कांग्रेस की कर्नाटक सरकार कराएगी जातिगत गणना, आलाकमान ने भगदड़ को लेकर लिया ब्यौरा

नयी दिल्ली. कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से सोमवार को बेंगलुरु भगदड़ मामले को लेकर पूरी जानकारी ली तथा यह स्पष्ट किया कि सरकार का रुख जनोन्मुखी होना चाहिए. पार्टी आलकमान ने यह भी तय किया कि कर्नाटक में कुछ समुदायों की चिंताओं को दूर करने के लिए राज्य में जातिगत आंकड़ों को फिर से एकत्र किया जाएगा. कुछ समुदायों ने 10 साल पहले किए गए जातिगत सर्वेक्षण से बाहर रखे जाने जाने की शिकायत की थी.

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार ऐसे समय जातिगत गणना कराने जा रही है जब केंद्र सरकार ने देश में जनगणना शुरू कराने की आधिकारिक घोषणा कर दी हैं जिसमें जातिगत आंकड़े भी एकत्र किए जाएंगे. कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में हुई उच्च-स्तरीय बैठक में बेंगलुरु भगदड़ और इस पर सरकार के कदमों को लेकर भी चर्चा की गई. बीते चार जून को मची भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई थी.

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार उपस्थित थे. इस बैठक में जातिगत सर्वेक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठा. बैठक के बाद कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, ”जातिगत गणना पर चर्चा हुई. कांग्रेस पार्टी सोच रही है कि कर्नाटक सरकार ने जातिगत गणना में जो कुछ भी किया है, उस पर सैद्धांतिक रूप से सहमति होनी चाहिए. लेकिन जाति की गिनती को लेकर कुछ वर्गों और समुदायों में कुछ आशंकाएं हैं.” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने एक दशक पहले जातिगत गणना कराई थी और यह आंकड़ा अब पुराना हो चुका है.

वेणुगोपाल ने कहा, ”कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री को एक निर्धारित समय, जैसे 60-80 दिनों के भीतर पुन: गणना प्रक्रिया कराने का सुझाव दिया है. हमने बैठक में जाति गणना के बारे में यही निर्णय लिया है.” वेणुगोपाल ने कहा, ”भगदड़ की दुखद घटना समेत राजनीतिक हालात पर सार्थक चर्चा हुई. मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष (शिवकुमार) ने पार्टी नेतृत्व को भगदड़ की घटना और इसके बाद सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी दी.” उनका कहना था, ”हमें मानवीय जीवन की बहुत चिंता है. दुर्भाग्यूर्ण घटना हुई और सरकार न्यायिक जांच का आदेश दे चुकी है. पार्टी इस घटना की जांच के विवरण में नहीं जाना चाहती है. पार्टी का स्पष्ट मानना है कि सरकार का जनोन्मुखी रवैया होना चाहिए.”

वेणुगोपाल ने यह आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केंद्रीय योजनाओं के लिए आवंटन में कर्नाटक को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रही है तथा राज्य के लोगों के साथ अन्याय कर रही है. समझा जाता है कि विधान परिषद में नामांकन के लिए राज्यपाल को भेजे जाने वाले चार नामों पर भी चर्चा हुई. ऐसी खबरें थीं कि पार्टी आलाकमान के निर्देश के बाद नामों को रोक दिया गया था.

सरकार में किसी संभावित बदलाव के बारे में पूछे जाने पर शिवकुमार ने कहा, ”कोई योजना में नहीं है.” उन्होंने कहा कि कांग्रेस महासचिव (वेणुगोपाल) पहले ही बोल चुके हैं और ”सबकी एक आवाज, पार्टी एकजुट है.” रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की आईपीएल के फाइनल मुकाबले में पहली जीत का जश्न मनाने के लिए चार जून को यहां चिन्नास्वामी स्टेडियम में एक समारोह आयोजित किया गया था, लेकिन स्टेडियम के बाहर भगदड़ मचने से 11 लोगों की मौत हो गई थी और 56 से अधिक लोग घायल हुए थे.

इससे पहले, राज्य के लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा था कि यह निर्धारित करने के लिए जांच की जा रही है कि क्या सरकार की ओर से किसी तरह की लापरवाही हुई है. उन्होंने कहा, ”अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद सच सामने आ जाएगा.” इस घटना के बाद राज्य की कांग्रेस सरकार की तीखी आलोचना हो रही है तथा विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल-सेक्युलर (जद-एस) ने मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री दोनों को इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है. सिद्धरमैया ने इस घटना से खुद को अलग कर लिया था और कहा था कि उन्हें देर से सूचित किया गया था और स्टेडियम के इस कार्यक्रम का आयोजन सरकार ने नहीं किया था.

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