
बेंगलुरु. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने नक्सल रोधी बल (एएनएफ) के साथ मुठभेड़ में माओवादी नेता विक्रम गौड़ा के मारे जाने को बुधवार को उचित ठहराया और कहा कि गौड़ा पर कई आपराधिक मामले दर्ज थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि उसने हथियार डालने और मुख्यधारा में शामिल होने के सरकार के निर्देश की भी अनदेखी की थी.
गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि गौड़ा के पास ”घातक” हथियार थे और मुठभेड़ की जांच की मांग को खारिज कर दिया. परमेश्वर ने यह भी कहा कि अगर एएनएफ ने उसे गोली नहीं मारी होती, तो वह उन सभी (एएनएफ र्किमयों) पर गोली चला देता. सिद्धरमैया ने सोमवार को हुई इस मुठभेड़ के बारे में कुछ ”बुद्धिजीवियों” के संदेह जताने से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा, ”एक स्थायी आदेश है. हमने कहा है कि अगर वे (नक्सली) आत्मसमर्पण करते हैं तो उन्हें सभी सुविधाएं दी जाएंगी. उसने (गौड़ा ने) आत्मसमर्पण नहीं किया. केरल सरकार ने उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, हमारी सरकार ने पांच लाख रुपये इनाम की घोषणा की थी.”
उन्होंने कहा, ”आपको इसकी (मुठभेड़ की) सराहना करनी चाहिए. नक्सलवाद रहना चाहिए या खत्म होना चाहिए?” उडुपी जिले के हेबरी के पास काबिनले इलाके में पीतेबैलु गांव के पास एएनएफ और माओवादियों के एक समूह के बीच कथित गोलीबारी में गौड़ा (46) मारा गया था. अधिकारियों के अनुसार, वह कर्नाटक के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में से एक था जिस पर राज्य में हत्या और जबरन वसूली सहित 61 मामले दर्ज थे, वहीं केरल में 19 मामले दर्ज थे. परमेश्वर ने संवाददाताओं से कहा कि गौड़ा के खिलाफ हत्या के आरोपों सहित 60 से अधिक मामले दर्ज थे.
उन्होंने कहा, ”उसके (गौड़ा के) पास एक मशीन गन जैसा घातक हथियार था. अगर वे (एएनएफ कर्मी) उसे गोली नहीं मारते, तो वह उन पर गोली चला देता. मुझे बताया गया है कि उसे देखते ही गोली मार दी गई. इसलिए, किसी भी चीज पर संदेह करने की जरूरत नहीं है.” परमेश्वर ने कहा, ”…इसलिए कोई जोखिम न उठाते हुए उसको ‘मुठभेड़’ में मार गिराया. आगे की जानकारी मैं विभाग से लिखित में मिलने के बाद साझा कर सकता हूं.” कार्कला से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक वी. सुनील कुमार का यह बयान कि पिछले साल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से नक्सली गतिविधियां बढ. गई हैं, इस पर मंत्री ने कहा कि यह घटना उनके निर्वाचन क्षेत्र कार्कला में ही हुई, जहां एएनएफ का मुख्यालय भी है.
उन्होंने कहा, ”एएनएफ लगातार नक्सली गतिविधियों पर नजर रख रहा था. पंद्रह दिन पहले माओवादी नेता लता और राजू दिखे थे और मुझे इसकी सूचना दी गई. इसलिए आंतरिक सुरक्षा प्रभाग (आईएसडी) ने तलाश अभियान शुरू किया. इस बीच, गौड़ा के बारे में सूचना मिली और उसे मुठभेड़ में मार गिराया गया.” मंत्री ने कहा कि गौड़ा की मौत मामले की जांच की मांग को लेकर कुछ हलको में आवाज उठ रही है लेकिन उन्होंने कहा कि उसके खिलाफ 60 मामले दर्ज हैं और जब उसे मुठभेड़ में मार गिराया गया, उस समय भी उसके पास घातक हथियार थे. उन्होंने कहा, ”मुझे बताइए, किस पहलू से जांच होनी चाहिए? सब कुछ कानून के दायरे में किया गया. जो व्यक्ति हत्याओं में शामिल था, अपने पास स्वचालित मशीन गन जैसे हथियार रखे हुए था, उसे छोड़ा नहीं जा सकता.”



