
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने रविवार को कहा कि झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के घोषणापत्र से यह साफ हो गया है कि उसके चुनाव अभियान का एक मात्र मुद्दा ‘ध्रुवीकरण करना और सांप्रदायिकता का वायरस फैलाना’ है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जिन्होंने आज घोषणापत्र जारी किया, और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की भाषा यह स्पष्ट करती है कि भाजपा चुनाव के दौरान केवल ‘कट्टरता के प्रसार, पूर्वाग्रह और धर्म के नाम पर नफरत भड़काने’ पर निर्भर रहेगी.
झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए 13 और 20 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा. रमेश ने यह भी कहा कि भाजपा जाति जनगणना और राज्य के विकास को सुनिश्चित करने की केंद्र सरकार की जिम्मेदारियों के मुद्दे पर ‘चुप’ है. कांग्रेस नेता ने अपने पोस्ट में कहा, ”आज झारखंड के लिए जारी घोषणापत्र से यह स्पष्ट है कि भाजपा के पास चुनाव अभियान के लिए केवल एक मुद्दा है-ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक का वायरस फैलाना.”
उन्होंने कहा, ”घोषणापत्र जारी करने वाले केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के चुनाव अभियान के प्रभारी असम के मुख्यमंत्री की भाषा पूरी तरह स्पष्ट करती है कि भाजपा के पास झामुमो-कांग्रेस नीत राज्य सरकार की बेहद लोकप्रिय एवं प्रभावशाली योजनाओं का कोई जवाब नहीं है.” इससे पहले, एक अन्य पोस्ट में रमेश ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जनता से वोट मांगने से पहले लंबित कोयला ‘रॉयल्टी’ के रूप में झारखंड को 1.36 लाख करोड़ रुपये जारी करने में देरी का हिसाब देना चाहिए.
उन्होंने दावा किया कि झारखंड में कोयला खदानें कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनियों द्वारा संचालित की जाती हैं, जिन पर राज्य सरकार की भारी रकम बकाया है. कांग्रेस नेता ने कहा, ”भूमि मुआवजे का भुगतान न करने के लिए 1,01,142 करोड़ रुपये, ‘सामान्य कारण बकाया’ मद के तहत 32,000 करोड़ रुपये और ‘धुले कोयले की रॉयल्टी’ मद के तहत 2,500 करोड़ रुपये का बकाया है.” उन्होंने भाजपा की झारखंड इकाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वह राज्य के लिए धन आवंटन सुनिश्चित करने में क्यों विफल रही और प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं.
रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”’नॉन बायलॉजिकल’ प्रधानमंत्री इन निधियों को जारी करने में क्यों विफल रहे हैं? क्या झामुमो-कांग्रेस गठबंधन को वोट देने के कारण झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है? राज्य भाजपा नेतृत्व झारखंड के लिए कोई धनराशि सुनिश्चित करने में असमर्थ क्यों है?”
महाराष्ट्र में किसान सबसे ज्यादा उपेक्षित: कांग्रेस
कांग्रेस ने रविवार को महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि यह गठबंधन ‘विश्वासघात’ के आधार पर बना है और राज्य की जनता वादे पूरे नहीं करने के लिए उन्हें माफ नहीं करेगी. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि राज्य में किसान सबसे ज्यादा उपेक्षित हैं, क्योंकि उनसे किए गए बड़े-बड़े वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं.
रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया, ”महायुति एक ऐसी सरकार है जो विश्वासघात पर बनी हुई है – भरोसे से विश्वासघात, विचारधारा से विश्वासघात और स्वयं महाराष्ट्र के लोगों से विश्वासघात पर. किसान इनके राज में सबसे ज्यादा उपेक्षित रहे हैं. सरकार ने उन्हें सिर्फ बड़े-बड़े वादे दिए हैं, हासिल कुछ भी नहीं हुआ है.” कांग्रेस नेता ने कहा, ” जिन लोगों ने जलयुक्त शिवार का वादा किया था, उन्होंने केवल जलमुक्त शिवार ही दिया है. महाराष्ट्र उन्हें माफ नहीं करेगा.” उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2019 में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने मराठवाड़ा से एक जल ग्रिड बनाने के लिए 20,000 से 25,000 करोड़ के पैकेज का वादा किया था. कहा गया था कि इससे हर गांव में पाइप से पीने का पानी पहुंचाया जाएगा.
रमेश ने कहा, ”इस साल र्गिमयों में इस वादे के पांच साल पूरे हो गए – और यह मराठवाड़ा में सबसे अधिक पानी की कमी वाले वर्षों में से एक था. मराठवाड़ा में 600 से अधिक गांव और 178 बस्तियां पीने के पानी की भारी कमी के कारण पानी के टैंकरों पर निर्भर थे.” कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पिछले वर्ष के 40 प्रतिशत की तुलना में जलाशयों में केवल 19 प्रतिशत पीने का पानी बचा था. रमेश ने आरोप लगाया, ”मराठवाड़ा की जीवन रेखा गोदावरी नदी का भी गला घोंट दिया गया है. वर्ष 2022 में इसकी सफाई के लिए 88 करोड़ रुपए कथित तौर पर आवंटित किए गए थे लेकिन पानी की गुणवत्ता में कोई सार्थक सुधार नहीं हुआ.”



