केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने भारतीय प्रदर्शन कलाओं की दृष्टि से रामायण पर बनी डॉक्यूमेंट्री किया जारी

नयी दिल्ली. केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने बुधवार को ‘रामायण’ की परंपराओं और कथाओं से जुड़ी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाने वाली डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘कण-कण में राम’ जारी किया. यह फिल्म भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक धरोहर न्यास (इंटैक) के मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में जारी की गई. ‘कण-कण में राम’ शीर्षक वाली इस डॉक्यूमेंट्री में भारत के विभिन्न हिस्सों में रामायण के प्रस्तुतीकरण को दर्शाया गया है जिसमें अनुष्ठानात्मक प्रदर्शन, नृत्य-नाट्य और कठपुतली कला जैसी विविध विधाएं शामिल हैं.

शेखावत ने कहा कि यह फिल्म लोगों से आग्रह करती है कि वे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को केवल धार्मिक दृष्टिकोण से न देखें. ‘कण-कण में राम’ का अर्थ है कि उनके चरित्र से स्थापित जीवन के सिद्धांत हमारे सांस्कृतिक ताने-बाने में गहराई से रचे-बसे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”इस डॉक्यूमेंट्री में आपको भारतीय संस्कृति के उन पहलुओं का भी परिचय मिलेगा जिन पर ज्यादा चर्चा नहीं होती या जिनके बारे में जानकारी कम है. यह डॉक्यूमेंट्री ज्ञान और कला के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण कृति है. आप भी इसे देखें और दूसरों को भी इसके विषय में अवगत कराएं. इंटैक को इस अद्भुत रचनात्मकता के लिए बहुत-बहुत बधाई!” संस्कृति मंत्रालय ने बताया कि डॉक्यूमेंट्री में रामायण की परंपराओं और कथाओं से जुड़ी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया गया है.

फिल्म में जिन प्रमुख परंपराओं को दिखाया गया है, उनमें कर्नाटक की यक्षगान और उप्पिनीकुद्रु कठपुतली परंपरा, ओडिशा की लंका पोड़ी यात्रा और रावण छाया, असम की सत्रिया परंपरा, राजस्थान की मेवाती भपंग प्रस्तुति और छत्तीसगढ़ का रामनामी समाज शामिल हैं. मंत्रालय के अनुसार, यह फिल्म देश के विभिन्न हिस्सों में भगवान राम की सर्वव्याप्त सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उपस्थिति को उजागर करती है और यह दिखाती है कि उनकी कहानियां और शिक्षाएं धार्मिक दृष्टिकोण से परे जाकर मानवता को जोड़ती हैं. अधिकारियों ने कहा कि यह कार्यक्रम भारतीय प्रदर्शन कलाओं की दृष्टि से रामायण की विरासत और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाने का अवसर था.

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