
भारतीय चिकित्सा संघ ने बुधवार को मानसून के दौरान इन्फ्लुएंजा ए (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में मौसमी बढ़ोतरी को लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाह जारी की। IMA ने लोगों से एंटीबायोटिक और एंटीवायरल दवाओं का खुद से सेवन न करने की अपील की है। साथ ही, गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय मदद लेने की सलाह दी है।
सलाह में कहा गया है कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की निगरानी से पुष्टि हुई है कि फिलहाल देश में फैल रहा वायरस मौसमी इन्फ्लुएंजा ए (H1N1) ही है। वायरस में किसी नए आनुवंशिक बदलाव या म्यूटेशन का पता नहीं चला है। भारत में मानसून के दौरान इन्फ्लुएंजा ए (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में मौसमी बढ़ोतरी हो रही है। संगठन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए स्पष्ट किया कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
चिकित्सकीय संस्था के मुताबिक, H1N1 से होने वाले ज्यादातर संक्रमण हल्के होते हैं और समय के साथ अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है।
तेज बुखार से लेकर बदन दर्द तक, ये हैं प्रमुख लक्षण
IMA के अनुसार H1N1 में आमतौर पर अचानक तेज बुखार और ठंड लगना, लगातार सूखी खांसी, गले में खराश, मांसपेशियों में तेज दर्द और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके अलावा सिरदर्द, नाक बहना या नाक बंद होना भी इसके सामान्य लक्षण हैं। बच्चों में मतली, उल्टी या दस्त की शिकायत अपेक्षाकृत अधिक देखी जा सकती है।
वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक का सेवन नुकसानदेह
IMA ने साफ किया कि इन्फ्लुएंजा ए (H1N1) एक वायरल बीमारी है और एंटीबायोटिक वायरस को खत्म नहीं करते।
IMA ने लोगों को आगाह करते हुए कहा,’फ्लू के लक्षण होने पर एजिथ्रोमाइसिन, एमोक्सिसिलिन-क्लैवुलैनेट, सेफिक्सिम या किसी अन्य एंटीबायोटिक का सेवन न करें।’ संस्था के मुताबिक, वायरल संक्रमण के दौरान बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से शरीर में मौजूद लाभकारी माइक्रोबायोम प्रभावित हो सकता है और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की गंभीर समस्या बढ़ सकती है।
डॉक्टर की सलाह पर ही लें एंटीबायोटिक
IMA ने स्पष्ट किया कि एंटीबायोटिक का इस्तेमाल तभी किया जाना चाहिए, जब किसी योग्य चिकित्सक को जांच और चिकित्सकीय आकलन के आधार पर द्वितीयक बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि हो।
ओसेल्टामिविर भी खुद से न लें
एंटीवायरल दवाओं को लेकर भी IMA ने लोगों को सावधान किया है। सलाह में कहा गया है कि Oseltamivir एक प्रिस्क्रिप्शन दवा है और इसका इस्तेमाल केवल कुछ विशेष चिकित्सकीय परिस्थितियों में डॉक्टर की निगरानी में किया जाना चाहिए। IMA ने स्पष्ट शब्दों में कहा,’एंटीवायरल दवाओं का खुद से सेवन न करें।’
सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत अस्पताल पहुंचें
IMA ने कुछ ऐसे गंभीर लक्षण भी बताए हैं, जिनमें तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। इनमें सांस लेने में कठिनाई, सांस फूलना या तेजी से सांस लेना, सीने में दर्द या लगातार दबाव महसूस होना और होंठों या उंगलियों का नीला पड़ना शामिल है।
खून वाली खांसी और बेहोशी जैसे लक्षण भी गंभीर
अगर मरीज को खांसी के साथ खून आए, अत्यधिक उनींदापन, भ्रम, असामान्य रूप से ज्यादा नींद या दौरे पड़ें, तो भी तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। लगातार उल्टी होना और मुंह से तरल पदार्थ तक न ले पाना भी गंभीर चेतावनी के संकेत हैं।
बच्चों में इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
बच्चों के मामले में दूध या खाना पीने में असमर्थता, अत्यधिक सुस्ती, सांस लेते समय घुरघुराहट या आवाज निकलना और सीने का बहुत ज्यादा अंदर की ओर धंसना ऐसे खतरे के संकेत हैं, जिनमें तत्काल चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।
हाथ धोने से लेकर मास्क तक, संक्रमण से बचाव जरूरी
IMA ने संक्रमण से बचने के लिए साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोने या अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या मुड़ी हुई कोहनी से ढकने की सलाह भी दी गई है। भीड़भाड़ वाली और बंद जगहों पर अच्छी तरह फिट होने वाला मास्क पहनना भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
बुखार ठीक होने के बाद भी 24 घंटे रहें घर पर
IMA ने बीमार होने पर घर पर रहने की सलाह देते हुए कहा कि बुखार कम करने वाली दवाओं के बिना बुखार पूरी तरह खत्म होने के बाद कम से कम 24 घंटे तक स्कूल, कार्यस्थल और सामाजिक आयोजनों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।
इन लोगों के लिए वार्षिक फ्लू वैक्सीन की सलाह
IMA ने स्वास्थ्यकर्मियों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर या पुरानी बीमारी से जूझ रहे लोगों को हर साल मौसमी इन्फ्लुएंजा का टीका लगवाने की सलाह दी है।
IMA के शीर्ष पदाधिकारियों ने जारी किया एडवाइजरी
यह सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाह IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिलकुमार जे. नायक और मानद महासचिव डॉ. सरबरी दत्ता ने जारी की है। IMA AMR समिति के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र सैनी और समिति के संयोजक डॉ. वेंकटेश कार्तिकेयन ने भी इस सलाह पर हस्ताक्षर किए हैं।



