आईआईटी गुवाहाटी व इसरो वैज्ञानिकों ने एक्स-रे सिग्नल को समझा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 18 Aug 2025 10:39 PM
आईआईटी गुवाहाटी व इसरो वैज्ञानिकों ने एक्स-रे सिग्नल को समझा
ऑडियो सुनें

नयी दिल्ली. यूआर राव सैटेलाइट सेंटर, इसरो और इजराइल के हाइफ.ा विश्वविद्यालय के सहयोग से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक ‘ब्लैक होल’ से निकलने वाले रहस्यमयी एक्स-रे सिग्नल स्वरूप को समझा है. यह ‘ब्लैक होल’ पृथ्वी से लगभग 28,000 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है. यह जानकारी अधिकारियों ने दी.

शोधकर्ताओं ने भारत की अंतरिक्ष वेधशाला ‘एस्ट्रोसैट’ से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग करते हुए पाया कि ‘ब्लैक होल’ से निकलने वाली एक्स-रे चमक तेज और मंद चरणों के बीच बदली रहती है तथा प्रत्येक चरण कई सौ सेकंड तक चलता है. इस शोध के निष्कर्षों को प्रतिष्ठित पत्रिका ‘मंथली नोटिसेज आफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी’ में प्रकाशित किया गया है.

दुनिया भर के शोधकर्ता ‘ब्लैक होल’ को समझने की दिशा में काम कर रहे हैं. जब ‘ब्लैक होल’ विभिन्न तारों की बाहरी परतों से गैस खींचते हैं, तो वे अत्यधिक गर्मी उत्पन्न करते हैं और एक्स-रे विकिरण उ्त्सिसजत करते हैं. इन एक्स-रे का अध्ययन करके वैज्ञानिक ‘ब्लैक होल’ के आसपास के वातावरण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं.

आईआईटी गुवाहाटी के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर एस. दास के अनुसार, ”हमने तेज एक्स-रे चमक (फ्लिकरिंग) के पहले साक्ष्य पाए हैं, जो स्रोत की उच्च चमक वाले चरणों के दौरान लगभग 70 बार प्रति सेकंड दोहराई जा रही है. खास बात यह है कि ये तेज चमक कम चमक वाले चरणों में पूरी तरह से गायब हो जाती हैं. इस नयी समझ को संभव बनाया है एस्ट्रोसैट की शक्तिशाली और विशिष्ट अवलोकन क्षमताओं ने.” शोधकर्ताओं ने देखा कि जिस ‘ब्लैक होल’ का अध्ययन किया गया, उससे निकलने वाली एक्स-रे चमक दो अलग-अलग चरणों में बदलती रहती है- एक तेज (चमकीला) और एक मंद (धीमा). जब चमक वाला चरण होता है और झिलमिलाहट सबसे ज़्यादा होती है, उस समय कोरोना (ब्लैक होल के आसपास की गर्म गैसों की परत) संकुचित और बहुत गर्म हो जाता है. इसके विपरीत, जब मंद चरण आता है, तब कोरोना फैल जाता है और ठंडा हो जाता है, जिससे झिलमिलाहट गायब हो जाती है.

उन्होंने कहा, ”यह स्पष्ट संबंध इस ओर इशारा करता है कि ये तेज सिग्नल संभवत? सघन कोरोना से उत्पन्न हो रहे हैं. जहां हर चरण कई सौ सेकंड तक चला और इसका नियमित रूप से दोहराव हुआ, वहीं तेज झिलमिलाहट वाला सिग्नल केवल उजले (ब्राइट) चरण के दौरान ही दिखा. यह खोज दिखाती है कि ब्लैक होल के चारों ओर कोरोना कोई स्थायी संरचना नहीं है. इसका आकार और ऊर्जा इस बात पर निर्भर है कि ब्लैक होल में गैस कैसे प्रवाहित हो रही हैं.”

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Yogesh Kumar Sahu