शुभांशु शुक्ला 18 दिन आईएसएस पर रहने के बाद पृथ्वी पर सुरक्षित लौटे

शुभांशु शुक्ला के 17 अगस्त तक भारत आने की संभावना : जितेंद्र सिंह

नयी दिल्ली. शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर 18 दिन के प्रवास के बाद मंगलवार को खुशी और मुस्कुराहट के साथ पृथ्वी पर लौट आए. यह एक ऐसी उपलब्धि है, जो भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान की महत्वाकांक्षाओं को साकार करने का वादा करती है.

लखनऊ में जन्मे शुक्ला और निजी ‘एक्सिओम-4’ मिशन के तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री प्रशांत समयानुसार रात 2:31 बजे (भारतीय समयानुसार अपराह्न 3:01 बजे) कैलिफोर्निया के सैन डिएगो के निकट प्रशांत महासागर में उतरे. इस दौरान पूरे भारत में खुशी की लहर दौड़ गई. भारतीय वायु सेना में ग्रुप कैप्टन शुक्ला अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय हैं. इससे पहले राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत रूस मिशन के तहत अंतरिक्ष की यात्रा की थी.

वह ऐसे पहले भारतीय भी बन गए हैं, जिन्होंने पृथ्वी की कक्षा में सबसे लंबे समय (20 दिन) तक रहकर अंतरिक्ष की यात्रा की.
भारत, हंगरी और पोलैंड के लिए इस मिशन ने मानव अंतरिक्ष उड़ान की वापसी को साकार किया है, क्योंकि इन देशों के अंतरिक्ष यात्रियों ने 40 वर्षों से अधिक समय बाद पहली बार अंतरिक्ष की यात्रा की है.

ड्रैगन ग्रेस अंतरिक्ष यान 25 जून को फ्लोरिडा से उड़ा था और 28 घंटे की यात्रा के बाद 26 जून को आईएसएस पहुंचा था.
कक्षीय प्रयोगशाला में शुक्ला, कमांडर पैगी व्हिटसन तथा पोलैंड के मिशन विशेषज्ञ स्लावोज. उज़्नान्स्की-विस्नीवस्की और हंगरी के टिबोर कापू सहित एक्सिओम-4 मिशन दल ने अगले 18 दिन 60 प्रयोगों और 20 संपर्क सत्रों में बिताए.

ड्रैगन अंतरिक्ष यान ने 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से यात्रा करते हुए एक्सिओम-4 चालक दल के सदस्यों को लेकर धीरे-धीरे गति कम करने और पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने के लिए कई प्रक्रियाएँ पूरी कीं तथा प्रशांत महासागर में उतरने से पहले तीव्र गर्मी का सामना किया.

कुछ ही मिनटों बाद ड्रैगन अंतरिक्ष यान को स्पेसएक्स के ‘रिकवरी शिप शैनन’ के ऊपर ले जाया गया, जहां शुक्ला और अन्य अंतरिक्ष यात्री मुस्कुराते हुए और कैमरों की ओर हाथ हिलाते हुए अंतरिक्ष यान से बाहर निकले. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर तीन सप्ताह तक भारहीनता की स्थिति में रहने के बाद पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण के साथ तालमेल बिठाने के लिए पैरों के सहारे चलवाने में शुक्ला और तीनों अंतरिक्ष यात्रियों की ‘ग्राउंड स्टाफ’ ने मदद की.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंतरिक्ष प्रवास के बाद पृथ्वी पर लौटे शुभांशु शुक्ला को बधाई दी और कहा कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर ‘एक्सिओम-4’ मिशन के संचालन में उनकी भूमिका ने भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है.

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”इस मिशन में शामिल सभी लोगों को मेरी बधाई.” अंतरिक्ष यात्रा से शुक्ला के लौटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, ”मैं ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्वागत करने में राष्ट्र के साथ शामिल हूं, क्योंकि वह अपने ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन से पृथ्वी पर लौट आए हैं.” लखनऊ में शुक्ला के माता-पिता ने अपने बेटे के पृथ्वी पर लौटने पर राहत की साँस ली. शुक्ला के पिता शंभू दयाल शुक्ला और माँ आशा देवी की आंखों से खुशी के आँसू निकल आए. उनकी बहन शुचि मिश्रा ने भी नम आँखों और हाथ जोड़कर अपने भाई के पृथ्वी पर उतरने का स्वागत किया.

शंभू दयाल शुक्ला ने कहा, ”वह अंतरिक्ष में गए और वापस आए तथा हम बहुत खुश हैं, क्योंकि इस मिशन का देश के गगनयान कार्यक्रम के लिए अपना महत्व है.” इसरो ने अंतरिक्ष उड़ान के लिए 550 करोड़ रुपये का निवेश किया था और इस मिशन से प्राप्त सीख से भारत को अपनी मानव अंतरिक्ष उड़ान महत्वाकांक्षाओं – गगनयान परियोजना को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है, जिसके 2027 तक प्रक्षेपण की योजना है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा करने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में शुक्ला ने अपने समर्पण, साहस और अग्रणी भावना से करोड़ों सपनों को प्रेरित किया है. मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”यह हमारे अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन – गगनयान की दिशा में एक और मील का पत्थर है.” हेलीकॉप्टर के जरिए तट पर ले जाए जाने से पहले एक्सिओम-4 के चालक दल को जहाज पर ही कई चिकित्सीय जांचों से गुजरना पड़ा.

चारों अंतरिक्ष यात्रियों के फिर से धरती के वातावरण में गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव के प्रति अनुकूलन के लिए सात दिन पुनर्वास कार्यक्रम में रहने उम्मीद है, क्योंकि पृथ्वी की कक्षा में वे भारहीनता की स्थिति में थे. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि शुक्ला ने सभी सात सूक्ष्म गुरुत्व प्रयोगों और अन्य नियोजित गतिविधियों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिससे ‘एक्सिओम-4’ मिशन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है.

इसने कहा कि टार्डग्रिेड्स के भारतीय प्रकार, मायोजेनेसिस, मेथी और मूंग के बीजों का अंकुरण, साइनोबैक्टीरिया, सूक्ष्म शैवाल, फसल के बीज और ‘वॉयेजर डिस्प्ले’ पर प्रयोग योजना के अनुसार पूरे हो गए हैं.

शुक्ला ने भारत का गौरव बढ़ाया, वैज्ञानिकों में फिर से विश्वास जगाया: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा के बाद पृथ्वी पर सफलतापूर्वक लौटने पर मंगलवार को बधाई दी. केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि शुक्ला ने एक ऐसी ”विजय गाथा” लिखी है, जिसने न केवल देश का गौरव बढ़ाया है, बल्कि भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों एवं वैज्ञानिकों में अपनी प्रतिभा और साहस को लेकर विश्वास भी जगाया है.

शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा के बाद पृथ्वी पर उनकी सफल वापसी पर हार्दिक बधाई. भारत की महानता की खोज में उन्होंने विजय की एक ऐसी गाथा लिखी है, जिसने न केवल हमारा गौरव बढ़ाया है, बल्कि भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों और वैज्ञानिकों में अपनी प्रतिभा और साहस के प्रति विश्वास भी जगाया है.” गृह मंत्री ने कहा कि इस यात्रा के दौरान अर्जित ज्ञान और अनुभव भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में भारत के लिए महत्वपूर्ण होंगे.

शुभांशु शुक्ला ने भारत की आकांक्षाओं को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया: राजनाथ सिंह

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि शुभांशु शुक्ला ने न केवल अंतरिक्ष को छुआ है, बल्कि ”भारत की आकांक्षाओं को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाया है.”

लखनऊ से लोकसभा सदस्य सिंह ने शुक्ला के पिता से फोन पर बात करके उन्हें शुभकामनाएं दीं और कहा कि देश को उनके बेटे की उपलब्धियों पर गर्व है. कैमरों की ओर देखकर मुस्कुराते हुए और हाथ हिलाते हुए शुक्ला और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री मंगलवार को ड्रैगन ग्रेस अंतरिक्षयान से बाहर निकले और अंतरिक्ष यात्रा पूरी करने के बाद ताजी हवा में पहली सांस ली.

भारतीय वायुसेना के 39 वर्षीय अधिकारी और परीक्षण पायलट शुक्ला ने ‘एक्सिओम-4’ मिशन के तहत अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा पूरी की. यह एक वाणिज्यिक अंतरिक्ष उड़ान थी, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का समर्थन प्राप्त था तथा यह एक्सिओम स्पेस द्वारा संचालित थी. सिंह ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक एक्सिओम-4 मिशन से सफलतापूर्वक वापसी हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है. उन्होंने न केवल अंतरिक्ष को छुआ है, बल्कि भारत की आकांक्षाओं को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक उनकी यात्रा और वापसी सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, यह भारत की बढ़ती अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के लिए एक गौरवशाली कदम है. उनके भविष्य के प्रयासों के लिए अपार सफलता की कामना करता हूं.” भारतीय वायुसेना ने भी शुक्ला का स्वागत करते हुए ‘एक्स’ पर एक बधाई संदेश पोस्ट किया. वायुसेना ने पोस्ट किया, ”पृथ्वी पर आपका स्वागत है, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला. भारतीय वायुसेना के सभी वायु योद्धा एक्सिओम-4 मिशन के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर आपको हार्दिक बधाई देते हैं.”

अंतरिक्ष प्रवास के बाद पृथ्वी पर लौटे शुभांशु शुक्ला का हार्दिक स्वागत है: राष्ट्रपति मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को 20 दिवसीय अंतरिक्ष प्रवास के बाद पृथ्वी पर लौटे शुभांशु शुक्ला को बधाई दी और कहा कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर ‘एक्सिओम-4’ मिशन के संचालन में उनकी भूमिका ने भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है.

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”इस मिशन में शामिल सभी लोगों को मेरी बधाई.” कैमरों की ओर हाथ हिलाते और मुस्कुराते हुए शुक्ला तथा ‘एक्सिओम-4’ मिशन के तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री मंगलवार को ‘ड्रैगन ग्रेस’ अंतरिक्षयान से बाहर निकले तथा अंतरिक्ष यात्रा पूरी करने के बाद ताजा हवा में पहली सांस ली.

ड्रैगन अंतरिक्ष यान भारतीय समयानुसार अपराह्न 3:01 बजे अमेरिका में दक्षिणी कैलिफोर्निया के सैन डिएगो के पास समुद्र में उतरा. इस तरह अंतरिक्ष यात्रियों की 20 दिन की अंतरिक्ष यात्रा पूरी हो गई जिसमें 18 दिन उन्होंने आईएसएस पर बिताए. राष्ट्रपति ने कहा, ”इस मिशन में शामिल सभी लोगों को मेरी बधाई.” भारतीय वायुसेना के 39 वर्षीय अधिकारी और टेस्ट पायलट शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा पूरी की. यह एक वाणिज्यिक अंतरिक्ष उड़ान थी जिसे इसरो और नासा का समर्थन प्राप्त था तथा इसे एक्सिओम स्पेस द्वारा संचालित किया गया.

शुभांशु शुक्ला के 17 अगस्त तक भारत आने की संभावना : जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के मिशन बाद की कई प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद 17 अगस्त तक भारत पहुंचने की उम्मीद है. शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर 18 दिनों के प्रवास के बाद मंगलवार को पृथ्वी पर लौटे.

सिंह ने ‘पीटीआई वीडियो’ को बताया, “कुछ मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन किया जाना है… उनका पुनर्वास, डीब्रीफिंग सत्र और इसरो की टीम के साथ कई चर्चाएं. हम 17 अगस्त तक उनके दिल्ली पहुंचने की उम्मीद कर सकते हैं.” इस मिशन को “अभूतपूर्व” बताते हुए सिंह ने कहा कि कक्षीय प्रयोगशाला में अपने प्रवास के दौरान शुक्ला द्वारा किए गए प्रयोग मानव अस्तित्व और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में जीवन से निकटता से जुड़े हैं.

उन्होंने कहा, “ये प्रयोग न केवल भारतीयों के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए उपयोगी होंगे.” सिंह ने कहा, ”यह भारत के लिए अत्यंत खुशी का क्षण है कि भारत माता का एक योग्य सपूत आज सफलतापूर्वक लौट आया है.” मंत्री ने कहा कि शुक्ला की यात्रा वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है.

शुभांशु शुक्ला की उपलब्धि ने अरबों सपनों को प्रेरित किया है: प्रधानम­ंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि शुभांशु शुक्ला ने अपने समर्पण, साहस और अन्वेषण भावना से करोड़ों सपनों को प्रेरित किया है. शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 18 दिन रहने के बाद पृथ्वी पर लौट आए हैं. मोदी ने ‘एक्स’ पर कहा, “मैं राष्ट्र के साथ मिलकर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्वागत करता हूं, जो अपने ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन से पृथ्वी पर लौट आए हैं.” उन्होंने शुक्ला की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का दौरा करने वाले पहले भारतीय हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत के अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन – गगनयान की दिशा में एक और मील का पत्थर है.

धरती पर वापस लौटे भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला
अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को लेकर ड्रैगन अंतरिक्ष यान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर 18 दिनों के प्रवास के बाद पृथ्वी पर लौटा, तो वह अपने साथ सिर्फ वैज्ञानिक आंकड़े और बीज के नमूने ही नहीं बल्कि साहस, सपनों और भारत की बढ़ती अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं की कहानी भी लेकर आया.

भारतीय वायुसेना के अधिकारी और टेस्ट पायलट ग्रुप कैप्टन शुक्ला (39) ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा पूरी की. यह एक वाणिज्यिक अंतरिक्ष उड़ान थी, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ का सहयोग प्राप्त था तथा एक्सिओम स्पेस द्वारा संचालित किया गया.

यह यात्रा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है: शुक्ला आईएसएस पर पहुंचने वाले पहले भारतीय हैं तथा 1984 में राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं. शर्मा के अंतरिक्ष उड़ान के ठीक एक साल बाद, 10 अक्टूबर 1985 को जन्मे शुक्ला लखनऊ के एक मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े, जिनका विमानन क्षेत्र या अंतरिक्ष से कोई सीधा संबंध नहीं था. लेकिन बचपन में एक एयर शो देखने की यात्रा ने उनमें एक चिंगारी जला दी.

उनकी बड़ी बहन शुचि शुक्ला को याद है कि यह सब कब शुरू हुआ था. उन्होंने कहा, ”बचपन में वह एक बार एयर शो देखने गया था. बाद में उसने मुझे बताया कि वह विमान की गति और ध्वनि से कितना मोहित हो गया था. फिर उसने उड़ने के अपने सपने के बारे में बताया, लेकिन निश्चित रूप से उस समय कोई नहीं बता सकता था कि वह अपने सपने को कितनी जल्दी पूरा करेगा.” सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सीएमएस) से शिक्षा प्राप्त शुक्ला का सितारों तक का सफ.र किसी भी तरह से तय नहीं था. नियति के एक झटके में, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में आवेदन कर रहे उनके एक सहपाठी को एहसास हुआ कि उनकी उम्र ज़्यादा हो गई है और उन्होंने शुक्ला को अपना फॉर्म थमा दिया.

शुक्ला 2006 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए. उनके पास सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29, जगुआर और डोर्नियर-228 सहित विभिन्न प्रकार के विमानों पर 2,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है. बाद में उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एमटेक की डिग्री हासिल की. पिछले साल, उन्हें भारत के पहले मानव अंतरिक्ष यान मिशन गगनयान के लिए साथी परीक्षण पायलट प्रशांत बालकृष्णन नायर, अंगद प्रताप और अजीत कृष्णन के साथ भारत के अंतरिक्ष यात्री दल का हिस्सा बनने के लिए चुना गया था.

चारों ने रूस के गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर और बेंगलुरु स्थित इसरो के अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र में गहन प्रशिक्षण लिया. लेकिन 2027 में गगनयान के निर्धारित प्रक्षेपण से पहले, शुक्ला को एक्सिओम-4 चालक दल के तहत उड़ान भरने का अवसर मिला. इस तरह 41 साल बाद किसी भारतीय को मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन में शामिल किया गया.

कई बार प्रक्षेपण टलने के बाद, शुक्ला आखिरकार 25 जून को स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से कैनेडी स्पेस सेंटर से रवाना हुए. मिशन के दस मिनट बाद, ड्रैगन कैप्सूल ने कक्षा में प्रवेश किया, जिसके बाद शुक्ला ने कहा “कमाल की राइड थी” और राष्ट्रीय गौरव की अपनी भावना साझा की. उन्होंने कहा, “मेरे कंधे पर मेरे साथ मेरा तिरंगा है जो मुझे बता रहा है कि मैं अकेले नहीं, (बल्कि) मैं आप सबके साथ हूं.” “शक्स” उपनाम से प्रसिद्ध और अपने शांत स्वभाव के लिए जाने जाने वाले शुक्ला अंतरिक्ष में भारतीय व्यंजन लेकर गए जिनमें गाजर का हलवा और मूंग दाल का हलवा भी शामिल था ताकि चालक दल के अन्य सहयोगियों को घर जैसा स्वाद मिल सके.

शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेश’ का गाना “यूं ही चला चल…” उनका पसंदीदा गीत है. शुक्ला ने जीवन विज्ञान, कृषि, अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी और संज्ञानात्मक अनुसंधान के विविध क्षेत्रों में भारत के नेतृत्व में सात सूक्ष्म गुरुत्व प्रयोग किए. शुक्ला ने नौ जून को एक्सिओम अंतरिक्ष की मुख्य वैज्ञानिक लूसी लो के साथ बातचीत में कहा, ”मुझे बहुत गर्व है कि इसरो देश भर के राष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलकर कुछ बेहतरीन शोध कर पाया है, जो मैं स्टेशन पर सभी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए कर रहा हूं. ऐसा करना रोमांचक और आनंददायक है.” अंकुरण प्रयोग का नेतृत्व दो वैज्ञानिकों- कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, धारवाड़ के रविकुमार होसामनी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, धारवाड़ के सुधीर सिद्धपुरेड्डी द्वारा किया जा रहा है. शुक्ला ने मूंग और मेथी के बीजों को कांच की तश्तरियों में बोया और उनके अंकुरण की प्रगति को रिकॉर्ड किया तथा बाद में पृथ्वी पर विश्लेषण के लिए उन्हें कोल्ड स्टोरेज में रख दिया.

यह अध्ययन इस बात पर आधारित था कि सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण किस प्रकार अंकुरण और पौधों के प्रारंभिक विकास को प्रभावित करता है. शुक्ला ने एक अन्य प्रयोग में सूक्ष्म शैवालों का इस्तेमाल किया जिनकी भोजन, ऑक्सीजन और यहां तक कि जैव ईंधन उत्पन्न करने की क्षमता की जांच की जा रही है.

उन्होंने स्टेम सेल अनुसंधान में भी भाग लिया, यह पता लगाने के लिए कि क्या पूरक पदार्थ अंतरिक्ष में चोट को भरने और ऊतक पुनर्जनन में सहायक हो सकते हैं. शुक्ला ने कहा, “ग्लव बॉक्स में इस शोध में काम करना बहुत अच्छा रहा. मुझे पृथ्वी और अंतरिक्ष स्टेशन के वैज्ञानिकों के बीच एक सेतु बनने पर गर्व है.” उनके हल्के फुल्के प्रयोगों में से एक शून्य-गुरुत्वाकर्षण प्रदर्शन था जिसमें पानी का उपयोग किया गया था. सतह तनाव का फ.ायदा उठाते हुए शुक्ला ने पानी का एक तैरता हुआ बुलबुला बनाया. उन्होंने मज.ाक में कहा, ”मैं यहां स्टेशन पर पानी को घुमाने रहा हूं.” जैसे ही मिशन पूरा होने के करीब पहुंचा, शुक्ला और उनके एक्सिओम-4 चालक दल के साथी 13 जुलाई को विदाई समारोह के लिए लंबी अवधि के मिशन, ‘एक्सपेडिशन 73’ के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ शामिल हुए.

शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और स्कूली छात्रों से बातचीत की और रेडियो के ज.रिए इसरो केंद्र से भी जुड़े. उन्होंने कहा, “यह सिफ.र् मेरी यात्रा नहीं है, यह पूरे भारत की यात्रा है.” शुक्ला का मिशन मंगलवार को कैलिफोर्निया तट के पास ड्रैगन ‘ग्रेस’ अंतरिक्ष यान के उतरने के साथ संपन्न हो गया लेकिन उनकी कहानी जारी रहेगी.

आगामी गगनयान परियोजना तथा अंतरिक्ष अनुसंधान में नए रास्ते खुलने के साथ, उनका अनुभव भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. आईएसएस से शुक्ला ने कहा था, “मैं चाहता हूं कि आप में से प्रत्येक इस यात्रा का हिस्सा बनें. आइए, हम सब मिलकर भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत करें.”

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