
नयी दिल्ली. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महाकुंभ पर वक्तव्य दिए जाने के बाद मंगलवार को कहा कि उन्होंने (मोदी ने) आयोजन स्थल पर भगदड़ में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि नहीं दी और सदन में विपक्ष के नेता के तौर पर उन्हें बोलने नहीं मौका नहीं मिला. उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को रोजगार के बारे में बोलना चाहिए.
राहुल गांधी ने कहा, ”प्रधानमंत्री ने जो कहा, मैं उसका समर्थन करना चाह रहा था. कुंभ हमारी परंपरा, इतिहास और संस्कृति है. हमारी एक ही शिकायत है कि प्रधानमंत्री ने उन लोगों को श्रद्धांजलि नहीं दी, जिन्होंने कुंभ में (भगदड़ से) जान गंवाई. कुंभ की अपनी जगह है, लेकिन कुंभ में गए युवा प्रधानमंत्री से एक और चीज चाहते हैं, और वह है रोजगार. प्रधानमंत्री को रोजगार पर भी बोलना चाहिए.” उन्होंने कहा, ”लोकतांत्रिक प्रक्रिया के मुताबिक, सदन में विपक्ष के नेता को बोलने का मौका मिलना चाहिए, लेकिन वे हमें बोलने नहीं देंगे. यही नया भारत है.” कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा, ”संसद में प्रधानमंत्री के वक्तव्य के बाद विपक्ष को भी बोलने देना चाहिए था, क्योंकि कुंभ के विषय पर विपक्ष की भी भावनाएं हैं, जिसे लेकर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. इसलिए विपक्ष को भी इस बारे में बोलने देना चाहिए था.”
ओबीसी आरक्षण पर तेलंगाना ने रास्ता दिखाया, यही पूरे देश की जरूरत: राहुल
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने तेलंगाना में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा को क्रांतिकारी कदम करार देते हुए मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी के शासन वाले राज्य ने रास्ता दिखाया है और यही पूरे देश की जरूरत है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सोमवार को शिक्षा, नौकरी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में ओबीसी समुदाय के लिए 42 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने की घोषणा की.
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”कांग्रेस सरकार ने तेलंगाना में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने का वादा पूरा कर दिया है. राज्य में वैज्ञानिक तरीके से हुई जातिगत गिनती से मिली ओबीसी समुदाय की वास्तविक संख्या स्वीकार की गई और शिक्षा, रोजगार तथा राजनीति में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विधानसभा में 42 प्रतिशत आरक्षण का विधेयक पारित किया गया है.” उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की दिशा में यह वाकई एक क्रांतिकारी कदम है जिसके द्वारा राज्य में आरक्षण पर से 50 प्रतिशत की दीवार भी गिरा दी गई है.
कांग्रेस नेता के अनुसार, जातिगत सर्वेक्षण के डेटा से हर समुदाय के सामाजिक और आर्थिक हालात का विश्लेषण कर ऐसी नीतियां बनाई जाएंगी जिनसे सबकी बेहतरी सुनिश्चित हो. गांधी ने कहा कि तेलंगाना सरकार ने इसके लिए एक विशेषज्ञ समूह भी बनाया है.” उन्होंने कहा, ”मैं लगातार कह रहा हूं कि ‘एक्स-रे’ यानी जातिगत जनगणना से ही पिछड़े और वंचित समुदायों को उनका उचित हक. मिल सकता है.” गांधी ने कहा, ”तेलंगाना ने रास्ता दिखा दिया है, यही पूरे देश की ज.रूरत है. भारत में जाति जनगणना होकर रहेगी, हम करवाकर रहेंगे.”
शेयर बाजार में लगातार गिरावट पर कांग्रेस ने जताई चिंता, सरकार से ठोस कदम उठाने का किया आह्वान
कांग्रेस ने मंगलवार को राज्यसभा में शेयर बाजार में लगातार गिरावट का मुद्दा उठाया और इस पर चिंता जताते हुए निवेशकों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने का अनुरोध किया. उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने दावा किया कि दलाल स्ट्रीट ‘रक्तरंजित’ हो गया है, चारों तरफ तबाही मची हुई है और शेयर बाजार में 30 साल की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है.
उन्होंने कहा, ”पिछले पांच महीने में 95 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए. विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार अब आकर्षक नहीं लग रहा. पिछले छह महीने में विदेशी निवेशकों ने 1.67 लाख करोड़ रुपये बाजार से निकाल लिए हैं.” तिवारी ने कहा कि इन विदेशी निवेशकों को अमेरिका और चीन के बाजार आकर्षक नजर आ रहे हैं और यही वजह है कि पिछले छह महीने में चीन के बाजार में 17 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई है जबकि इस अवधि में भारतीय बाजार में 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.
उन्होंने आरोप लगाया, ”इस तबाही के बीच सरकार मौन साधे हुए है.” कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार विश्व में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले शेयर बाजारों में शामिल हो गया है और इस गिरावट का असर सबसे ज्यादा छोटे निवेशकों पर पड़ रहा है.
उन्होंने कहा, ”विदेशी निवेशकों की बिकवाली, अमेरिकी के नए टैरिफ से जुड़ी चिंताओं के चलते बाजार में यह गिरावट देखी जा रही है. लेकिन इस गिरावट में कई घरेलू कारण भी है, जैसे- देश में आर्थिक मंदी की चिंता, उम्मीद से कम कमाई, रुपए की लगातार कमजोरी, कम उपभोग और जीडीपी में गिरावट.” तिवारी ने अर्थशा्त्रिरयों का हवाला देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी वृद्धि पूर्वानुमान से कम रहेगी क्योंकि वित्तीय वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में आर्थिक विकास तुलनात्मक रूप से धीमा है.
उन्होंने कहा, ”रुपये की कमजोरी ने विदेशी पूंजी निकासी को बढ़ा दिया है, जिससे बाजार की धारणा पर और दबाव पड़ा है. दिसंबर-जनवरी में एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने एसआईपी बंद कर दी है. भारतीय शेयर बाजार देश की आर्थिक सेहत का पैमाना माना जाता है. सरकार से शेयर बाजार में गिरावट को रोकने के लिए दखल देने की मांग बढ़ गई है.” उन्होंने कहा, ”मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि वह निवेशकों को राहत पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए.” तिवारी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की आर्थिक नीति देश को ‘तबाही और बर्बादी’ की ओर ले जा रही है. उन्होंने इसमें सुधार की जरूरत पर बल देते हुए सरकार से दखल देने का अनुरोध किया.



