
पुरी. पुरी के समुद्र में जलक्रीड़ा का आनंद लेते समय भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के बड़े भाई स्नेहाशीष गांगुली और उनकी पत्नी अर्पिता की ‘स्पीडबोट’ पलट गई लेकिन दोनों बाल-बाल बच गए. पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी. यह घटना शनिवार शाम को ‘लाइटहाउस’ के पास हुई जब दंपति ‘स्पीडबोट’ में सवार थे. स्थानीय टेलीविजन चैनलों द्वारा प्रसारित एक वीडियो में नौका को एक विशाल लहर से टकराकर संतुलन बिगड़ते हुए और पानी में पलटते देखा जा सकता है.
‘पीटीआई-भाषा’ के पास उपलब्ध एक वीडियो संदेश में अर्पिता ने कहा, ”भगवान की कृपा से हम बच गए. मैं अभी भी सदमे में हूं. ऐसा नहीं होना चाहिए और समुद्र में जलक्रीड़ा की व्यवस्था सही तरीके से की जानी चाहिए. मैं कोलकाता लौटने के बाद पुरी के पुलिस अधीक्षक और ओडिशा के मुख्यमंत्री को पत्र लिखूंगी.” इस घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा कि नौका लगभग दस मंजिल जितनी ऊंची लहर से टकराई जिसके कारण नौका पलट गई और वह तथा उनके पति स्नेहाशीष सहित सभी यात्री समुद्र में गिर गए.
उन्होंने कहा, ”शुक्र है कि ‘लाइफगार्ड’ द्वारा तुरंत कार्रवाई करने से हमारी जान बच गई.” स्थानीय पुलिस ने कहा कि समुद्र तट पर तैनात ‘लाइफगार्ड’ मौके पर पहुंचे और नौका में सवार पर्यटकों को बचाया. उन्होंने पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्यूब का इस्तेमाल किया. साफ तौर पर सहमी दिख रही अर्पिता ने आरोप लगाया कि ‘एडवेंचर स्पोर्ट्स’ संचालकों के ”लालच” के कारण यह हादसा हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि 10 यात्रियों के लिए बनी नौका पर केवल चार यात्री सवार थे जिसके कारण नौका अस्थिर हो गई और लहरों का सामना नहीं कर पाई.
उन्होंने कहा, ”वजन कम होने के कारण, नौका का संतुलन बिगड़ गया और वह विशाल लहर के सामने टिक नहीं सकी. समुद्र में पहले ही काफी ऊंची लहरें उठ रही थीं.” अर्पिता ने कहा, ”हालांकि हमने समुद्र में उच्च ज्वार के कारण सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन संचालकों ने हमें आश्वासन दिया कि यह सुरक्षित है. लेकिन जैसे ही नौका समुद्र की तरफ बढ.ी तो कुछ समय बाद ही वह एक बड़ी लहर की चपेट में आकर पलट गई.” सरकार से क्षेत्र में जल क्रीड़ाओं के लिए नियम सख्त करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यहां ऐसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए.
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि ‘स्पीडबोट’ को एक निजी कंपनी के तहत काम करने वाले अप्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा संचालित किया जा रहा था. एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, ”चालक दल ऊंची लहरों में बोट को संभालने के लिए सक्षम नहीं था और कंपनी ने ऐसी गतिविधियों के लिए अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी की.” यह भी आरोप लगाया गया कि कंपनी पुरी जिला प्रशासन से अपेक्षित अनुमति के बिना जल क्रीड़ा आयोजित कर रही थी.



