
नयी दिल्ली. मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने मंगलवार को कहा कि मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की पहचान चुनाव संबंधी नियमों के अनुसार की जाएगी, लेकिन उनके सांस्कृतिक मूल्यों के उचित सम्मान का ध्यान रखा जाएगा. कुमार ने मतदान केंद्रों पर महिलाओं के हिजाब पहनकर आने से जुड़े विवादों और लोकतांत्रिक अधिकारों बनाम सांस्कृतिक अधिकारों की बहस को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में यह बात कही.
निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की. इस मौके पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा, ”चुनाव संचालन नियम 35 में मतदाताओं की पहचान के बारे में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है और 34 में महिला मतदाताओं के लिए सुविधाओं के बारे में उल्लेख किया गया है. मतदाताओं की पहचान बिल्कुल उन्हीं नियमों के अनुसार की जाएगी, लेकिन क्षेत्र के सांस्कृतिक पहलुओं का पूरा सम्मान और ध्यान रखा जाएगा.”
उन्होंने कहा, ”कुछ मुद्दे हैं जो राजस्थान जैसे अनेक राज्यों में, देश के कई हिस्सों में सामने आते हैं. पहचान नियमों के अनुसार की जाएगी और उस क्षेत्र विशेष के सांस्कृतिक मूल्य का यथासंभव पूरा सम्मान किया जाएगा.” मई में एक वीडियो क्लिप सामने आया था जिसमें हैदराबाद लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार माधवी लता को बुर्का पहने हुए मुस्लिम महिलाओं से उनका चेहरा दिखाने और फोटो पहचान पत्रों से मिलान करते हुए देखा जा सकता था.
मई महीने में ही भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात की और मतदान के समय बुरका पहनकर या चेहरे पर नकाब पहनकर पहुंचीं महिला मतदाताओं का उचित सत्यापन महिला अधिकारियों से कराने की मांग की थी.
एग्जिट पोल पर आत्मनिरीक्षण की जरूरत, मतगणना के दिन शुरुआती रुझान ‘निरर्थक’: राजीव कुमार
मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने समाचार चैनलों द्वारा मतगणना के दिन शुरुआती रुझान दिखाने के चलन को ”निरर्थक” करार देते हुए मंगलवार को कहा कि चैनलों पर रुझान सुबह आठ बजकर 10 मिनट पर ही प्रसारित होने लगते हैं जबकि मतों की गिनती सुबह साढ़े आठ बजे शुरू होती है.
कुमार ने संवाददाताओं से बातचीत में यह भी कहा कि एग्जिट पोल (चुनाव बाद सर्वेक्षण) उम्मीदें बढ़ाकर बहुत बड़ा भटकाव पैदा करते हैं और यह मीडिया, खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए आत्मनिरीक्षण का विषय है. उनका कहना था, ”हम एग्जिट पोल को नियंत्रित नहीं करते हैं, लेकिन आत्मनिरीक्षण की जरूरत है. सैंपल साइज क्या था? सर्वे कहां हुआ? नतीजे कैसे आए ? और अगर मैं उस नतीजे से मेल नहीं खाता तो मेरी क्या जिम्मेदारी है?, इन बातों को सभी को देखने की जरूरत है.” सीईसी ने कहा कि समाचार प्रसारण और डिजिटल मानक प्राधिकरण जैसे संगठनों को कुछ स्व-नियमन करना चाहिए.
उन्होंने एग्जिट पोल का उल्लेख करते हुए कहा, ”मतगणना मोटे तौर पर चुनाव खत्म होने के तीसरे दिन होती है. शाम 6 बजे से उम्मीदें बढ़ जाती हैं, लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.” कुमार ने कहा, ”जब गिनती शुरू होती है, तो परिणाम (मीडिया में) सुबह 8:05 और 8:10 बजे से आना शुरू हो जाते हैं. यह बकवास है. मेरी (वोटों की) गिनती सुबह 8:30 बजे शुरू होती है. मीडिया एग्जिट पोल को सही ठहराने में जुटा है.” सीईसी ने कहा कि चुनाव आयोग अपनी वेबसाइट पर सुबह साढ़े नौ बजे से दो घंटे के अंतराल पर रुझान या नतीजे वेबसाइट पर डालना शुरू कर देता है.
कुमार ने कहा कि मतगणना केंद्रों पर किसी मीडिया संगठन के संवाददाता को परिणाम जल्दी मिल सकते हैं, लेकिन चुनाव अधिकारी को स्क्रीन पर परिणाम प्रर्दिशत करना होगा, मतदान एजेंटों से उस पर हस्ताक्षर करवाना होगा और पर्यवेक्षकों से सत्यापित कराना होता है. उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में आधे घंटे का समय लग जाता है.
चुनाव में अनियमितता पर सीईसी ने कहा, कुछ तो लोग कहेंगे
”कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना.” यह प्रतिक्रिया मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने मंगलवार को तब व्यक्त की जब उन्हें बताया गया कि आलोचक हाल ही में संपन्न हरियाणा विधानसभा चुनाव में मतदान प्रक्रिया के दौरान अनियमितता का आरोप लगा रहे हैं.
कुमार ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”चुनाव दर चुनाव, प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ रही है, हिंसा कम हो रही है और रिकॉर्ड बरामदगी हो रही है. मतदाता स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि उन्हें चुनावी प्रक्रिया में विश्वास है और वे बहुत सहभागी हैं…. इसके अलावा मैं यही कह सकता हूं कि कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना.” निर्वाचन आयोग (ईसी) ने मंगलवार को महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों के अलावा 47 विधानसभा सीट और वायनाड लोकसभा सीट पर उपचुनाव के कार्यक्रम की भी घोषणा कर दी.
हाल ही में हुए जम्मू-कश्मीर चुनाव के बारे में बात करते हुए कुमार ने एक कविता दोहराई जो उन्होंने पहले इस्तेमाल की थी, ”जम्हूरियत के जश्न में आपकी उपस्थिति, दुनिया देखेगी नापाक इरादों के शिकस्त की कहानी.” कुमार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोहे और छंद नियमित रूप से शामिल होते रहे हैं. सीईसी ने इस साल मार्च में सात चरण वाले आम चुनाव की घोषणा करते हुए कहा था, ”अधूरी हसरतों का इल्जाम हर बार हम पर लगाना ठीक नहीं, वफा खुद से नहीं होती, खता ईवीएम की कहते हो, और बाद में जब परिणम आता है तो उसपे कायम भी नहीं रहते.”



