सोरोस मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष ने लगाया धनखड़ पर आक्षेप: सरकार

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 11 Dec 2024 07:07 PM
सोरोस मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष ने लगाया धनखड़ पर आक्षेप: सरकार

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नयी दिल्ली. विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की ओर से राज्यसभा के सभापति को पद से हटाने के प्रस्ताव संबंधी नोटिस दिए जाने के अगले दिन, बुधवार को सत्ता पक्ष ने जगदीप धनखड़ का जोरदार बचाव किया तथा दावा किया कि जार्ज सोरोस और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के कथित संबंधों के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए विपक्षी दलों ने आसन पर आक्षेप लगाया है.

इन्हीं मुद्दों पर राज्यसभा में जोरदार हंगामा हुआ और एक बार के स्थगन के बाद कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई.
राज्यसभा में हंगामे के बीच सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि सत्तारूढ. गठबंधन के सदस्य पिछले दो दिनों से जार्ज सोरोस और कांग्रेस के वरिष्ठतम सदस्य के संबंधों का मुद्दा उठाने का प्रयास कर रहे हैं और इस मुद्दे से ध्यान भटकाने के उद्देश्य से विपक्ष की ओर से आसन पर आक्षेप लगाने का ‘कुत्सित’ प्रयास किया गया है.

उन्होंने कहा, ”जार्ज सोरोस और सोनिया गांधी का क्या संबंध है? यह देश की आंतरिक और बा’ सुरक्षा का सवाल है. और यह देश की संप्रभुता पर भी प्रश्नवाचक चिह्ल है. प्रमुख विपक्षी दल और जॉर्ज सोरोस के बीच संबंधों की चर्चा होनी चाहिए.” नड्डा ने कहा, ”मुद्दे को भटकाने के लिए इन्होंने एक कुत्सित प्रयास किया है. इन्होंने आसन पर आक्षेप लगा कर अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रयास किया है.” भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष ने दावा किया कि देश की संप्रभुता और उसकी आंतरिक व बा’ सुरक्षा पर जो खतरा है, उसमें कांग्रेस पार्टी का योगदान है.

उन्होंने कहा, ”ये औजार बन कर उनका साथ दे रहे हैं. इस पर चर्चा होनी चाहिए.” नड्डा ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के साथ ही आसन पर जिस तरीके का आक्षेप कांग्रेस ने लगाया है, वह भर्त्सना योग्य है और पूरे सदन को इसकी निंदा करनी चाहिए.
उन्होंने कहा, ”इन्होंने (विपक्ष ने) आसन का कभी सम्मान नहीं किया है, वह चाहे सदन के भीतर हो या सदन के बाहर हो. जिस तरीके की बयानबाजी इन्होंने संवैधानिक पदों पर बैठे हुए लोगों और हमारे आसन के निर्णय पर की है, वह निंदनीय है. देश कभी इन्हें माफ नहीं करने वाला है.”

इससे पहले, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने उच्च सदन में कहा कि यदि उपराष्ट्रपति के पद और उनकी गरिमा पर हमला होगा तो सत्ता पक्ष के लोग बिल्कुल उनका बचाव करेंगे और विपक्ष के इरादे को कामयाब नहीं होने देंगे. उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में 72 साल बाद एक किसान का बेटा देश का उपराष्ट्रपति बनकर देश की सेवा कर रहा है. केंद्रीय मंत्री अभी बोल ही रहे थे कि विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरु कर दिया. इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने अदाणी मुद्दे का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.

हंगामे के बीच, रीजीजू ने कहा कि पूरा देश देख रहा है कि सभापति के रूप में उन्होंने सदन की गरिमा को बनाए रखा है लेकिन विपक्षी सदस्य इस पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने में लगे हुए हैं. सभापति को हटाने के प्रस्ताव संबंधी नोटिस को गंभीर विषय करार देते हुए रीजीजू ने कहा कि विपक्ष के लोग न लोकतंत्र को मानते हैं और ना ही आसन की गरिमा का सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्यों ने टेलीविजन पर उपराष्ट्रपति का नाम लेकर ‘बेमतलब’ के आरोप लगाए हैं.

उन्होंने कहा, ”आप लोग इस सदन का सदस्य होने के लायक नहीं हैं. अगर आप लोग आसन का सम्मान नहीं कर सकते तो आपको इस सदन का सदस्य होने का कोई अधिकार नहीं है.” रीजीजू ने कहा, ”उपराष्ट्रपति के पद पर और उनकी गरिमा पर आप लोग हमला करेंगे तो हम बिल्कुल बचाव करेंगे. आप लोगों के इरादे को कामयाब नहीं होने देंगे.” केंद्रीय मंत्री ने अमेरिकी उद्योगपति और कांग्रेस की सदस्य सोनिया गांधी का नाम लेते हुए कहा कि दोनों के जो संबंध सामने आए हैं, इसकी रिपोर्ट दुनिया के सामने है.

उन्होंने कहा, ”देश के विरोध में काम करने वालों के साथ, भारत के खिलाफ काम करने वालों के साथ आप लोग तालमेल में रहते हैं. जो जॉर्ज सोरोस बोलते हैं, आप लोग भारत में उसी भाषा में बात करते हैं.” रीजीजू ने कहा कि जिस सभापति के खिलाफ नोटिस दिया गया है, उनके जैसा सभापति मिलना मुश्किल है.

उन्होंने कहा, ”वह ऐसे नेता हैं जिन्होंने पद पर रहते हुए और इससे बाहर भी… हमेशा किसानों और गरीबों के लिए बात की है. देश के संविधान की रक्षा करने की उपराष्ट्रपति ने पहल की है. हमें गर्व है कि वह इस कुर्सी पर आसीन हैं. हम लोग फ.ख्र महसूस करते हैं. आसन के खिलाफ आप लोग कोई भी काम करेंगे और इस तरह का नोटिस देने का नाटक करेंगे तो हम लोग इसे कामयाब होने नहीं देंगे.” रीजीजू ने कांग्रेस पार्टी और सोरोस के बीच रिश्ते पर विपक्षी दल से उसका रूख स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि उसे इस मुद्दे पर देश से माफी मांगनी चाहिए.

कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने सत्ता पक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि विपक्ष की ओर बैठे सभी सदस्य संविधान के प्रति निष्ठा रखते हैं लेकिन सत्ता पक्ष की ओर बैठे लोग बाबा साहेब का संविधान बदलना चाहते हैं. उल्लेखनीय है कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के घटक दलों ने मंगलवार को धनखड़ पर ‘पक्षपातपूर्ण आचरण’ का आरोप लगाते हुए उन्हें उपराष्ट्रपति पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस सौंपा था. विपक्ष का आरोप है कि धनखड़ द्वारा अत्यंत पक्षपातपूर्ण तरीके से राज्यसभा की कार्रवाई संचालित करने के कारण यह कदम उठाना पड़ा है. उपराष्ट्रपति, राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं.

धनखड़ के खिलाफ प्रस्ताव को राजग ने राजनीति से प्रेरित बताया, विपक्ष आरोपों पर अडिग

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को पद से हटाने संबंधी प्रस्ताव के नोटिस को लेकर बुधवार को सत्तारूढ. और विपक्षी सांसदों के बीच रार देखने को मिली जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) नेताओं ने इस कवायद को ‘राजनीति से प्रेरित’ करार दिया तो वहीं विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के सदस्यों ने राज्यसभा के सभापति पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया. केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि नोटिस का उद्देश्य कांग्रेस नेतृत्व और अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस के बीच कथित संबंधों के मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाना है.

शिक्षा राज्य मंत्री ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ”जो अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, वह किसी गैर मुद्दे को मुद्दा बनाकर किसी बात को छिपाने के लिए लाया गया है. यह सोनिया गांधी के साथ जॉर्ज सोरोस के संबंध को छिपाने के लिए है क्योंकि अगर यह सामने आता है तो कांग्रेस के लिए समस्याएं होंगी. यह मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए है.” मत्स्य एवं पशुपालन राज्य मंत्री एस पी सिंह बघेल ने कहा कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस मुद्दे पर सफाई देनी चाहिए.

उन्होंने कहा, ”इस मुद्दे को निशिकांत दुबे ने लोकसभा में और सुधांशु त्रिवेदी ने राज्यसभा में उठाया था. जिसके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं, उन्हें स्पष्टीकरण देना चाहिए.” उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सभापति धनखड़ के खिलाफ ‘अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस राजनीति से प्रेरित’ है. उन्होंने कहा, उपराष्ट्रपति जो कुछ भी करते हैं, वह नियमों के अनुसार निर्णय लेते हैं. ऐसा (नोटिस) नहीं किया जाना चाहिए था.” धनखड़ के खिलाफ विपक्ष के नोटिस के बारे में पूछे जाने पर राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा कि सदन परंपरा और परिपाटी के अनुसार चलना चाहिए.

उन्होंने कहा, ”एक प्रस्ताव है. मैं जानता हूं कि भाजपा इसे स्वीकार नहीं होने देगी, भले ही उनके पास संख्या बल हो. उन्हें इस मामले पर चर्चा करनी चाहिए.” उन्होंने कहा, ”सदन को अपनी परंपरा के अनुसार चलना चाहिए, आप केवल पिछले 2-3 वर्षों की सदन की कार्यवाही देख लें और आपको पता चल जाएगा कि सदन कैसे कार्य कर रहा है.” द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता और राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा ने राज्यसभा के सभापति और उपसभापति पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ”राज्यसभा में जो हो रहा है वह अप्रत्याशित है. हम इस स्तर पर कभी नहीं आए थे. पीठासीन अधिकारी आते हैं, सत्ता पक्ष, विपक्ष पर प्रहार करता है, व्यक्तिगत हमले किए जाते हैं… ये पूरी तरह से प्रक्रिया के नियमों और कार्य संचालन के खिलाफ है.” उन्होंने कहा, ”कल भी जब उन्होंने (सत्ता पक्ष) राहुल गांधी का नाम लिया तो मैंने व्यवस्था का प्रश्न उठाया. सभापति ने कहा कि फैसला सुरक्षित रखा गया है. आज भी उन्होंने (सत्तापक्ष) सोनिया गांधी जी के बारे में बात की, आरोप लगाए. जो लोग विपक्षी दलों के खिलाफ बोलना चाहते थे, उन्हें अनुमति दी गई, उन्होंने हममें से किसी को भी बोलने का मौका नहीं दिया.”

उन्होंने कहा कि जब उपसभापति पीठासीन हुए तो उन्होंने सदन के नेता को सब कुछ बोलने की अनुमति दी लेकिन विपक्ष की तरफ रुख तक नहीं किया. तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा की उप नेता सागरिका घोष ने कहा कि राज्यसभा के सभापति के खिलाफ नोटिस किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि संसदीय लोकतंत्र को बचाने का प्रयास है.

उन्होंने कहा, ”हम चाहते हैं कि सदन पहले दिन से ही काम करे क्योंकि हम महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं. टीएमसी कहती रही है कि सदन चलाओ. सरकार सदन की कार्यवाही नहीं चलने दे रही है. यह सत्ता पक्ष है जो सदन को चलने नहीं दे रहा है.” उन्होंने कहा, ”हम संसदीय लोकतंत्र को बचाना चाहते हैं, यह व्यक्तिगत हमला नहीं है, यह संविधान को बचाने की लड़ाई है.

ढाई साल में जितना ‘नथिंग विल गो ऑन रिकॉर्ड’ सुना उतना कभी नहीं सुना था: सपा सांसद

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जावेद अली खान ने बुधवार को राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ पर विपक्ष को पूरी तरह नकारने का आरोप लगाया और कहा कि पिछले ढाई वर्षों में उन्होंने जितनी बार ‘नथिंग विल गो ऑन रिकॉर्ड’ (कार्यवाही में कुछ भी दर्ज नहीं होगा) को सुना, उतना पहले कभी नहीं सुना था.

उन्होंने विपक्ष के नेताओं के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में यह भी कहा कि विपक्ष को मजबूरी में धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद से हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस देना पड़ा है. इस संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी महासचिव जयराम रमेश, द्रमुक नेता तिरुची शिवा, तृणमूल कांग्रेस सांसद नदीमुल हक और सागरिका घोष, समाजवादी पार्टी के नेता जावेद अली खान, शिवसेना (उबाठा) के संजय राउत, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की फौजिया खान, झारखंड मुक्ति मोर्चा के सरफराज अहमद और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद विकास रंजन भट्टाचार्य मौजूद थे.

खान ने तंज कसते हुए कहा, ”मैं पहले भी एक बार राज्यसभा में रह चुका हूं. राज्यसभा का यह मेरा दूसरा कार्यकाल है जिसको ढाई साल हो चुके हैं. पिछले ढाई वर्षों में ‘नथिंग विल गो ऑन रिकॉर्ड’ (कार्यवाही में कुछ भी दर्ज नहीं होगा) को मैंने जितना इस सदन में सुना है, उतना पहले कभी नहीं सुना. विपक्ष के नेता कुछ भी कहना चाहें, तो आदेश जारी हो जाता है कि नथिंग विल गो ऑन रिकार्ड.” खान ने कहा, ”इसलिए हमें मजबूरी में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना पड़ रहा है.”

By Yogesh Kumar Sahu