भोपाल में भीख देने और मांगने पर प्रतिबंध लगाया

मंदिर के सामने बैठे भिखारी को 10 रुपये की भीख देने पर कार सवार के खिलाफ मामला दर्ज

भोपाल/इंदौर. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में प्राधिकारियों ने भीख मांगने और देने पर प्रतिबंध लगा दिया है और ऐसा करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है. राज्य के इंदौर जिले में भीख मांगने और देने पर पहले ही प्रतिबंध लगा जा चुका है. भोपाल के जिलाधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने सोमवार शाम को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 (2) के तहत जारी आदेश में भीख मांगने और देने पर प्रतिबंध लगा दिया.

आदेश में कहा गया कि यातायात सिग्नल पर भीख मांगने वाले कई भिखारी आपराधिक गतिविधियों और नशे की लत में लिप्त पाए गए हैं तथा यातायात सिग्नल पर उनकी मौजूदगी दुर्घटनाओं का खतरा पैदा करती है. इसमें कहा गया कि पूरे भोपाल जिले में भीख मांगने और भीख देने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है.

आदेश में कहा गया, ”भिखारियों को भीख के रूप में कुछ भी देने या उनसे कोई सामान खरीदने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.” इसमें कहा गया कि भीख मांगने के खिलाफ प्रशासन के प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामले दर्ज किए जाएंगे. आदेश में कहा गया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोलार (भोपाल में) स्थित एक आश्रय स्थल को भिखारियों के आश्रय के लिए आरक्षित किया गया है. पिछले साल इंदौर जिला प्रशासन ने भी भीख मांगने तथा देने पर प्रतिबंध लगाया था.

मंदिर के सामने बैठे भिखारी को 10 रुपये की भीख देने पर कार सवार के खिलाफ मामला दर्ज

इंदौर में एक मंदिर के सामने बैठे भिखारी को 10 रुपये की भीख देने वाले एक अज्ञात कार सवार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और यह शहर में पखवाड़े भर के भीतर भिक्षावृत्ति के खिलाफ इस तरह की दूसरी कार्रवाई है. पुलिस के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

अधिकारी ने बताया कि लसूड़िया थाना क्षेत्र में एक हनुमान मंदिर के सामने बैठे एक पुरुष भिखारी को सोमवार को 10 रुपये की भीख देने वाले अज्ञात कार सवार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 (किसी लोक सेवक के जारी आदेश की अवहेलना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है.

उन्होंने बताया कि यह प्राथमिकी प्रशासन के भिक्षावृत्ति उन्मूलन दल के अधिकारी फूल सिंह कारपेंटर की शिकायत पर दर्ज की गई है.
इंदौर को देश का पहला भिक्षावृत्ति मुक्त शहर बनाने का लक्ष्य तय करने वाले प्रशासन ने भीख लेने के साथ ही भीख देने और भिखारियों से कोई सामान खरीदने पर भी कानूनी रोक लगा रखी है. इस प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है.

इससे पहले, खंडवा रोड के एक मंदिर के सामने बैठी महिला भिखारी को भीख देने पर 23 जनवरी को अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. इस धारा के तहत दोषी को एक वर्ष तक के कारावास या 5,000 रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है.

भिक्षावृत्ति उन्मूलन दल के अधिकारी फूल सिंह कारपेंटर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”पिछले छह माह के दौरान शहर में भिक्षावृत्ति में लिप्त 600 से ज्यादा लोगों को पुनर्वास के लिए आश्रय स्थलों में भेजा गया है. इनमें करीब 100 बच्चे शामिल थे जिन्हें बाल देखरेख संस्थान पहुंचाया गया.” उन्होंने बताया कि इनमें से कई लोग ट्रैफिक सिग्नलों पर गुब्बारे और अन्य छोटा-मोटा सामान बेचने की आड़ में भीख मांग रहे थे.

प्रशासन ने शहर में भिक्षावृत्ति की सही सूचना देने वाले व्यक्ति को प्रोत्साहन राशि के रूप में 1,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा भी की है और कई लोगों को यह पुरस्कार दिया जा चुका है. केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने देश के 10 शहरों को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाए जाने की प्रायोगिक (पायलट) परियोजना शुरू की है जिनमें इंदौर शामिल है.

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