‘आउटसोर्स’ नियुक्तियां सामाजिक न्याय के खिलाफ: माकपा

चेन्नई: तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की प्रमुख सहयोगी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सोमवार को कहा कि ‘आउटसोर्स’ नियुक्तियों की अवधारणा सामाजिक न्याय के खिलाफ है। इसने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह इस नीति को त्याग दे तथा राज्य सेवाओं के तहत रिक्तियों को स्थायी नौकरियों के रूप में मानते हुए लोक सेवा आयोग के माध्यम से र्किमयों की भर्ती करे।

चेन्नई नगर निकाय द्वारा सफाई कार्यों का निजीकरण किए जाने के विरोध में सफाई कर्मचारी 10 दिन से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। माकपा के आधिकारिक मुखपत्र ‘थीकाथिर’ ने इसका उल्लेख करते हुए एक संपादकीय में कहा कि पार्टी के तमिलनाडु प्रदेश सचिव पी. षणमुगम ने कर्मचारियों से मुलाकात की और उन्हें समर्थन दिया है।

षणमुगम ने कहा है कि तमिलनाडु में सरकारी नौकरी के अवसरों के संबंध में निजीकरण, समेकित वेतन आदि के नाम पर श्रमिकों के अधिकारों का हनन स्वीकार नहीं किया जा सकता। स्थायी नौकरी की मांग कर रहे कर्मचारी प्रस्तावित ‘आउटसोर्सिंग’ का विरोध कर रहे हैं। वे चेन्नई नगर निगम के मुख्यालय रिपन भवन के सामने अपना प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं।

माकपा सहित अन्य दलों ने भी निजीकरण का विरोध करने वाले सफाई कर्मचारियों का समर्थन किया है।
मार्क्सवादी पार्टी के तमिल मुखपत्र में कहा गया, ‘‘मदुरै निगम में भी सफाई का काम एक निजी कंपनी को सौंप दिया गया है।’’

संपादकीय के अनुसार, श्रमिकों का शोषण करने वाली निजी कंपनी के खिलाफ कई प्रदर्शन हुए हैं। सिर्फ सफाई कार्य तक सीमित नहीं रहने वाली निजी कंपनियां कई अन्य तरह के कार्य भी करवाती हैं और वे उन श्रमिकों को बहुत कम वेतन देती हैं, जो वैधानिक और सामाजिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत नहीं आते।

‘थीकाथिर’ में कहा गया कि ऐसी परिस्थितियों में यह खबर चौंकाने वाली है कि तमिलनाडु सरकार और राज्य सार्वजनिक उपक्रमों में सेवाओं के लिए र्किमयों की भर्ती ‘आउटसोर्सिंग’ से की जाएगी।

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