडों के आवंटन में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में उनके खिलाफ राज्यपाल थारवरचंद गहलोत द्वारा दी गयी जांच की मंजूरी को चुनौती दी थी.

वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “मोदी-शाह शासन द्वारा राज्यपाल के कार्यालय का लगातार दुरुपयोग हमारे संवैधानिक लोकतंत्र के लिए अत्यधिक चिंता का विषय है. राज्यपाल राज्य सरकारों के रोजमर्रा के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकते, उन्हें संविधान का अक्षरश? पालन करना होगा.” उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक के राज्यपाल एक ऐसे नेता के नेतृत्व वाली लोकप्रिय, जन हितैषी सरकार को अस्थिर करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं जो एक साधारण पृष्ठभूमि से मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचे हैं.
वेणुगोपाल ने कहा कि इस तरह के प्रयास केवल कर्नाटक को दिल्ली से नियंत्रित करने की भाजपा की प्रवृत्ति को दर्शाते हैं और यह कर्नाटक को “दिल्ली दरबार” के सामने घुटने टेकने के लिए मजबूर करने के प्रयास के अलावा और कुछ नहीं है.

उन्होंने कहा, “हमारी एक मजबूत सरकार है जो केवल लोगों की बात सुनेगी, दिल्ली की नहीं. हमारी पार्टी केंद्र सरकार के नापाक इरादों के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक दोनों तरह से लड़ाई लड़ेगी.” उन्होंने तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि के एक बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि रवि ने तटस्थता का मुखौटा उतार दिया है और खुले तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की आवाज में बोल रहे हैं.

वेणुगोपाल ने कहा, “रवि को पता होना चाहिए कि धर्मनिरपेक्षता उस संविधान के मूल सिद्धांतों का हिस्सा है जिसकी रक्षा करने की उन्होंने शपथ ली है. उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि उनके भाजपा-आरएसएस के आका उन्हें चाहे कुछ भी कहें, भारत का समृद्ध बहुसांस्कृतिक लोकाचार सहस्राब्दियों से कायम है और आरएसएस चाहे कुछ भी करने की कोशिश करे, वह नष्ट नहीं होगा. ” उन्होंने कहा, “इतिहास हमें बताता है कि भारत और इसके लोग हमेशा विभाजनकारी राजनीति को अस्वीकार करेंगे और समावेश को अपनाएंगे.” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया, “केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक के राज्यपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और “स्वयंभू चाणक्य” की धुन पर नाच रहे हैं.” उन्होंने कहा कि यह अपमानजनक और भारत के संविधान पर हमला है.

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