
नयी दिल्ली. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को कहा कि दुनिया एक नई ऊर्जा प्रणाली की ओर बढ. रही है, जबकि भारत ”रिलायंस और अदाणी जैसे एकाधिकार वाले समूहों द्वारा नियंत्रित पुरानी आर्थिक सोच में फंसा हुआ है.” कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके राहुल गांधी ने नगालैंड के छात्रों के साथ अपनी हालिया बातचीत पर अपने यूट्यूब चैनल पर जारी एक वीडियो पोस्ट में यह टिप्पणी की.
उन्होंने कहा, ”हाल ही में नगालैंड के छात्रों से बात की और महसूस किया कि हमें उनकी संस्कृति के बारे में कितना कम सिखाया जाता है. पूर्वोत्तर भारत के दृष्टिकोण और विकास के लिए कहीं अधिक केंद्रबिंदु में होना चाहिए.” कांग्रेस नेता ने कहा, ”दुनिया एक नई ऊर्जा प्रणाली की ओर बढ. रही है, जहां इले्ट्रिरक मोटर, बैटरी और ऑप्टिक्स सबसे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां होंगी. फिर भी भारत पुरानी आर्थिक सोच में फंसा हुआ है, जो रिलायंस और अदाणी जैसे एकाधिकार द्वारा नियंत्रित है.”
राहुल गांधी का कहना था, ”हमारी नीतियां अब भी जीवाश्म ईंधन के पक्ष में हैं, जबकि चीन और अमेरिका ईवीएस, एआई और बैटरी तकनीक में आगे हैं.” वीडियो में कांग्रेस नेता को छात्रों द्वारा बताया गया कि वे अपने हुलिये के कारण नस्लवाद का अनुभव करते हैं. कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह अज्ञानता का परिणाम है.
आरएसएस का इरादा एक विचार, एक इतिहास और एक भाषा थोपने का है, इसे स्वीकार नहीं करेंगे: राहुल
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मसौदा नियमों का हवाला देते हुए बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का इरादा देश पर एक विचार, एक इतिहास और एक भाषा थोपने का है, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा.
वह यूजसी के मसैदा नियमों के खिलाफ यहां जंतर मंतर पर द्रमुक की छात्र इकाई द्वारा आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुए. राहुल गांधी ने दावा किया, ”आरएसएस का उद्देश्य अन्य सभी इतिहास, संस्कृतियों और परंपराओं को मिटाना है. यही तो वे हासिल करना चाहते हैं. उनका इरादा देश पर एक ही विचार, इतिहास और भाषा थोपने का है.” उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस विभिन्न राज्यों की शिक्षा प्रणालियों के साथ भी ऐसा ही करने का प्रयास कर रहा है तथा यह उनके एजेंडे को आगे बढ.ाने का एक और कदम है.
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ”प्रत्येक राज्य की अपनी अनूठी परंपरा, इतिहास और भाषा होती है, यही कारण है कि संविधान में भारत को राज्यों का संघ कहा जाता है. हमें इन मतभेदों का सम्मान करना चाहिए और समझना चाहिए.” उनके मुताबिक, तमिल लोगों का हजारों वर्षों से चला आ रहा समृद्ध इतिहास, संस्कृति और परंपरा है.
राहुल गांधी ने कहा, ”यह तमिल लोगों और अन्य राज्यों का अपमान है जहां आरएसएस अपनी विचारधारा थोपने की कोशिश कर रही है. यह आरएसएस द्वारा उन सभी चीजों को कमजोर करने का एक प्रयास है.” उनका कहना था, ”कांग्रेस पार्टी और ‘इंडिया’ गठबंधन में बहुत स्पष्ट है कि हर एक राज्य, हर इतिहास, हर भाषा और हर परंपरा का सम्मान किया जाना चाहिए. उनके साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए, अलग-अलग नहीं.”
राहुल गांधी ने कहा, ”हमने अपने घोषणापत्र में पहले ही कहा था कि शिक्षा को राज्य सूची में वापस लाया जाएगा. मैं मंच पर मौजूद अपने सभी दोस्तों से कहना चाहता हूं कि आप जो कह रहे हैं हम उसका पूरा समर्थन करते हैं. हम इस देश के प्रति आरएसएस के दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं करते हैं, न ही उनके इस विचार को स्वीकार करते हैं कि इस देश पर एक दिवालिया विचारधारा थोपी जानी चाहिए.” उन्होंने कहा कि चाहे वे अपनी कल्पनाओं को साकार करने की कितनी भी कोशिश कर लें, यह देश उनकी विचारधारा को कभी स्वीकार नहीं करेगा.
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा, ”आरएसएस को यह समझने की जरूरत है कि वे संविधान, हमारे राज्यों, हमारी संस्कृतियों, परंपराओं और हमारे इतिहास पर हमला नहीं कर सकते.” कर्नाटक के उच्च शिक्षामंत्री एम सी सुधाकर द्वारा बुधवार को इसी विषय को लेकर विपक्ष शासित राज्यों के उच्च शिक्षा मंत्रियों का सम्मेलन आयोजित किया गया. उसमें कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, और झारखंड के छह मंत्रियों ने यूजीसी की ”दमनकारी” मसौदा नियमावली, 2025 के खिलाफ 15 सूत्रीय प्रस्ताव अपनाया है.



