बंगाल हिंसा की एसआईटी जांच और पीड़ितों की सुरक्षा की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में हुई हिंसा की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया है।

कोर्ट ने दो वकीलों से अपनी याचिकाएं वापस लेने और बेहतर याचिकाएं दायर करने को कहा। इससे पहले मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर 24 परगना में हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई थी। हिंसा के दौरान तीन लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग बेघर हो गए थे।

याचिका में मामले की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की गई थी। वकील शशांक शेखर झा ने शीर्ष अदालत में जनहित याचिका में वक्फ अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद 11 अप्रैल को हुई हिंसा की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की थी। शशांक शेखर झा ने अपनी याचिका में पश्चिम बंगाल और केंद्र सरकार को मामले में प्रतिवादी बनाया था और शीर्ष अदालत से एक आदेश जारी करने का आग्रह किया था, जिसके तहत पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक और राजनीतिक हिंसा की चल रही घटनाओं की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया जा सके। आवेदक ने अदालत से यह भी मांग की थी कि वह प्रतिवादियों से कानून-व्यवस्था तंत्र की विफलता के बारे में स्पष्टीकरण मांगे। उन्होंने पीड़ितों के लिए मुआवजा और पुनर्वास की भी मांग की थी।

याचिकाकर्ता ने यह भी अनुरोध किया था कि न्यायालय दोनों सरकारों को आदेश दे कि वे वर्तमान में प्रभावित लोगों के जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित करें। सरकार हिंसा को और बढ़ने से रोकें। जनहित याचिका में कहा गया था कि न्याय और समानता के हित में न्यायालय जो उचित समझे, वैसा अन्य आदेश पारित करें। इससे पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हाल ही में भाजपा की ओर से दायर एक याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें प्रभावित सीमावर्ती जिलों में हिंसा की घटनाओं की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा जांच की मांग की गई थी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button