लड़के भी यौन उत्पीड़न को लेकर समान रूप से संवेदनशील : अदालत, दोषी को 15 साल जेल की सजा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 11 Aug 2025 08:35 PM
लड़के भी यौन उत्पीड़न को लेकर समान रूप से संवेदनशील : अदालत, दोषी को 15 साल जेल की सजा
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नयी दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने 2019 में एक नाबालिग लड़के से अप्राकृतिक यौनाचार करने के मामले में एक व्यक्ति को 15 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने कहा कि यह ”मिथक” है कि केवल लड़कियां ही ”यौन उत्पीड़न” (पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट) का शिकार होती हैं, क्योंकि लड़के भी इस घिनौने अपराध का उतना ही शिकार हो सकते हैं.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनु अग्रवाल ने उस व्यक्ति को सजा सुनाने पर दलील सुन रही थीं, जिसे यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा छह (गंभीर यौन उत्पीड़न) और भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत दोषी ठहराया गया.
यह आदेश 31 जुलाई को सुनाया गया था और जिसकी प्रति हाल में ही उपलब्ध करायी गई.

अदालत ने आदेश में कहा, ”लड़के भी लड़कियों की तरह यौन शोषण और उत्पीड़न के प्रति संवेदनशील हैं तथा लड़के भी यौन उत्पीड़न जैसे जघन्य अपराध के उतने ही शिकार होते हैं. आमतौर पर यह माना जाता है कि केवल लड़कियां ही इस तरह के अपराध की शिकार होती हैं. हालांकि, यह एक मिथक है.” दलीलों के दौरान, अतिरिक्त लोक अभियोजक अरुण के. वी. ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि बाल यौन उत्पीड़न के शिकार करीब 54.68 प्रतिशत पीड़ित लड़के हैं.
उन्होंने कहा कि लड़के भी यौन उत्पीड़न के प्रति उतने ही असुरक्षित होते हैं तथा लड़कियों की तरह ही उन्हें भी गंभीर मनोवैज्ञानिक आघात सहना पड़ता है.

अदालत ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम सभी बच्चों को संरक्षण प्रदान करता है. अदालत ने कहा, ”जिस मानसिक आघात का सामना यौन उत्पीड़न के शिकार लड़के को करना पड़ता है, वह यौन शोषण के अन्य पीड़ितों के समान ही होता है. वे भी डर, पुरानी घटनाओं की याद, तनाव और चिंता महसूस करते हैं.” अदालत ने कहा कि सामाजिक ढांचे में, जहां पुरुषत्व को गलत तरीके से भावनात्मक मजबूती से जोड़ा जाता है, लड़कों के लिए यौन उत्पीड़न से हुए मानसिक आघात से निपटना और कठिन हो जाता है.

अदालत ने कहा, ”सामाजिक ढांचे के कारण, वे शर्म महसूस करने लगते हैं और उन्हें लगता है कि वे मजबूत नहीं हैं और इसका बच्चे के संपूर्ण मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है.” जेल की सजा के अलावा, अदालत ने दोषी को एक महीने के भीतर पीड़ित को दो लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया. अदालत ने राज्य सरकार को भी नाबालिग पीड़ित को 10.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया.

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