न्यायालय का असम में निर्वासन अभियान पर याचिका पर विचार से इनकार

Author: navabharat digital
UPDATED: Mon, 02 Jun 2025 01:31 PM
न्यायालय का असम में निर्वासन अभियान पर याचिका पर विचार से इनकार
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नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें आरोप लगाया गया है कि असम सरकार ने राष्ट्रीयता सत्यापन किए बिना या सभी कानूनी उपायों के समाप्त हुए बिना संदिग्ध विदेशी लोगों को हिरासत में लेने और निर्वासित करने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने याचिकाकर्ता को इस मामले में गुवाहाटी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को कहा। पीठ ने याचिकाकर्ता ‘आॅल बीटीसी माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन’ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े से पूछा, ‘‘आप गुवाहाटी उच्च न्यायालय क्यों नहीं जा रहे हैं?’’ हेगड़े ने कहा कि यह याचिका उच्चतम न्यायालय के पूर्व के एक आदेश पर आधारित है।

पीठ ने कहा, ‘‘कृपया गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाएं।’’ हेगड़े ने कहा कि याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय के समक्ष उचित कदम उठाने के लिए याचिका वापस लेंगे। पीठ ने उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
अधिवक्ता अदील अहमद के माध्यम से दायर याचिका में शीर्ष अदालत के चार फरवरी के आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें एक अलग याचिका पर विचार करते हुए असम को 63 घोषित विदेशी नागरिकों, जिनकी राष्ट्रीयता ज्ञात है, उनके निर्वासन की प्रक्रिया दो सप्ताह के भीतर शुरू करने का निर्देश दिया गया था।

याचिका में दावा किया गया है ,‘‘उक्त आदेश (चार फरवरी के) के अनुसरण में… असम राज्य ने विदेशी होने के संदेह वाले व्यक्तियों को हिरासत में लेने और निर्वासित करने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है। विदेशी न्यायाधिकरण के फैसले के बिना, राष्ट्रीयता सत्यापन किए बिना या सभी कानूनी उपायों के इस्तेमाल के बिना ये किया गया।’’
याचिका में कुछ खबरों का हवाला दिया गया जिनमें एक सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक के बारे में भी रिपोर्ट थी कि उसे कथित तौर पर बांग्लादेश ‘‘वापस भेज दिया गया।’’ याचिका में यह निर्देश देने की मांग की गई है कि किसी भी व्यक्ति को चार फरवरी के आदेश के अनुसार विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा कारण बताए बिना, अपील या समीक्षा का पर्याप्त अवसर दिए बिना और विदेश मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीयता के सत्यापन के बिना निर्वासित नहीं किया जाएगा।

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